एक भाई ने हरयाणवी शब्द “टिङ्गर (टिंगर)�� का मूल पूछा है।
रोचक उत्तर:
किसी और के बालक को परोक्ष रूप से कुत्सा के भाव में टिंगर कहा जाता है।
स्वयं के बालक को झिड़की, झुँझलाहट, फटकार, चेतावनी आदि देते समय उसे टिंगर कहकर पुकारते हैं। टिंगर का स्��्री॰ टींगरी है।
बालकों के नटखट स्वभाव को उपलक्ष्य करके हल्के-फुल्के भाव से उन्हें बहुवचन में टिंगर/टींगरे/टींगराँ आदि कहते हैं।
पर एकवचन में किसी विशेष बालक को लक्ष्य करके प्रयुक्त टिंगर/ टींगरी शब्द पूर्वोक्त निकृष्ट भाव ही लाता है।
राजस्थानी बागड़ी में बहुवचनात्मक टिंगर शब्द बालकों के लिए और भी सामान्य रूप से, बिना किसी कुत्सा के बरता जाता है।
“टींगराँ पढैँ ऐँ”, “टिंगर खेल्लैँ ऐँ”, ���दि।
और डाँट-फटकार के लिए भी बरता जाता है,
“टिंगरड़ाँ, टिक ज्याओ रै”, “टींगरो! अट्ठै आओ!”...
हिंदी में यह शब्द टटींगर है।
“अपना पूत पराया टटींगर” लोकोक्ति है।
शब्दमूल पर विचार: 😇
शब्दकोशों में एकाध स्थान पर केवल टटींगर शब्द ही मिला, टिंगर नहीं मिला। वहाँ इसकी देशज व्युत्पत्ति दी है।
पर मेरा ��िचार है कि यह संस्कृत के “डिम्भक” (अर्थात् छोटा बालक, शावक आदि) से व्युत्पन्न है। डिम्भक > टिम्ह्ग+र (प्रत्यय; हरियाणवी बोली का र/ड़/रा/ड़ा प्रत्यय संस्कृत के ‘कन्’ (+क) प्रत्यय के समान लघुरूपता, कुत्सा आदि के अर्थ देता है। जैसे, बाच्छा→बाछड़ा/बछेरा; गोह्→गोहेरा/घबेरा)। टिम्ह्ग+र से टिंगर हुआ होगा।
(विशेष बात यह है कि डिंभक शब्द में पहले से उपस्थित कन् प्रत्यय शब्द में समाविष्ट होकर रह गया और उस���े स्थान पर उसका समकक्ष नया प्रत्यय लग गया।)
टिंगर के कुछ वैकल्पिक हरियाणवी प्रयोग:
टीँय्र, टींगरो, लींगरो/लींगरा, जींगड़ो/जींगड़ा/जींगड़/जिंगड़तो, आदि।
(इनके स्त्री॰ रूप में अंत में ी लगेगी, बस)
ये सभी शब्द टिंगर के ही बहुविध रूप हैं। लींगरा शब्द का मूल और हो सकता है। शायद।
और हाँ, इनमें से अने�� शब्द पशुओं के शावकों के लिए भी बरते जाते हैं।
पर टिंगर शब्द की परंपरा यहीं कहाँ रुकी? 😯
हरियाणवी में टाबर-टिक्कर युग्म का टिक्कर भी वही है!
गुजराती में डीकरो/डीह्करो शब्द भी वही है।
मालवी में डीकरा है।
तो, आपके क्षेत्र में इस महनीय शब्द के कौन-से अर्थ और रूप मिल जाएँगे? बताइएगा।
🙏🏼
✒️ तिलक राज धिङ्गताणिया (@tattvamasi01)
@HimanshuJa37052 @ramaphala1 @drsureshpant @DAkkhar @Jigyasu_chhoro @raghuvir_sainik @YADAVPILLED @Naan_sukulji @avtansa @Apno_Aheerwal @AwadhiBhasha @dxrsam_0 @avzaagzonunaada @areyshruti
#Haryanvi is unique in itself for the independent use of its future tense suffixes. See SS 👇
In Vedic Sanskrit, this phenomenon is observed with prefixes. It's possible that the independent use of future-tense suffixes in folk languages evolved as a relict of these Vedic traits.
#Haryanvi#हरियाणवी
बिणाणणा, उळळणा, बुळाळ, खळळ, पळळ
ळाळी, ळाळ, ळुळणा
कूळ्ळा, कळ्डा, सळ्डक, टोळ्डा
ळ्ह :- ळ्ह - कोळ्हा, सेळ्ह, साळ्हैं, माळ्ह, डाळ्ही, काळ्ह, खुळ्ही, पाळ्हैट
The color should have been darker in Haryana and Rajasthan, Which is not shown. 1/3
@indiainpixels
सकरांत की आमणमीती राम राम। 🙏🚩
सुसरा जी थम सूत्या हो तो जाग्गो, जगावै थारी कुळबहू जी म्हारा राज।🤩🤩👇
द्रोपदी ने अपने पतियों की रक्षा हेतु भीष्म पितामह को मनाकर-��गाकर सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त किया।
तभी से हरियाणे में अपने बड़ों को सकरांत पर "जगाया-मनाया" जाता है। +
देवऊठणी ग्यारस की मौकळी राम राम। 🙏🏻🪔🪔🪷🌼🚩🚩
ऊठो देव बैठो देव, ऊठा सां ऊठावां सां,
गया था हम साढ कै माह, आया सां कात्तक माह।
हे दे ! सुत्तीड़ा साढ मास, हे दे उट्ठीड़ा कात्यक मास,
उठूं सूं रे उठावां सां, छींक्कै हाथ घलावां सां.
देवऊठणी ग्यारस की मौकळी राम राम। 🙏💐
ऊठो देव बैठो देव, ऊठा सां ऊठावां सां,
गया था हम साढ कै माह, आया सां कात्तक माह।
हे देव सुत्तीड़ा साढ मास, हे देव ऊठीड़ा कात्तक मास,
ऊठां सां ऊठावां सां, छींकै हाथ घलावां सां,
छींकै धरी च्यार कचौरी आप खांकीं बाम्हण नैं दीन्ही।
#Haryanvi
🔗
कुछ लोग सज्जा से सँझा व्युत्पन्न बताते हैं, क्योंकि माई की सज्जा की जाती है। कुछ सबकी साँझी (< सार्द्ध) माई/बहन आदि होने के कारण साँझी नामकरण हुआ बताते हैं। पर साञ्ज्झी अथवा सिञ्झ्या नाम, जैसा कि ऊपर बताया, सन्ध्या से ही व्युत्पन्न है।
वैदिक सूक्तों में भोर की देवी उषा की स्तुति तो है, पर संध्या देवी को समर्पित कोई सूक्त नहीं है। हाँ, वैदिक मंत्रों से दिन की तीन संधियों (प्रातः, दोपहर व साँझ) में सन्ध्योपासना अवश्य की जाती है।
ब्रज में मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने संध्या समय राधा का गोबर से पुतला बनाकर उनकी आराधना की थी और तभी से साँझी पूजन हो रहा है।
हिंदी साहित्य में भी साँझी पर काव्य मिलता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र लिखते हैं: “सखि क्वार (आश्विन) मास लग्यौ सुहावन सबै साँझी खेलहीं।
निसि चन्द पूरन चाँदनी में नाह गह भुज मेलहीं॥ ”...
और,
“��्वार मास सब साँझी खेलैं सरद बिमल पानी।
मैं ब्याकुल बिनु प्रान-पिया के कहत न मुख बानी॥”...
पुनः,
“आज दोऊ खेलत साँझी साँझ।
नंदकिशोर राधा गोरी जोरी सखियन माँझ॥”
भारतेंदु जी साँझी की परंपरा में साँझ के समय क्रीड़ा-विलास का प्रचलन भी दर्शा रहे हैं।
भारतेंदु से पूर्व भी ब्रजभाषा में श्रीकृष्णलीला के मूर्धन्य कवियों घनानंद जी, सूरदास जी आदि और अन्य कवियों के द्वारा एवं लोककाव्य में भी साँझी के विविध प्रसंगों का सरस वर्णन होता आया है।
साँझी किसी परंपरा में भाद्रपद पूर्णिमा को, किसी में आश्विन शुक्ल पक्ष में और किसी में पूरे कार्तिक मास में मनती आई है।
सिञ्झ्या माई की जय!
(साञ्ज्झी का हरयाणवी शीठणा गीत ‘स्वस्तिक एंटरटेनमेंट्स’ द्वारा;
चंपा के फूलों का चित्र @tattvamasi01 (तिलक राज) द्वारा)
🔗 संपूर्ण।
She's saying, Haryanvi, Himachali can be understood by without any interpretation, translation. I responded by writing in Haryani. But the irony is that answer didn't come. Now how will you spread your fake propaganda. If you have courage, then answer. stop spreading this fake.
डिग्री नहीं दिखाएँगे (फ़िर वो #तड़ीपार ने क्या सार्वजनिक किया था ❓)
पीएम केयर्स फंड का हिसाब नहीं बतायेंगे ( #PMCARES के भी सारे पैसे खा गए)
गौतम अडानी को एसबीआई ने कितने करोड़ कर्ज दिया उसका खुलासा नहीं करेंगे (लेकिन आम लोग डिफॉल्टर हैं , उनकी जानकारी अखबार में भी छपवा देंगें)
राफेल विमान ख़रीदी से जुड़ी फ़ाइल नहीं दिखायेंगे (बल्कि राजदारों को ही निपटा देंगें)
मुकेश अंबानी Z प्लस सुरक्षा के लिए भुगतान कर भी रहा है की नहीं?
इसकी जानकारी नहीं देंगे
अनंत अंबानी को वनतारा चिड़ियाघर के लिए देशभर के सरकारी चिड़ियाघरों से कितने वन्य प्राणी दे दिए गए,
नहीं बतायेंगे।
(लेकिन देश के ल���गों की सारी जानकारी चाहिए)
सबको सबकुछ आधार से जोड़ना होगा
दय थिली लाम ❗️
References:
1)Linguistic Survey of India
2)Fieldwork
3)Imperial Gazetteer of India
4)An Early Attestation of The Toponym Of Delhi, R.J. Cohen
हरियाणए देसे असंख गामे, गामियण जणिय अणवरय कामे। पर चक्क विहट्टणु सिरि संघट्टणु जो सुरवइणा परिगणिउँ॥ रिउ रुहिरावट्टणु पविउलु पट्टणू
यह उनके मुंह पर थप्पड़ है जो कहते हैं सरकार म्हारी है
सरकार सभी हरियाणावासियों की होती है
36 बिरादरी की होती है
किसी विशेष क्षेत्र या विशेष जाति की नहीं होती