इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
शरीर की सभी नसों को खोलने का आयुर्वेदिक समाधान....
कपूर और नींबु कितने उपयोगी है...दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं,
◾पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।
◾इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.
◾यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें
◾फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस कर उसका पाउडर बना लें, यह भी उस पानी में मिला लें, फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।
◾जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे, तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसें मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।
◾यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से रीएक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं, ऐसा अनुभव होता है।
◾इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डाल कर रखने है और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते हैं।
◾इससे हाथ, पैर में होने वाली झनझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं और कोई नस दबी या अकड़ गई हो, तो वह खुल जाएगी और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।
◾जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी, पानी में पैर रखने के साथ ही बन्द हो जायेगी। अगर स्नायु अकड़ गये हों या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।
◾इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है और यह उपाय सरल रूप से किया जा सकता है।
◾यह उपाय पांच दिन करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है....आपको इससे नुकसान कुछ नहीं होगा फायदा ही होगा....🙏
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गांजा का चमत्कार...
1914 का वर्ष है प्रथम विश्व युद्ध के वर्ष और अमेरिकी डॉलर के लिए "भांग" की खेती करने वाले किसान इसे ध्यान में रखें और पढ़ते रहें। औद्योगिक भांग सिर्फ एक कृषि संयंत्र नहीं है यह तेल और डॉलर के खिलाफ मारk है गांजा कैसे प्रतिबंधित किया गया था?
1. भांग का एक टुकड़ा खेत 25 एकड़ जंगल के बराबर ऑक्सीजन पैदा करता है।
2. फिर से, एक एकड़ गांजा 4 एकड़ पेड़ों के बराबर कागज़ का उत्पादन कर सकता है।
3. जहां भांग को 8 बार कागज में बदला जा सकता है, वहीं लकड़ी को 3 बार कागज में बदला जा सकता है।
4. गांजा 4 महीने में उगता है, पेड़ 20-50 साल में।
5. कैनबिस विकिरण का एक वास्तविक पकड़ने वाला है।
6. भांग को दुनिया में कहीं भी उगाया जा सकता है और इसके लिए बहुत कम पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा, चूंकि इसे कीड़ों से बचाया जा सकता है, इसलिए इसे कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती है।
7. यदि भांग का कपड़ा व्यापक हो जाता है, तो कीटनाशक उद्योग पूरी तरह से गायब हो सकता है।
8. पहली जींस भांग से बनी थी; यहां तक कि "कानवास" शब्द भी भांग उत्पादों को दिया गया नाम है।
गांजा रस्सियों, डोरियों, बैगों, जूतों, टोपियों के निर्माण के लिए भी एक आदर्श पौधा है।
9. भांग, एड्स और कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी और विकिरण के प्रभाव को कम करना; यह गठिया, हृदय, मिर्गी, दमा, पेट, अनिद्रा, मनोविज्ञान और रीढ़ की बीमारियों जैसे कम से कम 250 रोगों में प्रयोग किया जाता है।
10. भांग के बीज का प्रोटीन मूल्य बहुत अधिक होता है और इसमें दो फैटी एसिड प्रकृति में और कहीं नहीं पाए जाते हैं।
11. सोयाबीन की तुलना में गांजा का उत्पादन और भी सस्ता है।
12. जिन जानवरों को भांग खिलाया जाता है उन्हें हार्मोनल सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती है।
13. सभी प्लास्टिक उत्पादों को भांग से बनाया जा सकता है, और भांग प्लास्टिक प्रकृति में वापस आना बहुत आसान है।
14. अगर कार की बॉडी गांजा की बनी हो तो यह स्टील से 10 गुना ज्यादा मजबूत होगी।
15. इसका उपयोग इमारतों के इन्सुलेशन के लिए भी किया जा सकता है; यह टिकाऊ, सस्ता और लचीला है।
16. गांजा साबुन और सौंदर्य प्रसाधन पानी को प्रदूषित नहीं करते हैं; इसलिए यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है।
अमेरिका में 18वीं शताब्दी में इसका उत्पादन अनिवार्य था और गैर-उत्पादक किसानों को बंद कर दिया गया था। लेकिन अब स्थिति इसके उलट है. कहां से? -डब्ल्यू। आर. हर्स्ट 1900 के दशक में अमेरिका में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और मीडिया के मालिक थे। उनके पास जंगल थे और कागज़ का उत्पादन करते थे। अगर कागज भांग से बना होता, तो उसे लाखों का नुकसान हो सकता था। रॉकफेलर विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे। एक तेल कंपनी थी। बेशक, जैव ईंधन, भांग का तेल, उसका सबसे बड़ा दुश्मन था। मेलन ड्यूपॉन्ट में एक प्रमुख शेयरधारक था और उसके पास पेट्रोलियम उत्पादों से प्लास्टिक के उत्पादन के लिए एक पेटेंट था। और भांग उद्योग अपने बाजार को खतरे में डाल रहा था। बाद में मेलॉन अमेरिकी राष्ट्रपति हूवर के कोषागार के सचिव बने। हमने जिन बड़े नामों के बारे में बात की, उन्होंने उनकी बैठकों में तय किया कि भांग दुश्मN है। और उन्होंने उसका सफाया कर दिया। मीडिया के माध्यम से, उन्होंने मारिजुआना शब्द के साथ-साथ लोगों के दिमाग में एक Zहरीली दवा के रूप में मारिजुआना का इंजेक्शन लगाया है। भांग की दवाओं को बाजार से वापस ले लिया गया है और उनकी जगह आज इस्तेमाल होने वाली रासायनिक दवाओं ने ले ली है।
कागज उत्पादन के लिए जंगलों को काटा जा रहा है।
कीटनाशक और कैंसर का Nशा बढ़ रहा है। और फिर हमने अपनी दुनिया को प्लास्टिक कचरे, खतरनाक कचरे से भर दिया साभार...
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शरीर की सभी नसों को खोलने का आयुर्वेदिक समाधान....
कपूर और नींबु कितने उपयोगी है...दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं,
◾पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।
◾इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.
◾यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें
◾फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस कर उसका पाउडर बना लें, यह भी उस पानी में मिला लें, फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।
◾जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे, तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसें मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।
◾यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से रीएक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं, ऐसा अनुभव होता है।
◾इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डाल कर रखने है और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते हैं।
◾इससे हाथ, पैर में होने वाली झनझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं और कोई नस दबी या अकड़ गई हो, तो वह खुल जाएगी और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।
◾जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी, पानी में पैर रखने के साथ ही बन्द हो जायेगी। अगर स्नायु अकड़ गये हों या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।
◾इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है और यह उपाय सरल रूप से किया जा सकता है।
◾यह उपाय पांच दिन करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है....आपको इससे नुकसान कुछ नहीं होगा फायदा ही होगा....🙏
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याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें :- जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी..छोटे-छोटे प्रयोग जिनको आप अवश्य अपनाए, कुछ प्रयोग जो आपको घर में ही उपलब्ध है अजमाए और लाभ लें।
◆ खराश-सूखी खाँसी के लिये अदरक और गुड़
गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ। गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। आराम मिलेगा।
◆ मुँह और गले के कष्टों के लिये सौंफ और मिश्री
भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से मुख की अनेक बीमारियाँ और सूखी खाँसी दूर होती है, बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है, गले की खुश्की ठीक होती है और आवाज मधुर हो जाती है।
◆ बदन के दर्द में कपूर और सरसों का तेल
10 ग्राम कपूर, 200 ग्राम सरसों का तेल – दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ढक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें। जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द और, माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं।
◆ जोड़ों के दर्द के लिये बथुए का रस
बथुआ के ताजा पत्तों का रस 15 ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो-दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।
◆ भोजन से पहले अदरक
भोजन करने से दस मिनट पहले अदरक के छोटे से टुकडे को सेंधा नमक में लपेट कर [थोड़ा ज्यादा मात्रा में ] अच्छी तरह से चबा लें। दिन में दो बार इसे अपने भोजन का आवश्यक अंग बना लें, इससे हृदय मजबूत और स्वस्थ बना रहेगा, दिल से सम्बंधित कोई बीमारी नहीं होगी और निराशा व अवसाद से भी मुक्ति मिल जाएगी।
◆ अजवायन का साप्ताहिक प्रयोग
सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच अजवायन मुँह में रखें और पानी से निगल लें। चबाएँ नहीं। यह सर्दी, खाँसी, जुकाम, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेटदर्द, कब्जियत और घुटनों के दर्द से दूर रखेगा। 10 साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच 2 ग्राम और 10 से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी 5 ग्राम लेना चाहिए।
◆ जलन की चिकित्सा चावल से
कच्चे चावल के 8-10 दाने सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। 21 दिन तक नियमित ऐसा करने से पेट और सीने की जलन में आराम आएगा। तीन माह में यह पूरी तरह ठीक हो जाएगी।
◆ दाँतों के कष्ट में तिल का उपयोग
तिल को पानी में 4 घंटे भिगो दें फिर छान कर उसी पानी से मुँह को भरें और 10 मिनट बाद उगल दें। चार पाँच बार इसी तरह कुल्ला करे, मुँह के घाव, दाँत में सड़न के कारण होने वाले संक्रमण और पायरिया से मुक्ति मिलती है।
◆ मुलेठी पेप्टिक अलसर के लिये
मुलेठी के बारे में तो सभी जानते हैं। यह आसानी से बाजार में भी मिल जाती है। पेप्टिक अल्सर में मुलेठी का चूर्ण अमृत की तरह काम करता है। बस सुबह शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल जाएँ। यह मुलेठी का चूर्ण आँखों की शक्ति भी बढ़ाता है। आँखों के लिये इसे सुबह आधे चम्मच से थोड़ा सा अधिक पानी के साथ लेना चाहिये।
◆ सरसों का तेल केवल पाँच दिन
रात में सोते समय दोनों नाक में दो दो बूँद सरसों का तेल पाँच दिनों तक लगातार डालें तो खाँसी-सर्दी और साँस की बीमारियाँ दूर हो जाएँगी। सर्दियों में नाक बंद हो जाने के दुख से मुक्ति मिलेगी और शरीर में हल्कापन मालूम होगा।
◆ दमे के लिये तुलसी और वासा
दमे के रोगियों को तुलसी की १० पत्तियों के साथ वासा (अडूसा या वासक) का २५० मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। लगभग २१ दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से आराम आ जाता है।
◆ मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक
सेंधा नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है। नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है।
◆ पेट में वायु-गैस के लिये मट्ठा और अजवायन
पेट में वायु बनने की अवस्था में भोजन के बाद 125 ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें।
◆ फटे हाथ पैरों के लिये सरसों या जैतून का तेल
नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है। साथ ही नेत्रों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है।
◆ बैठे हुए गले के लिये मुलेठी का चूर्ण
21 best charts of confirmed multi-years breakout stocks based on Sep-23 closing.
📌> 15 Years Long Breakout - 5 Stocks
📌10-15 Years Long Breakout - 2 Stocks
📌5-10 Years Long Breakout - 14 Stocks
Monthly Charts of these stocks..👇
(1) NTPC Ltd (>15 Years Long Multiyear BO)
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