भगवान राम का पूरा जीवन लोक कल्याण से ओत - प्रोत था । मंदिर की भावी व्यवस्था उनके नाम पर आने वाले चढ़ावे के एक अंश मंदिर के लिए रखते हुए शेष तीन चौथाई हिस्से से यदि रोजगार देने वाले इको फ्रेंडली उद्योग स्थापित करने में लगा दे तो कितना अच्छा कार्य हो ! @JagranNews@BBCHindi
" जो निरंतर भगवान का गुण गायन करते हैं धन्य हैं ,वे कथा वाचक दुनिया में घूम - घूम सनातन धर्म की महिमा से विश्व को अवगत कराएं । वे राम कृष्ण बचनामृत और विवेकानंद वांग्मय अवश्य पढ़ें । इस युग में जाति या पीछे की सभ्यता उत्तम बताओगे तो विश्व बकवास मानेगा " -- भगवन, 1992 @PTI_News
" भारत में इकोफ्रेंडली उद्योग गांवों से शहरों तक हों।
मिश्रित अर्थव्यवस्था में थोड़ा हेर फेर तो चलेगा पर उसे उलट देने से घोर बेरोजगारी होगी । शासक राष्ट्र प्रेम ,रोजगार ,उद्यम , रक्षा तकनीक में सर्वोत्तम से नीचे समझौता न करें , शिखर से नीचे तक के कर्णधार । " --- भगवन @PTI_News
" मैं सेवक सचराचर सीय सहित भगवंत "
भारत को यह भाव कार्यान्वित करना होगा । पराक्रम ,सेवा , शील , अन्याय से पीड़ित का उद्धार वह किसी भी देश का क्यों न हो ,लेकिन सभी को स्वतंत्र रखना ।किसी की संपत्ति ,श्रम ,मान का हरण तो असुर करते हैं ।" -- भगवन, 1997 , मुजेहना ,सीतापुर @PTI_News
" शक्ति अर्जित करके जो सारी दुनिया को कदमों तले रखना चाहता है वह राक्षसी वृत्ति का है। भारत के आदर्श भगवान राम हैं , शक्ति अर्जित करके पराधीनों को स्वतंत्र करो । भू मंडल पर सत्य ,शिव ,सौंदर्य की स्थापना करो । " ---- भगवन ( नेता जी ? ) -- वाणी " से ( 1994) @PTI_News@BBCHindi
" Maryada Purushottam Bhagwan Ram and Aadishakti Sita are role models of not only Jambu dweep ; Bharatvarsh but human civilization on the earth." Thus spoke Bhagwan ( Netaji? 1990, Mujehna, Sitapur, 40th place of his tapasya.) https://t.co/INYKhSljON @PTI_News@BBCWorld
" Bharat should increase his defence power on war footing including thrust on agriculture, eco- friendly industrialization , education and employment . " Thus spoke Bhagwan ( Netaji? , 1999 ,Mujehna, Sitapur, 40th place of his tapasya.) @PTI_News@BBCWorld@narendramodi@RSSorg
नेता जी के चित्रों से भगवन ( कैलाश ,अयोध्या ,वस्ती ..नैमिष ,फैजाबाद ..मुजेहना , जि. सीतापुर ,) के चित्रों का मिलान किया जा सकता है । बहुभाषाविद थे, योग की पराकाष्ठा पर थे । कहते थे --" जब तक मैं शरीर में हूं कोई मुझे नेता जी न कहे ।https://t.co/INYKhSljON @@BBCHindi@aajtak
" लोग कहते हैं नेता जी हिटलर और 1945 के बाद रूस में स्टालिन जैसे क्रूर तानाशाहों से मिलने क्यों गए ? भगवन बोले - महापुरुष जब कार्य करते हैं तो जो दिखाई पड़ता है उतना ही नहीं होता है । नेता जी दोनों को आयुहीन कर दिए । चर अचर का स्वामी कहीं दीन बनकर नहीं रहता @ABPNews@BBCHindi
नेता जी के चित्रों से भगवन ( कैलाश ,अयोध्या ,वस्ती ..नैमिष ,फैजाबाद ..मुजेहना , जि. सीतापुर ,) के चित्रों का मिलान किया जा सकता है । बहुभाषाविद थे, योग की पराकाष्ठा पर थे । कहते थे --" जब तक मैं शरीर में हूं कोई मुझे नेता जी न कहे ।https://t.co/INYKhSljON @@BBCHindi@aajtak
" जब कोई अतीत की गलतियों से नहीं सीखता है तो प्रकृति उसे दंड देती है । ईसाई - मुस्लिमों ने क्रूसेड्स से नहीं सीखा । यूरोप - अमेरिका और अन्य देशों ने विश्व युद्द से नहीं सीखा । भारत एक हजार वर्ष की गुलामी से क्या सीखा ? " भगवन ( नेता जी ? )ने कहा । ( 1993 ) @aajtak@BBCHindi
जब नेता जी हिटलर से मिलने गए तो पहले कई हिटलर मिलने आए , नेता जी हाथ नहीं मिलाए । फिर वास्तविक हिटलर आया तब वह हाथ मिलाए ।
वैसे नेता जी की कथित मृत्यु 1945 के बाद भारत लौटने के बाद संन्यासी नेता जी कई नेता जी रच दिए, लेकिन सकारात्मक और आध्यात्मिक अर्थ में ?
@aajtak@BBCHindi
" आप जहां - जहां कुटी बनाते हैं ( तपेश्वरी )दुर्गा जी की स्थापना क्यों करते हैं ?"
" एक बार मैं हाबडा ब्रिज से गंगा में गिर गया था , उसमें तपेश्वरी प्रकट होकर मुझे कैलाश ले गईं तब से .. " भगवन ( नेता जी ? मुजेहना, 1992 ,सीतापुर) । https://t.co/INYKhSkLZf
" नेता जी चर - अचर सृष्टि के सेवक और स्वामी थे। छिपकर क्यों रहते ? उनके मरने की खबर बहुत बार फैली । मुजेहना 40 वीं तपोस्थली में मैं निर्वाण लूंगा । कैलाश , अयोध्या , बस्ती , नैमिष ,फैजाबाद आदि 39 स्थलों पर मैने तप किया "
भगवन ( नेता जी ? ) ने कहा था। @aajtak@BBCWorld
Human talent is the blessings of Infinite God. Indian scientists should concentrate on Nuclear Deterrent Weapons discovery.
Bhagwan used to say : World leaders should strive for Prosperity, Shashvat Sheel ( ethical values everlasting) and Peace . @IndianExpress@BBCWorld
Though luggage from Ram Bhawan, Ayodhya leads us to the facts concerned to post life of Netaji ,but those who are well known to history of Netaji , should have broader spectrum; to access the reality accross the smog of hyper reality: Bhagwan at Mujehna, Sitapur was Netaji ??
" Head of the Countries, worldwide should endeavour prosperity and peace, not war, that would lead to third world war. Don't reduce the world to ashes." ( 1990)Thus spoke Bhagwan, who was Netaji ?? 1897 --- 2003. https://t.co/INYKhSljON @DainikBhaskar@BBCWorld@RSSorg
जिस मंदिर के खजाने से उस जिले का विकास हो सकता है ,शहर - गांवों का ; क्या कभी ऐसा हुआ है ? काश ! ऐसा होता तो जो ईश्वर सर्वव्याप्त है ,सभी का निर्धनता और दुख से उद्धार करने वाला है , उसकी इच्छा पूरी हो पाती। @narendramodi@RSSorg@DainikBhaskar@BBCHindi
वृद्धाश्रम बनना क्या हितकारी है या अहितकारी?
इससे गैरजिम्मेदार लोगों की कर्तव्यहीनता नहीं बढ़ जाती है ? क्या ऐसा कानून नहीं बनना चाहिए कि जो अपने मां - पिता को , विदेश में बसने के लिए या कर्तव्य से भागने के लिए वृद्धाश्रम में छोड़ें सरकार उन्हें सजा दे ? @the_hindu@BBCHindi
Bharat, Japan and War -allie countries'
intelligence agencies are unknown with post war life of Netaji is unbelievable ?
Many siddh saints and intellectuals believe that Netaji lived as an enlightened sannyasi till 2003.@RSSorg@BBCWorld@narendramodi
https://t.co/INYKhSkLZf