@RavidasShyamlal@CMMadhyaPradesh जब पात्रता परीक्षा को ही टेट माना गया है तो शिक्षक भर्ती 2018 को 8 सेल से क्यों अधूरी रखी गई है। शेष पदों पर सरकार नियुक्ति क्यों नहीं दे रही हैं। माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी शिक्षक भर्ती पूरी करें।
शिक्षक भर्ती 2018 की उम्मीदवारों को आप इस तरह नाराज क्यो��� कर रहे हो यह तो देखो सरकार हम भी तो आपके अपने देश के हैं और आपसे अपना हक मांग रहे हैं आखिर ऐसा क्यों
@RavidasShyamlal शिक्षक भर्ती 2018 आज 8 साल बाद भी अधुरी। माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी एवं शिक्षा मंत्री जी 8172 पद अभी भी शेष हैं, अभ्यर्थी मौजूद हैं लेकिन आपकी सरकार नियुक्ति नहीं दे रही हैं। अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं। अब तो संज्ञान लीजिए महोदय जी।
@CMMadhyaPradesh@udaypratapmp
@RavidasShyamlal@Vipinjain_@INCMP Mp के माननीय मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री जी, चयनित अभ्यर्थियों की पीड़ा समझिए 2018 शिक्षक भर्ती और सभी लंबित शिक्षक भर्तियों को शीघ्र पूर्ण कराइए।
हरिभूमि न्यूज़ भोपाल ने प्राथमिकता से छापी 2018 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की पीड़ा। 8 वर्ष शिक्षक भर्ती अधूरी है, अभ्यर्थी ओवर एज हो चुके हैं लेकिन मध्य प्रदेश सरकार भर्ती को पूर्�� करने में असमर्थ है। भाजपा सरकार युवाओं को अनदेखा कर रही है जिसका उदाहरण दिल्ली का आंदोलन ह���।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ हीरालाल अलावा जी एवं उमंग सिंगार जी से अनुरोध हैं कि 2018 शिक्षक भर्ती के पदों पर योग्य प्रतिभावान युवाओं को नियुक्तियां करवाने विधान सभा में आवाज उठाने की कृपा करें
2018 के पात्र अभ्यर्थियों पर आप दोनों महोदय का बड़ा उपकार हो जाएगा।
मध्य प्रदेश में युवाओं को नौकरी देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है,
लेकिन 17 जिलों में बीजेपी के भव्य जिला कार्यालय बनाने के करोड़ो रुपये कहां से आएंगे ?
पार्टी के दफ्तर चमक-दमक से जगमगाते रहें? क्या यही है सरकार की असली प्राथमिकता — पार्टी पहले, प्रदेश और युवा बाद में!
जब सरकार के पास विकास और रोजगार के लिए पैसे नहीं, तो पार्टी संगठन के लिए इतना भारी भरकम बजट कहाँ से आ रहा है?
#Ugc कानून पर BJP समर्थक #आनंद_रंगनाथन ने मोदी सरकार की पोल खोलकर रख दी है।
बीजेपी ने गुपचुप तरीके से यूजीसी लाकर 35 करोड़ जनरल कास्ट को को सिस्टम से बाहर कर दिया है
ऐसा लगता है हवा का रुख बदल रहा है — धीरे धीरे ही सही लोगों को सच समझ आ रहा है।
*BIG BREAKING: नवोदय स्कूल क्लास 6th प्रवेश में EWS को जगह नहीं, देशभर में लाखों छात्र वंचित — हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब*
जबलपुर/नई दिल्ली
जवाहर नवोदय विद्यालयों की क्लास 6th 2026 -27 की प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को कोई अवसर न दिए जाने के मामले ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने गंभीरता दिखाते हुए केंद्र सरकार, Navodaya Vidyalaya Samiti सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
*क्या है पूरा मामला*
याचिकाकर्ता के अधीवक्ता विकास मिश्रा ने बताया यह याचिका एक नाबालिग छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी द्वारा दायर की गई है याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्य��लयों की स्थ��पना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, ऐसे में EWS वर्ग को बाहर रखना नीति के उद्देश्य के विपरीत है। याचिका में बताया गया है कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं और दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू है *लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई भी आरक्षण या विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इस वर्ग के छात्र पूरी तरह से बाहर हो जाते हैं।*देश में वर्तमान में लगभग 650 से अधिक नवोदय विद्यालय संचालित हैं*, जिनमें करीब 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं।
इनमें SC, ST और OBC वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि EWS वर्ग के लिए कोई अलग स्थान या आरक्षण नहीं है।
याचिका में उल्लेख किया गया है कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा संस्थानों में 10% तक आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में EWS को शामिल नहीं किया गया, जिसे याचिका में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है।
मामले में यह भी उठाया गया है कि Kendriya Vidyalaya Sangathan के अंतर्गत संचालित केंद्रीय विद्यालयों में EWS वर्ग के छात्रों को प्रवेश में अवसर मिलता है, जबकि उस��� मंत्रालय के अधीन संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
यह स्थिति एक ही मंत्रालय के दो संस्थानों में अलग-अलग नियम लागू होने की ओर इशारा करती है, जिसे याचिका में भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है।याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमज��र वर्ग (EWS) को पूरी तरह से बाहर रखना नीति की मूल भावना के विपरीत है।याचिका में हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले Atharv Chaturvedi v. State of Madhya Pradesh & Others (10 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है, जिसमें न्यायालय ने EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा मानते हुए राहत प्रदान की थी।सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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