झारखंड सरकार के माननीय मंत्री सुदिव्य सोनू जी के आकस्मिक निधन से झारखंड के लोग स्तब्ध चकित हैं दिव्यलोक को प्रस्थान कर गए निधन से पूरा राज्य शोक मंगन हैं गृह रक्षा वाहिनी लोक सेवक संघ प्रदेश समिती की और से ईश्वर से दिवंगत आत्मा के शांति हेतु ईश्वरसे प्रार्थना करते है ॐ शांति💐
देर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं।
सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे बड़े भाई की तरह थे - स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
झारखंड आंदोलन के दौर से ही वे स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।
आज उन्हें याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि ज़िंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज़ हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है।
सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा।
आप हमेशा याद आएंगे भैया....
अतः घर में श्वेत वर्ण की, बिना टूटी फूटी छिद्र रहित, तीन अथवा उससे अधिक द्वारका शिलाओं का पूजन करना चाहिए और अगर दो द्वारका शिलाओं को शालग्राम के आगे स्थापित कर पूजते हैं तो दो द्वारका शिला का भी पूजन कर सकते हैं अन्यथा नहीं।।
रुद्रयामल अनुसार द्वादशी तिथि में दिन के समय में शालग्राम को स्नान नहीं कराना चाहिए। (अतः द्वादशी को दिन में शालग्रामशिला का पंचोपचार पूजन कर सायंकाल में षोडशोपचार पूजन करना चाहिए)
आचार भूषण के अनुसार द्वारका शिला को चन्दन अर्पित नही करना चाहिए।
एक शास्त्र वचन अनुसार घर में दो द्वारका शिला का पूजन नहीं करना चाहिए, दूसरे वचन अनुसार द्वारका शिला के जोड़े का पूजन करना चाहिए एक द्वारका शिला का नहीं, तीसरे वचन अनुसार शालग्राम शिला के आगे द्वारका शिला के जोड़े का पूजन करना चाहिए।
द्वारका शिला भार्या वियोगकारिणी होती है। सफेद वर्णं की द्वारका शिला ही पुत्र, पौत्र, धन आदि, धान्य, पशु, आयु, भारोग्य, हर्ष, विजय इत्यादि के साथ सदा प्रिय एवं भावना के अनुसार स्वर्ग और मोक्ष को भी देती है।
चक्रों वाली द्वारका शिला का अनन्त संज्ञा होती है। सुदर्शनादि लक्षणों की शिलाएँ सभी कामनाओं की देनेवाली होती हैं।
काले रंग की द्वारका शिला मृत्युदायक, कपिल वर्ण की भयकारिणी, कर्बुर वर्ण की रोग और दुःख देनेवाली, पीतवर्ण की धननाशिनी, धूम्रवर्ण की पुत्रघातिनी और फूटी-टूटी
जिस द्वारका शिला में एक चक्र हो उसकी संज्ञा सुदर्शन, दो हों तो लक्ष्मीनारायण, तीन त्रिविक्रम, चार जनार्दन, पाँच वासुदेव, छः प्रद्युन्न, सात बलदेव, आठ पुरुषोत्तम, नौ नवव्यूड, दश दशमूर्ति, ग्यारह अनिरुद्ध, बारह द्वादशात्मा तथा बारह से अधिक
गर्ग संहिता अनुसार भगवान् ने गज के रक्षणार्थ ग्राह को जब चक्र से काटा तब सुदर्शन गोमती में घुस गया और उसने वहां की सब शिलाओं को चक्रांकित कर दिया।
ये शिलाएं साक्षात् श्रीहरि की स्वरूप हैं, इनके दर्शन स्पर्श पूजन धारण से मनुष्य सर्वपापमुक्त होकर परमपद का भागी होता है।
स्कन्द पुराण अनुसार भगवान् विष्णु ने दैत्यों को मारकर अपना चक्र द्वारिका में गोमती नदी में धोया था जिससे उस क्षेत्र की सब शिलाएं चक्रांकित हो गईं और वहां चक्रतीर्थ बन गया।
Hello from rain-drenched Prague.
Today’s task is to explore the original Praha city which is underground of the present day Prague. Why? To prevent constant flooding. Will write about it too.
पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता तथा आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का निर्णय मैंने लिया है।
चाईबासा के आयुक्त एवं रांची के ADG को क्षेत्र में लगातार कैंप कर स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, DIG जमशेदपुर में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।