In a world chasing comfort, Asst. Comdt. Sagar Borade chose courage. An engineer turned CRPF officer, he lost a leg saving a comrade in a deadly IED blast in CG.
His spirit? Unbreakable.
His leadership? Legendary.
True heroes lead from the front.
#Salute#BharatKeVeer#CRPF
#CAPF के पूर्व अधिकारियों, जवानों और मौजूदा कार्मिकों के परिजनों ने बुधवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर अपनी आवाज उठाई।#CAPF के नए क़ानून का विरोध, #OPS बहाली और दूसरी लंबित मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया गया है। #Jantar_Mantar
दिनांक 30/04/26 को श्री सुरेंद्र पाल सिंह सहायक कमांडेंट( राजभाषा) के अधिवर्षिता पर सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में द्रुत कार्य बल सेक्टर मुख्यालय में, श्रीमती सीमा ढूँडिया, आई॰जी॰ आर ए एफ की अध्यक्षता में एक विदाई समारोह आयोजित किया गया ।
जिसमे विदा हो रहे श्री सुरेंद्र पाल सिंह, सहायक कमांडेंट( राजभाषा) को महानिदेशक, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल ऐवम द्रुत कार्य बल सेक्टर की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
द्रुत कार्य बल के सभी सदस्यों की ओर से विदा हो रहे अधिकारी को उत्तम स्वास्थ्य ऐवम सुखद भविष्य की मंगलकामनाएँ की जाती है।@crpfindia
Dear GP Sir, your enthusiasm is well taken but sharing the deployment details on social media is not advisable even if one is at the top position. As per blue book on operational deployment it is very clearly mentioned that all information regarding deployment has to be confidential and shall not be shared by unclassified messsges.
President Draupadi Murmu gave assent to the Central Armed Police Forces (CAPF) (General Administration) Bill, 2026, on April 9.
Groups of retired CAPF and family members of personnel in service protested against the bill, claiming it adversely affects their rights and services.
“If the paramilitary officers are there just for ceremonial purposes, then there is no point in having them,” says Sheoran. “We cannot just be there to lose our limbs in IED blasts.”
https://t.co/NmjOmwOJO1
Leader of Opposition in the Lok Sabha Rahul Gandhi on Thursday (April 9, 2026) said his party, the Indian National Congress, would dismantle the “discriminatory system” that allegedly denies personnel of the Central Armed Police Forces (CAPF) opportunities to rise to top leadership positions, and ensure they receive their “full rights and privileges” when they return to power.
https://t.co/PvIYtUslXF
Deeply disturbing allegations from Deoria.
A decorated jawan of the Central Reserve Police Force reportedly abused, assaulted, and even locked in a police station lockup by those meant to uphold the law.
If true, this is unacceptable.
Respect for our forces cannot be selective. Demand a fair, time-bound inquiry and strict accountability. 🇮🇳
Any IPS officer at the helm of affair should proactively respond. @crpfindia@gpsinghips@CMOfficeUP@myogiadityanath@Rajeevkrishna69 @spderoga @Igrangelucknow@DeoriaPolice
Surrounded. Outnumbered. Outgunned.
Yet they chose to fight back.
This is not a story of defeat,
this is the definition of valour till the last breath. 🇮🇳
Their sacrifice isn’t history — it’s our responsibility.
Salute to the brave hearts. 🕯️
#ताड़मेटला_के_शहीद
मालदा में “Coordination, Leadership और Steel Frame” कहाँ था?
मालदा की घटना देखिए—न्यायाधीशों को घंटों भीड़ ने घेर रखा, स्थानीय प्रशासन निष्क्रिय रहा, और अंततः सर्वोच्च न्यायालय के स्तर से हस्तक्षेप के बाद ही स्थिति संभली।
जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्याय दिए जाने के बावजूद CAPF Bill लाया जाता है, तो यह संदेश जाता है कि न्याय के निर्णयों को भी दरकिनार किया जा सकता है। ऐसे संकेत नीचे तक जाते हैं—जहाँ उच्च न्यायालय के निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, और स्थिति यहाँ तक पहुँचती है कि न्यायाधीशों को भीड़ के बीच असहाय छोड़ दिया जाता है, जबकि एसपी और डीएम समय पर हस्तक्षेप नहीं करते।
आज पूरे तंत्र में “coordination”, “leadership” और तथाकथित “steel frame” मौजूद होने के बावजूद यदि ऐसी घटनाएँ होती हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है—समस्या वास्तव में कहाँ है?
उदाहरण के लिए, इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुरक्षा जब से CAPF के हवाले है, वहाँ ऐसी स्थिति दोबारा देखने को नहीं मिली। इससे स्पष्ट होता है कि पेशेवर और जवाबदेह व्यवस्था क्या फर्क ला सकती है।
स्पष्ट है कि CAPF Bill में “coordination” और “leadership” के नाम पर दिए जा रहे तर्क जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते।
@narendramodi@AmitShah@RahulGandhi@VTankha@MahuaMoitra @SupremeCourtOfIndia @CalcuttaHighCourt
#JusticeForCAPF
CAPF बिल एक बिल नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
आज लोकसभा के सदन में मैंने स्पष्ट कहा कि Supreme Court of India ने साफ निर्देश दिया था कि CAPF अधिकारियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त किया जाए और उन्हें Indian Administrative Service और Indian Police Service के समकक्ष व्यवस्थित सेवा का दर्जा दिया जाए। लेकिन सरकार उस फैसले को लागू करने के बजाय कानून बदलकर उसे निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है।
जब फैसला पक्ष में होता है तो स्वीकार, और जब खिलाफ होता है तो कानून बदल दिया जाता है — यह कैसी परंपरा स्थापित की जा रही है?
CAPF के अधिकारी UPSC के माध्यम से चयनित ग्रुप ‘A’ अधिकारी हैं, उनकी योग्यता और क्षमता किसी भी स्तर पर IPS से कम नहीं है। देश की सीमाओं से लेकर आतंकवाद, नक्सलवाद, आपदा प्रबंधन और चुनावों तक—हर जगह CAPF ने अपनी निष्पक्षता और क्षमता साबित की है। यही कारण है कि चुनावों में भी इन बलों की तैनाती होती है, क्योंकि देश को उन पर भरोसा है।
लेकिन यह बिल उस भरोसे को तोड़ने वाला है।
जब नेतृत्व ऐसे अधिकारियों के हाथ में होगा जो सीधे सरकार के नियंत्रण में हों, तो क्या CAPF की निष्पक्षता बरकरार रह पाएगी? क्या यह चुनावों को प्रभावित करने का एक नया औजार नहीं बनेगा?
सरकार से सीधा सवाल है—क्या आपको अपने ही CAPF अधिकारियों पर भरोसा नहीं है?
सच्चाई साफ है—यह बिल CAPF को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि उस पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लाया गया है।
पुलवामा से लेकर दंतेवाड़ा, मणिपुर से लेकर चीन सीमा तक—हर चुनौती में CAPF के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। लेकिन जब उन्हें सम्मान और अधिकार देने की बात आई, तो सरकार उन्हें दंडित करने वाला कानून लेकर आ गई।
यह अन्याय है, और इसका पुरजोर विरोध होगा।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं—आने वाले समय में जब INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी, तो इस कानून को पहले ही सत्र में रद्द किया जाएगा।
लोकतंत्र, संविधान और हमारे वीर जवानों के सम्मान के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी…
#CAPF #LokSabha #SudhakarSingh #ips
श्रद्धेय नेताजी की विरासत हमें सिखाती है कि किसान, नौजवान और देश की रक्षा करने वाले जवान — ये राष्ट्र की रीढ़ हैं। आज हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी की अगुआई में हम समाजवादियों ने इसी भावना के साथ केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' का कड़ा विरोध किया है।समाजवादी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि इसे वापस लेकर सुरक्षा बलों को पुरानी पेंशन सहित उनका न्यायोचित अधिकार दिया जाए।
#WATCH | Delhi: On the CAPF Bill, Congress MP Deepender Singh Hooda said, "It is truly unfortunate that this government has brought a bill that hinders the career progression of personnel from CRPF, BSF, ITBP, SSB, and CAPF... The Home Minister should have been present to discuss this crucial issue, but he didn't find time for it... We will continue to fight this battle. Our leader Rahul Gandhi has himself raised this matter... We will keep fighting for our jawans."
78 साल में पहली बार अग्निपथ योजना लाकर मिलिट्री को कच्चा करने वाली बीजेपी सरकार से पैरा-मिलिट्री के अधिकारी, जवान न्याय की क्या उम्मीद करें?
गृहमंत्री जी ने इसी सदन में कहा कि हमने नक्सलियों को साफ कर दिया, लेकिन आज CAPF बिल 2026 के जरिये भाजपा सरकार ने CAPF जवानों और अफसरों के भविष्य की संभावनाओं को ही साफ कर दिया है।
जिस CAPF ने देश में 7.5 करोड़ पेड़ लगाए, आज सरकार उन्हीं के भविष्य की जड़ें काट रही है।
ये जवान हमारी रक्षा करते हैं लेकिन सरकार इनके भविष्य की रक्षा करने से हाथ पीछे खींच रही है।
आज लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल 'CAPF' (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान।