इस शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार चाहे तो बदले की भावना छोड़कर जौहर यूनिवर्सिटी का नक़्शा भी आसानी से एक दिन में पास करा सकती है। भाजपा अपने लोगों के लिए इस शासनादेश को मानती है लेकिन किसी और के लिए इसे इस्तेमाल न करके हर समाज के छात्रों और उनके परिवारवालों के ख़िलाफ़ नाइंसाफ़ी कर रही है। इस जीओ के आधार पर ही भाजपा सरकार ने हज़ारों भवनों को नियमित करके, उन्हें वैध स्वरूप प्रदान किया है।
भाजपा बहाना न बनाए, शिक्षा के मंदिर को बचाए!
विद्वेष हारेगा, सौहार्द जीतेगा!
‘पक्षपात’ अन्याय का सबसे प्रत्यक्ष रूप होता है।
मुझे नहीं पता ऐसी ख़बर बड़ी या ब्रेकिंग क्यों नहीं ... क्योंकि ग़रीब का बच्चा है? बंडा का मामला है? जिसे आप मैप में भी खोज नहीं पाएंगे!
ख़ैर बंडा सरकारी अस्पताल में 19 महीने के बच्चे की आंखों में डॉक्टर ने कफ साफ करने वाला ड्रॉप डाल दिया उसके आंखों की रोशनी चली गई है...
17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने जिस तरह से CBSE बोर्ड परीक्षाओं में On Screen Marking System (OSM) के tender documents और RFP (Request for Proposal) को पढ़कर बिंदुवार सवाल उठाए हैं, वो काबिले-तारीफ है।
सिद्धांत ने पुराने और नए RFP की तुलना की, clauses पढ़े, discrepancies निकालीं और सार्वजनिक रूप से CBSE की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
उसने सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि दस्तावेजों की तुलना करके एक pattern समझाने की कोशिश की।
जिस दिशा में उसने बिंदु उठाए हैं, उससे साफ लगता है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ तो ऐसा हुआ है, जो सही नहीं था।
कम-से-कम CBSE की तरफ से इस बच्चे द्वारा उठाए गए बिंदुओं का जवाब भी उतने ही पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।
सार्थक सिद्धांत की सूझबूझ, presence of mind और गंभीरता की खूब सराहना की जानी चाहिए।
कोटद्वार के दीपक कुमार ने मोहम्मद दीपक बनकर भाईचारे की एक मिसाल क़ायम की. सांप्रदायिक सोच वाले नफरती झुंड की परवाह किए बग़ैर अपने इरादों पर टिके रहे तो हमारी इतनी जिम्मेदारी भी नहीं बनती है कि हम सब मिलकर दीपक की मदद करें ताकि उन्हें जिम बंद न करना पड़े ? सिर्फ तारीफ़ कर देने भर से हम सबकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है क्या ? आप सब लोगों ने उस दौरान दीपक का हौसला बढ़ाया और फिर सब भूल गए. मैं भी भूल गया. आज अगर ये सब जानने के बाद भी आप सब लोग इनकी मदद नहीं करेंगे तो कल को कौन खुद को जोखिम में डालकर किसी की मदद के लिए सामने आएगा ? मैंने दीपक कुमार से बात करके उनका अकाउंट नंबर मंगवाया है. अपनी तरफ़ से मैं दस हज़ार के योगदान से शुरुआत कर रहा हूं. आप सबसे अपील करता हूं कि एक सप्ताह के भीतर इनकी इतनी मदद तो हो जाए कि एक साल का किराया एडवांस दे सकें. उम्मीद है हमारे दर्शक निराश नहीं करेंगे. नीचे दिए गए QR कोड पर पेमेंट कर आप 'मोहम्मद' दीपक की मदद कर सकते हैं...
मूकबधिर बच्चों को स्कूल में यातनाएँ दी जा रही है। स्कूल कर्मचारी बच्चों को बुरी तरह मारता-पीटता दिख रहा है। ये बच्चे बोलने और सुनने में असमर्थ हैं। मामला बिहार के मुजफ्फरपुर का है।
AAP सांसद संजय सिंह ने मक्का में हिंदुस्तानी हाजियों के साथ ख़राब इंतिज़ाम को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, मक्का में हिंदुस्तानी हाजियों के साथ इंतिहाई बदइंतज़ामी! आसफ़ अल क़ुरैशी हॉस्टल की हालत शर्मनाक, लगभग ₹4 लाख लेने के बावजूद फैमिली अलग, एक रूम में 16 लोग, लिफ़्ट ख़राब, 16 लोगों पर एक गंदा वॉशरूम। रूम के अंदर वॉशरूम का गंदा पानी खड़ा है। यह नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है। Haj Committee of India फौरन कार्रवाई करे।
@SanjayAzadSln
Two minor Muslim brothers in Shamli, Uttar Pradesh, were allegedly beaten, thrown into a canal, and stripped naked by men with a political grudge against their family , with police dismissing the incident as a mere debt dispute despite a viral video exposing the horror.
Watch:
यह घटना यूपी के शामली के लिलौन गांव की है। लिलौन निवासी मोमीन के परिवार से इसी गांव का निवासी शिवम नामी एक शख्स रंजिश रखता है। रंजिश महज़ चुनावी है। लेकिन इस चुनावी रंजिश में शिवम ने ऐसी क्रूरता दिखाई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। बीते महीने मार्च की 10 तारीख को मोमीन के दो बच्चे घर से यह कहकर निकले कि वो खेलने जा रहे हैं। इन बच्चों को शिवम और उसके साथी नितिन और गोलू दोनों बच्चो को बहला फुसलाकर बडी नहर पर ले गए।
आरोप है कि इन तीनों ने दोनों बच्चों को पहले बेरहमी से पीटा और फिर नहर में फेंक दिया, चूंकि एक बच्चा तैरना जानता था तो वह अपने छोटे भाई को भी किसी तरह नहर से निकाल लाया। इसके बाद शिवम और उसके साथियों तीनों ने दोनों बच्चों को अपने घर में बन्धक बना लिया, और उन्हें निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीट। बच्चों के साथ हो रहे अमानवीय एवं क्रूरता की सूचना पाकर मोमीन मौके पर पहुंचे, तो शिवम और उसके साथियों द्वारा उनके साथ भी गाली गलौज की गई। जिसके बाद मोमीन द्वारा @112UttarPradesh पर कॉल कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। आरोप है कि पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रावाई नहीं हुई है।
अब यहां से कई सवाल हैं। क्या @dgpup की @Uppolice बच्चों के साथ अमानवीय एवं क्रूर रवैया अपनाने वाले शिवम और उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त ऐसी कार्रावाई करेगी जो नज़ीर बने? इस घटना को एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन आरोपितों पर कोई कार्रावाई तक नहीं हुई है, ऐसा क्यों? @myogiadityanath की @UPGovt में बच्चों के साथ क्रूरता करने वालो के साथ पुलिस इतना ढुल मुल रवैया क्यों अपनाए हुए है। इस मामले का @NCPCR_ को संज्ञान लेना चाहिए, दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो नज़ीर बन जाए।
होम लोन का गणित थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. होम लोन में शुरुआत में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूलधन बहुत धीरे-धीरे घटता है. ऐसे में लोन जल्दी खत्म करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?
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आइए सब मिलकर इस बच्चे को ट्राई साइकिल दिलवाने का प्रयास करते हैं,
अगर @DmBanka ने दो दिन के अंदर इस बच्चे को ट्राई साइकिल नहीं दी ,तो खुरपेंच टीम की तरफ से इसको मदद पहुंचाई जाएगी
उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती में गन्ने का जूस बेच रहे 14 वर्षीय विकास को दरोगा ने थप्पड़ मारा और कहा कि यहां पर ठेला नहीं लगने देंगे। SP ने दरोगा शैलेंद्र सिंह को लाइन हाजिर किया।
एक ज़िंदगी फ़िर से एक बार मौक़ा मांग रही हैं।
आप जिन्हें तस्वीर में देख और मेडिकल रिपोर्ट में पढ़ रहे हैं इनका नाम तारिक हैं जो कि मेरे जानकार के बड़े भाई हैं, तारिक इस वक़्त नोएडा के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती हैं क्योंकि इनकी किडनी फेल हो चुकी हैं, अब ऐसे में मां ने फैसला लिया हैं कि वो अपने बेटे को अपनी किडनी देकर जान बचाएं, मेदांता हॉस्पिटल ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 9 लाख रुपए का खर्च बनाया है, यानी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लगभग 10 लाख रूपये की आवश्यकता है, परिवार कई वर्ष से तारिक के लिए संघर्ष कर रहा है जिसके कारण अब उनके पास इतना पैसा नहीं कि वह इस किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च उठा पाएं, किडनी मां दे रही हैं लेकिन अस्पताल का खर्च उठाने की जिम्मेवारी अब समाज पर आ चुकी हैं ताकि ताकि तारिक को आपकी मदद से हमारे बीच रहने का मौका मिल सकें।
मैं कुछ सांसदों से भी संपर्क कर रहा हूं ताकि उनकी मदद से ये मदद आसान हो जाएं और एक बूढ़ी मां के बीच उसका बेटा सलामत रहे, लेकिन आपकी मदद के बिना यह सब संभव नहीं इसलिए दिए गए QR कोड के ज़रिए आप मदद भेज सकते हैं, मैं बैंक एकाउंट भी पोस्ट में डाल रहा हूँ जिसके ज़रिए आप बड़ी मदद कर सकते हैं। 3 दिन के अंदर 10 लाख रूपये इकट्ठा करने का लक्ष्य है उम्मीद हैं आप सहयोग करेंगे और अगर कोई मदद नहीं कर सकता तो वह इस पोस्ट को शेयर कर मदद करने में मदद करें।
Name - ANAM KHALID
Account No: 6010000400022928
IFSC : PUNB0996300
Bank name : Punjab National Bank
@ketto@SanjayAzadSln@asadowaisi@ShayarImran@_sayema@Ashok_Kashmir
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कानून के गलत इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि आजकल निजी दुश्मनी निकालने या आपसी विवाद के लिए लोगों पर झूठी FIR दर्ज कराने का एक खतरनाक ‘ट्रेंड’ शुरू हो गया है, जो बहुत चिंताजनक है.
यूपी के बस्ती से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां डीएम ऑफिस में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक जिंदा बुजुर्ग व्यक्ति कफन ओढ़कर दफ्तर में लेट गया. इस बारे में पता चला तो आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए. इस दौरान बुजुर्ग कहने लगा कि साहब, मुझे जिंदा कर दीजिए, क्योंकि सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया हूं.
पीड़ित बुजुर्ग का कहना था कि मैं पिछले 14 साल से सरकारी कागजों में मृत हूं. मैंने लगातार शिकायतें कीं, अपने जिंदा होने के सबूत दिए, लेकिन अभी तक सरकारी कागजों में मृत ही हूं. दरअसल, पूरा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का है. यहां इशहाक अली नाम का बुजुर्ग व्यक्ति जिलाधिकारी के ऑफिस पहुंचा था. वह कफन भी साथ लाया था.
बुजुर्ग ने कहा कि राजस्व विभाग ने मुझे मृत घोषित कर दिया था. पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि उसकी 0.770 हेक्टेयर जमीन दूसरे के नाम दर्ज कर दी गई. मैं बैंक से अपनी पेंशन निकालकर गुजारा कर रहा हूं. बावजूद इसके सरकारी फाइलों में मृत हूं.
बुजुर्ग इशहाक अली संतकबीर नगर नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर थे. रिकॉर्ड के मुताबिक, इशहाक अली 31 दिसंबर 2019 को रिटायर हो चुके हैं, लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों में गड़बड़ी है, और वे मृत घोषित कर दिए गए.
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