@jat_devta तुम लोगों की वजह से दिल्ली गुड़गांव क्राइम कैपिटल बना हुआ है... ilegal mining से लेकर जमीन तक कब्जा में तुम्हीं लोग का हाथ है और यहां व्यूज के लिए प्रवचन दे रहे हो... जमीनें बेच के शो ऑफ करने वाली प्रजाति है तुम लोगों की बाकी कुछ दम नहीं है
ये लोग आज तक एक ढंग का ऐप नहीं बना पाए और बात करते है विश्वगुरु और विकसित भारत बनाने कि.........
@AshwiniVaishnaw बिहार के इसी बाढ़ के पानी में डूब जाना चाहिए ऐसे डेवलपर और ऐप को.....
We are experiencing High Load – Please Retry
At 10:25 AM, what kind of “High Load” are you experiencing? Can you explain? @IRCTCofficial
You are the worst Railway Minister in the history of India, @AshwiniVaishnaw.
बेगूसराय के बरौनी नगर परिषद में CCTV कैमरा लगाने की योजना में भ्रष्टाचार का स्तर देखिए।
1 CCTV कैमरे की कीमत– ₹1,21,635
286 कैमरों की कीमत– ₹3,47,87,610
केवल 286 कैमरों पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिया गया।
जनता के पैसे की इस तरह की लूट और बंदरबांट से बिहार विकसित होगा?
@atsshow7 लोकतंत्र के पर्व में दिल्ली को कड़ा संदेश दीजिए कि हमें यूजीसी बिल स्वीकार नहीं है।नेता सिर्फ वोट की चोट से डरता है बाकी उसे साल भर आप गरियाते रहिए कोई फर्क नहीं पड़ता।वरना इसका फल आपके बच्चे को भुगतना पड़ेगा।
@Bittu1179490@neha_aisa@myogiadityanath एक अकेली लड़की पूरी भाजपा के it cell को हिला के रख दी है...
कुछ तो बात है उसमें...!
अभी तो उसने हल्का हाथ रखा है और ये छटपटाने लगे....😀
नेहा बोरा की भाषा चाहे जैसी भी हो, लेकिन यूपी में योगी सरकार की कथित दबंगई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जो सरकार के खिलाफ बोले, उस पर FIR। किसी को झूठे मुकदमे में फँसाने की धमकी। अफवाह या आरोप के आधार पर घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई। और सबसे गंभीर सवाल—पुलिस एनकाउंटर।
बिहार में भी ऐसी ही कार्यशैली की कोशिशों पर सवाल उठे थे, लेकिन भारत तिवारी एनकाउंटर जैसे मामलों ने व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सोचिए—अगर पुलिस को बिना पर्याप्त न्यायिक निगरानी के एनकाउंटर की छूट मिल जाए, तो कानून का राज कहाँ बचेगा?
आज किसी राजनीतिक विरोधी को निशाना बनाया जा सकता है, कल निजी दुश्मनी निकालने के लिए किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर पुलिस का इस्तेमाल हो सकता है। अगर मामला अदालत तक पहुँचने से पहले ही खत्म कर दिया जाए, तो सबसे ज्यादा नुकसान उस गरीब और कमजोर व्यक्ति का होगा जिसके पास सत्ता और पैसे के सामने लड़ने की ताकत नहीं है।
कानून का राज वही है जहाँ अपराधी को सजा अदालत दे—पुलिस नहीं।
वरना सवाल सिर्फ एनकाउंटर का नहीं रहेगा; सवाल यह होगा कि कहीं हम ऐसी व्यवस्था तो नहीं बना रहे, जहाँ रसूखदार बच जाए और कमजोर मारा जाए।
लालू यादव हमेशा पद की राजनीति करते हैं बिहार का राजनीति नहीं किया। जब एक कॉल से प्रधानमंत्री बनता था क्यों नहीं बिहार के लिए कुछ ऐसा मांग लेते,कर देते जिसे बिहार के लोग आज भी याद रखते और पलायन बंद हो जाता। लालू यादव केंद्र को समर्थन सिर्फ इस बात पे करते थे कि उन्हें कैबिनेट में कितना मंत्री मिलेगा और कौन से मंत्रालय मिलेगा ....।
नेहा बोरा की भाषा अपनी जगह, लेकिन सवाल बड़ा है—क्या FIR, बुलडोजर और एनकाउंटर के जरिए कानून चलाया जा सकता है? जब पुलिस को अदालत की निगरानी से बाहर शक्ति मिलेगी, तो निजी दुश्मनी भी ‘कानूनी कार्रवाई’ बन सकती है। लोकतंत्र में पुलिस सजा नहीं देती, अदालत देती है—वरना रसूखदार बचेंगे और कमजोर मारे जाएंगे।
नेहा बोरा की भाषा चाहे जैसी भी हो, लेकिन यूपी में योगी सरकार की कथित दबंगई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जो सरकार के खिलाफ बोले, उस पर FIR। किसी को झूठे मुकदमे में फँसाने की धमकी। अफवाह या आरोप के आधार पर घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई। और सबसे गंभीर सवाल—पुलिस एनकाउंटर।
बिहार में भी ऐसी ही कार्यशैली की कोशिशों पर सवाल उठे थे, लेकिन भारत तिवारी एनकाउंटर जैसे मामलों ने व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सोचिए—अगर पुलिस को बिना पर्याप्त न्यायिक निगरानी के एनकाउंटर की छूट मिल जाए, तो कानून का राज कहाँ बचेगा?
आज किसी राजनीतिक विरोधी को निशाना बनाया जा सकता है, कल निजी दुश्मनी निकालने के लिए किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर पुलिस का इस्तेमाल हो सकता है। अगर मामला अदालत तक पहुँचने से पहले ही खत्म कर दिया जाए, तो सबसे ज्यादा नुकसान उस गरीब और कमजोर व्यक्ति का होगा जिसके पास सत्ता और पैसे के सामने लड़ने की ताकत नहीं है।
कानून का राज वही है जहाँ अपराधी को सजा अदालत दे—पुलिस नहीं।
वरना सवाल सिर्फ एनकाउंटर का नहीं रहेगा; सवाल यह होगा कि कहीं हम ऐसी व्यवस्था तो नहीं बना रहे, जहाँ रसूखदार बच जाए और कमजोर मारा जाए।
@amitkilhor That’s why I’ve always said Gurgaon is one of the most unsafe places in Delhi-NCR.
Glass towers, luxury offices and fancy infrastructure don’t make a city safe.
If people can’t feel safe on the streets, what exactly are we calling “development”?