देश से मुझे धन, सत्ता, सम्पत्ति व सम्मान व जीवन मिला है। इस देश की माँ, बहन, बेटियों, बच्चों व इंसानों की आँखों के आँसू मेरी पीड़ा है व देश की खुशहाली मेरी प्रसन्नता है।
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दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।
अर्थ: इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है। यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता।
@Dklewade