@RCJOSHI77260355@_vatsalasingh जब बात भारतीय मूल्यों और संस्कृति की आती है तब तुम्हारा इस तरह बरगलाना तुम्हारे सरनेम जोशी पर प्रश्न खड़ा करता है एकबार डीएनए चेक करवाना कही पड़ोसी अब्बू से मैच हो जाये।
@rakeshbiltoria@_vatsalasingh गटर में पैदा हुए लोगो की सोच गटर के किड्नुमा ही रहेगी। वैसे तुम्हारी गलती नही है गलती है उस रात तुम्हारे अब्बू की अगर वो उस रात सो गए होते तो आज तुम होते ही नही पर उनकी अय्याशी से गटर का कीड़ा पैदा हो ही गया।
@Nileshx76@aajtak कुछ लोग पैदा ही रोने के लिए होते है बिन मांगे सलाह को वकालत नही हमारे यहां डेढ हुशियारी कहते है। क्यो लपक के ले रहे हो अभी तक ज्यादा पढ़े लिखो ने तो नॉकरी ही कि है वो भी उनके सामने जिन्होंने कम पढ़कर काबिलियत से व्यापार खड़ा किया है
@AlokKumarUpad11@thecaravanhindi सारा भारतवर्ष अपना ही था कुछ जयचंदो से पृथ्वीराज के विचार नही बदलते और कुछ धनानन्दों से चाणक्य की प्रतिज्ञा नही टूटती। समय लग सकता है पर गद्दारों में अपनापन देखना पृथ्वीराज जो भारी पड़ा वही आज भी हो रहा है । जय माँ भारती
@AlokKumarUpad11@thecaravanhindi तुम्हारी पैदाइस शायद भाजपा की पैदाइस से बाद हुई है इसीलिए ऐसा लिखा । पूछना अपने पुरखों से की आपके पीछे खान क्यो नही लगा उत्तर एक ही होगा आरएसएस की वजह से। जय माँ भारती
@upsinghumaria@Real_Pushpa ये कोई कहानी नही सच है वैसा ही सच है बाबा साहेब पर गायकवाड़ जी ने विदेश पढ़ने भेजा और उनके गुरु ने अम्बेडकर सरनेम दिया। और आज के बीम सरिया वाले बिना जाने ही जातिवाद वैमनस्य करने जाते है । आरक्षणजीवी
Raised a service ticket with Kent on 19th May,without any technician visit or actual resolution, the ticket simply closed as resolved. Worst customer support and experience. Extremely unprofessional and disappointing. Need immediate attention and proper resolution.@KentROSystems
@KentROSystems ये कंप्लेन है kent R.O. ग्राहक की अभी वररेंटी में भी है परंतु न तो कंपनी सर्विस इंचार्ज ध्यान दे रहा है न ही इंजीनियर जो इंजीनियर आया था इसके पूर्व वो हथोड़े से मेमरण ठीक कर रहा था और ग्राहक द्वारा विरोध करने पर उन्हें ही समझाने लगा कि इससे भी चल जाती है conti....
@Im_Pandit1100#मैं_भी_पंकज_धवरैय्या आज नही तो कभी नहीं। हम बराबरी की बात करते है वो पिछड़े बना रहना चाहते है क्योंकि भारत का बहुविधान हमे संविधानिक अछूत बनाया हुआ है
दा ग्रेट 6मार का बोर्ड लगाने से किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन जब से ठाकुर आस्था सिंह से खुद को ठाकुर कहा सब अंबेडकरवादियों की गांव जल रही है।
जलने दो, ठाकुरों तुम अपना जलवा बरकार रखना
ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिले सबन को अन्न।।
छौट बड़े सब सम बसें रविदास रहें प्रसन्न ।।
समुह जगत को संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी महाराज के 649वें पावन प्रकाश पर्व पर लख लख बधाइयां एवं अनंत शुभकामनाएं ।।
🙏!! जय गुरुदेव जी !! 🙏
🙏!! धन गुरुदेव जी !!🙏
#राष्ट्रवादी_वाल्मीकि_महासंघ
माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर ने
एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के
पक्ष में फैसला सुनाया !
जश्न की तैयारी करो, चित्रकूट में आज दीपावली मनेगी
सत्य सनातन धर्म की जय हो 🙏
जय मनुस्मृति जय संविधान 🙏
सेवा में,
श्रीमान अमित शाह जी,
गृहमंत्री भारत सरकार,
नई दिल्ली( 110001)
विषय:
मनुस्मृति जैसे प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथ को सार्वजनिक रूप से जलाकर सामाजिक विद्वेष फैलाने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई न होने तथा जवाबी प्रतिक्रिया देने वालों पर एकतरफा कार्रवाई के संबंध में।
मान्यवर @AmitShah जी,
यह पत्र केवल एक नागरिक की शिकायत नहीं बल्कि भारत के संविधान, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर उठता एक गंभीर प्रश्न है।
दिनांक 25 दिसंबर को कुछ संगठित तत्वों द्वारा हिन्दू धर्मग्रंथ ‘मनुस्मृति’ को जानबूझकर सार्वजनिक रूप से जलाया गया, उसका वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर समाज को उकसाने का कुत्सित प्रयास किया गया।
यह कृत्य न तो आकस्मिक था और न ही भावनात्मक
यह पूर्वनियोजित सामाजिक विद्वेष फैलाने की साजिश थी।
यह कृत्य स्पष्ट रूप से निम्न धाराओं के अंतर्गत अपराध है:-
1.IPC धारा 295A – धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।
2.IPC धारा 153A – विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता फैलाना।
3.IPC धारा 505(2) – सार्वजनिक शांति भंग करने वाला उकसावा।
https://t.co/8qUk2b10RG Act धारा 66F / 67 – डिजिटल माध्यम से उग्र और भड़काऊ सामग्री का प्रसार।
इसके बावजूद, आज तक मनुस्मृति जलाने वालों पर कोई ठोस, सार्वजनिक और कठोर कार्रवाई नहीं की गई।
इसके विपरीत जब उकसावे से आहत होकर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया दी तो पूरा प्रशासनिक तंत्र तुरंत सक्रिय हो गया।
मेरा सीधा प्रश्न है:-
- क्या भारत में कानून उकसाने वाले अपराध पर नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया देने वाले पर लागू होता है?
- क्या सामाजिक आग लगाने वाला “कार्यकर्ता” कहलाता है और आहत नागरिक “अपराधी”?
- क्या यह कानून का शासन (Rule of Law) है या चयनात्मक न्याय (Selective Justice)?
मान्यवर,
यदि इस प्रकार से एक धर्मग्रंथ को जलाने जैसे कृत्य पर चुप्पी साधी जाती रही,तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि
“धार्मिक उकसावे को संरक्षण प्राप्त है।”
जो कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए अत्यंत घातक है।
अतः आपसे मांग है कि-
1.मनुस्मृति जलाने व उसका प्रचार करने वालों पर IPC 295A, 153A, 505(2) के तहत तत्काल FIR व गिरफ्तारी हो।
2.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसे वीडियो/पोस्ट हटवाकर डिजिटल ट्रेल की जांच की जाए।
3.भविष्य में धार्मिक ग्रंथ जलाने जैसी घटनाओं को राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध अपराध मानते हुए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
4.केवल प्रतिक्रिया देने वालों पर नहीं, बल्कि उकसावे की जड़ पर कार्रवाई हो।
5. मनुस्मृति जलाकर समाज में आपसी मतभेद बढ़ाने वालो पर NSA के तहत कार्यवाही की जाए।
यह पत्र चेतावनी नहीं बल्कि संविधान और कानून की निष्पक्षता की अंतिम मांग है।
यदि अब भी उकसावे करने वालों को संरक्षण मिला,
तो यह देश में सामाजिक टकराव को वैध करने जैसा होगा,जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी।
भवदीय,
एक जागरूक भारतीय नागरिक,
आशीष व्यास 🖊️
@HMOIndia@AmitShahOffice