ब्रिटेन में डीजल की कीमत 2 पाउंड यानी 255 रुपए 40 पैसे प्रति लीटर हो गया।
दिल्ली में डीजल 95 रुपए 20 पैसे प्रति लीटर है।
फिर भी देशद्रोहियों को बहुत महंगा लगता है।
BJP से नाराज़ हो कर के हिन्दू को ही कमज़ोर होना है।
303 से 240 लाने का घमंड ठीक है, पर 240 से 0 लाने का अंजाम कौन भुगतेगा? BJP नहीं, हम भुगतेंगे।
हमारे दिमाग में ज़हर घोला जा रहा है...
BJP ने ये क्यों नहीं किया?
BJP ने वो क्यों नहीं किया?
और हम घमंड में कह रहे हैं - "हमने 303 से 240 पर ला दिया, अब 240 से 0 पर ला देंगे, तब अक्ल आएगी।"
याद रखना -
अगर BJP 0 पर आई, तो चिंता BJP को नहीं, चिंता हमें करनी होगी।
याद करो -
Direct Action Day - लाखों हिन्दू मारे गए।
1947 विभाजन - लाखों हिन्दू मारे गए।
1990 कश्मीर - 5 लाख हिन्दुओं को रातों-रात भगाया।
1984 सिख नरसिंहार
BJP 0 पर गई तो ये हर गली में दोहराया जाएगा।
इसलिए लड़ाई BJP से नहीं, हिन्दू को संगठित रहने की है।
संगठित रहोगे तो बचे रहोगे।
BJP हारेगी, पर घर तुम्हारा जलेगा,
दुकान तुम्हारी लुटेगी, पलायन तुम्हें करना पड़ेगा।
क्योंकि BJP 0 पर आई तो कश्मीर हर शहर में बनेगा।
इसलिए आलोचना करो, सवाल पूछो, पर वोट के दिन बँटो मत।
एक रहोगे तो सेफ रहोगे।
भारत-पाक विभाजन याद रखना।
कश्मीरी पंडितों का पलायन याद रखना।
BJP कोई पार्टी नहीं, हिन्दुओं की ढाल है।
ढाल टूटी तो वार सीधा तुम पर होगा।
सुना है जस्टिस भुइयां के पिता सीपीआई से जुड़े रहे हैं । वे कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दो बार (1983–1986 और 1993–1996) असम के एडवोकेट जनरल रहे है।जस्टिस भुइयां को जुलाई 2011 में कांग्रेस सरकार ने असम का एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त किया था ।बाद में। उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया । बाक़ी आप समझदार हैं । तथ्य ग़लत हो तो बता दीजिएगा ।
देख रहा हूं… कुछ समझदार लोग तीन-चार दिन से ये समझदारी और चालाकी दिखा रहे हैं कि #ज्ञानेशकुमार तो 19 जनवरी 2025 में सीईसी बने तो इसके बाद जितने राज्यों के चुनाव हुये उसमें कॉंग्रेस ने केरल में चुनाव जीता और गैर-बीजेपी..विपक्ष की पार्टी TVK ने तमिलनाडु में!
यानी केरल और तमिलनाडु बीजेपी नहीं जीत पाई तो इन राज्यों में कहां हेराफेरी की #चुनावआयोग ने!
अपने इन महानुभाव संगी साथियों को याद दिलाना चाहता हूं कि किसी राज्य में वही पार्टी चुनाव जीत सकती है जो पूरी मजबूती से .. ज्यादा ये ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े (ताकि बहुमत ला सके….) तो जिस बीजेपी का वजूद इन दोनों दक्षिणी राज्यों में ना के बराबर है वो क्या चुनाव जीत सकती थी!
(#ज्ञान के ईश इतने भी कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं)
इतना #ज्ञान तो हरेक ज्ञान के ज्ञाता (ज्ञान के ईश्वर) के पास होगा ही ना…. जो पार्टी हाइये ही नहीं कहीं सीन में तो वो जीतेगी कैसे …बॉस!
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे एक ट्रस्ट के माध्यम से कर्नाटक में जमीन की लूट और भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इस ट्रस्ट का नाम है ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’।
इस ट्रस्ट में मल्लिकार्जुन खड़गे, बेटे प्रियांक खड़गे, दामाद और उनकी पत्नी शामिल हैं। ये ट्रस्ट मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार का है।
मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियांक खड़गे ने इस ट्रस्ट के माध्यम से अलग-अलग जमीनों पर कब्जा किया और अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए गरीबों की जमीन हड़प ली।
- श्री @pradip103
पूरा देखें
https://t.co/VwXyhzmWPU
पिट रहा व्यक्ति एक सांसद है...
पुलिस कहाँ थी? प्रशासन कहाँ था?
सब कुछ खुलेआम मीडिया के कैमरों के सामने हुआ।
क्या अब भाजपा के संरक्षण में विपक्षी नेताओं की सरेआम हत्या होगी...?
I strongly condemn the cowardly attack on TMC National General Secretary & MP @abhishekaitc in West Bengal today.
Violence has no place in any democracy. It is shameful for a ruling party to patronise goons who physically attack political opponents.
The guilty must be brought to book.
But it is clear, that the BJP govt in West Bengal has failed miserably to maintain law and order.
This hooliganism and targeted attacks on an opposition leader is anarchy and unacceptable.
सर, मित्र देश के साथ सभी राजनीतिक दलों को प्यार होना ही चाहिए। इसमें गलत क्या है? हाँ, निजी प्यार के चक्कर में कोई इटली वाला भारत के रक्षा सौदों में दलाली कर ले जाए, यह ठीक नहीं होगा। है कि नहीं सर?
राहुल गांधी को भारत और भारत में बनी हर वस्तु से इतनी नफरत क्यों है?
भारत आज Made in India और Local Goes Global के माध्यम से दुनिया का Trusted Destination बना है, लेकिन कांग्रेस को हर भारतीय उपलब्धि में समस्या ही दिखाई देती है।
जिस वैश्विक सम्मान, निवेश और भरोसे के लिए देश दशकों तक इंतज़ार करता रहा, वही प्रधानमंत्री @NarendraModi जी के नेतृत्व में आज भारत अर्जित कर रहा है तो वह राहुल गांधी से सहन नहीं हो रहा है।
ट्रंप अपने साथ बड़े उद्योगपतियों को लेकर चीन गये क्योंकि वो चाहते हैं, अमेरिकी कंपनियों को चीन से और कारोबार मिले.
लेकिन हमारे यहां अगर कोई नेता उद्योगपतियों को अपने साथ लेकर चला जाए तो बहुत हाय-तौबा मचती है. तरह-तरह के सवाल उठाए जाते हैं.
ट्रंप के लिए खुलकर बिज़नेस की बात करना, अपनी डील सामने रखना कोई मुश्किल काम नहीं है.
उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है, चीन को ईरान से दूर करना, चीन को ईरान का समर्थन करने से रोकना.
लेकिन चीन की एक फितरत है. वो दूसरों के फटे में अपना पैर नहीं डालता. वो मौका देखकर अपनी चाल चलता है. इसलिए ट्रंप को इंतजार करना पड़ेगा. https://t.co/NvgyUCNz6y
देश की जनता को ये समझना होगा कि इस समय International Fuel Crisis के साथ-साथ भारत में आर्थिक संकट की बड़ी वजह मोदी सरकार में Leadership Crisis, दूरदर्शी सोच का आभाव है और Incompetency कूट-कूट कर भरी है।
ये Crisis Modi-Govt-Made crisis है। जिसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को पेट्रोल, डीज़ल और LPG पर अपनी जेब से भरना पड़ रहा है।
जब डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो पूरे देश में महँगाई का Cascading Effect पड़ता है। उद्योगों से लेकर घरेलू बजट व किसानों - सब पर बुरा असर पड़ता है।
जब West Asia War शुरू हुई तो देश को बताया गया कि “सब चंगा सी” और कांग्रेस पार्टी के सवालों को नकारा गया। कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया, उल्टा अमरीकी “Permission” और “Allow” के चलते हमारी Sovereignty को गिरवी रखा गया।
चुनाव के दौरान मोदी सरकार ऐसे बरताव करती है कि “सब सामान्य है” और केंद्र सरकार का काम केवल राज्यों में चुनाव लड़ना है।
अब जब Crisis बढ़ रही है तो मोदी जी Work From Home और Fuel बचाने का झुनझुना बजाने लगे।
हमारे दो सवाल —
1. मार्च में जो रूसी तेल ख़रीदने का 30-दिन का waiver दिया था जिसमें अमरीका ने “allow” और “permission” जैसे अपमानजनक शब्द लिखे थे, ख़बरों के अनुसार अब भारत सरकार उस Waiver का Extension चाहती है। सवाल है कि मोदी जी ने देश को “permission” माँगने की स्थिति में क्यों पहुँचा दिया है।
2. क्या ये सच नहीं है कि जब अंतरराष्ट्रीय Crude Oil के दाम कम थे, तब मोदी सरकार ने आम जनता को कोई राहत नहीं दी, उल्टा Central Taxes से 10 सालों में ₹43 लाख करोड़ कमाए? तो अब जनता पर महँगाई का बोझ क्यों लादा जा रहा है?
देश की जनता कब से सोच रहीं थीं कि अब तक देश मे पेट्रोल डीजल की कीमत क्यूँ नहीं बढ़ी?
आख़िरकार भारत सरकार ने पेट्रोल व डीज़ल पर Rs 3 की बढ़ोतरी कर दी है।
एक प्रश्न उठता है कि
जब पिछले दस सालों में कच्चे तेल की कामत कम थी तब तो आम लोगों को फ़ायदा नहीं मिला और 16 बार एक्साइज ड्यूटी बड़ाई गई तब खड़ी के देशों में कोई युद्ध नहीं चल रहा था,
ऐसे में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ा कर अब देशवासियों के पेट पर लात क्यों मार रही है मोदी सरकार?
चुनाव ख़त्म, सरकार करे जनता का पैसा हज़म॥॥