अगर कॉन्स्टिट्यूशन होता..
आज मैं राम राज में हूँ, त्रेता की अयोध्या में। सोच रहा हूँ, कि यहां एक कॉन्स्टिट्यूशन रेजीम होता...
तो कैसा होता??
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कथा में क्या बदलता, क्या सम्भव होता, क्या होने से बच जाता। जैसे-
क्या अयोध्या की गद्दी के लिए, दशरथ के चार पुत्रों में इलेक्शन होता? क्या अनुभवी सुमंत भी गद्दी के लिए नॉमिनेशन फाइल करते?
और क्या वो धोबी भी चुनाव लड़ता?? अयोध्या के चौराहों पर वंशवाद के ख़िलाफ़ बोलता। रघु से अज तक, रघुकुल की नीतियों रीतियों को कटघरे में खड़ा करता??
22 बरस के युवा राम पर, सदियो के आरोप मढ़ता??
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दशरथ की इच्छा, बिना प्रश्न सबको शिरोधार्य थी। गणतंत्र में कैकई को तीन वरदान देने के पहले सदन में विधेयक लाना होता। विपक्ष अड़ंगा लगा देता।
वनवास पर राम नही, तो लक्ष्मण अवश्य एक PIL लगा देते। आप इलेक्शन लड़ने से डिस्क्वालिफाई कर सकते है, पर कैंडिडेट को वन भेजना तो अनकांन्स्टिट्यूशनल हुआ न।
स्ट्रिक्टली अगेंस्ट ह्यूमन राइट!!
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फिर भरत को इजाजत न मिलती, कि किसी औऱ की खड़ाऊं, गद्दी पर रखकर शासन करें?
क्या रावण के विरूद्ध एफआईआर होती?? स्त्री हरण के लिए उस पर ट्वीट होते?? राष्ट्रीय सुरक्षा, महिलाओं की हालत पर सवाल उठते?
सूर्पनखा के नाक कान काटने के लिए क्या लक्ष्मण पर FIR होती? मूक सहमति देने वाले क्या श्रीराम को भी क्या, कोएक्युज्ड बनाया जाता??
परस्त्री हरण के लिए तो बाली और सुग्रीव दोनो पर आरोप लगते।कोर्ट के लिए बड़ा ट्रिकी केस होता।
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लंका पर युद्ध छेड़ने के पूर्व, क्या अयोध्या से एप्रूवल लेना होता?
ब्रिज बनाने को टेंडर बुलाये जाते? लोएस्ट प्राइज कोट न करने के बावजूद, नल-नील एंड कम्पनी को कॉन्ट्रेक्ट, क्या सीएजी की आपत्ति का कारण नही बनता??
शिव पूजक, प्रकांड विद्वान, रावण को मारने से ब्राह्मण वोटरों पर क्या असर पड़ता?? क्या वानरों, रीछों, नागों को अयोध्या के प्रशासन में प्राथमिकता मिलती??
अफसरों की ट्रान्सफर पोस्टिंग में राजा की पार्टी के लोगो की, या संगठन की सुनवाई होती?मण्डल अध्यक्ष, फ्रंटल यूनिट प्रभारी, कार्यकर्ताओ की सुनी जाती अथवा नही?
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क्या शंबुक वेदों की तैयारी कर, APSC की परीक्षा देता? क्या वो सर उठाकर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट का कलेक्टर या प्रभु श्रीराम चीफ सेक्रेटरी बन जाता?
क्या वशिष्ठ को मंत्रिमंडल में जाति के आधार पर वरिष्ठता मिलती, या उन्हें सम्विधान के कपितय नियमो के अनुरूप स्क्रूटनाइज किया जाता ?
बिना गुजारे भत्ते के, गर्भावस्था में घर से निकाली गई सीता के पास क्या कोर्ट जाने राइट होता। क्या पति की संचित सम्पत्ति से वे एक हिस्सा, अपने लिए एलमनी के रूप में मांगने की अधिकारिणी होती?
क्या शंबुक मर्डर केस या सीताजी द्वारा फाइल सिविल सूट में अयोध्या की कोर्ट, राजा के विरुद्ध जाकर फैसला देती??
सवाल बहुत से हैं?
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पोस्ट प्रभु राम या रामायण का मजाक बनाने की नही। गम्भीरता से जरा सोचिए।
प्रभु के नाम से जिस व्यवस्था को, रामराज बताकर, गणतंत्र से बेहतर बताने की कोशिश है,
अबाध सत्ता की जो छवि आपके अवचेतन में बिठाने की चेष्टा हो रही हैं। जिसपे आप अनजाने मुहर लगा रहे हैं,
उसे खोलकर सामने रख रहा हूँ।।
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गणतंत्र, कानून का राज, कॉन्स्टिट्यूशनल पॉवर्स, लेस्जिलेटिव कन्ट्रोल.. किसी को अधिनायक बनने की इजाजत नही देता।
किसी को रावण, ताड़का, खर दूषण बनने की इजाजत नही देता। किसी को दशरथ, वशिष्ठ, कैकई बनने की इजाजत नही देता।
और स्वेच्छा से धर्म अधर्म को परिभाषित करने, के लिए, सत्ता में अधिनायकवाद लाने के लिए, किसी को श्रीराम बनने की भी इजाजत नही देता।
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सत्ता पर यही बंधन तो मानव इतिहास की उपलब्धि है।आजाद नागरिको की खोज हैं। हम नागरिक है, रियाया नही।
और यह नेशन स्टेट है, रियासत नही। ये बंधन, ही नेशन स्टेट की बैकबोन है। उसे खड़ा रखते, बिखरने से रोकते है।
कानून, अगर रामायण के तमाम पात्रों पर बराबरी से लागू होता..
तो श्रीराम हों या शंबुक..किसी को अत्याचार न झेलना पड़ता।
न करने की इजाजत होती।
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जहाँ श्रीराम के बायें हाथ का धनुष, एक्सेप्शन हो। अभय मुद्रा में उठा, खुला आशिर्वाद देता हुआ हाथ ही नॉर्म हो।
जहां नागरिक अभय से जिये।
जिस राज्य में कोई अत्याचार न हो।
हुआ तो दोषी दंडित हो।
जहां समता हो,
राजा-प्रजा, प्रजा-प्रजा में बराबरी हो।
नहीं है, तो समता की दिशा में प्रयास हो।
जहां की व्यवस्था, शोषण के विरूद्ध आवाज का सहारा बनती हो, संवैधानिक उपचार देती हो। अधिकार देती हो।
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जब सरकार, उसके कारिंदे चौक चौराहे में, सचिवालयों और मंत्रालयों मे यही न्याय, अभय, और रामसुलभ संवेदना के साथ सुनिश्चित करने के लिए सन्नद्ध हो।
यही राम राज्य की परिभाषा है न..
या नही??
@bankofbaroda की शुक्लागंज (उन्नाव) शाखा का बुरा हाल है। तीन दिन की बंदी के बाद बैंक खुली भी तो स्टाफ के कई कर्मचारी अभी भी छुट्टी मन रहे हैं। ग्राहक परेशान हैं। नकदी निकासी के लिए आधार सेवा केंद्र की शरण लेनी पड़ रही है। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी देखने सुनने वाला है कि नहीं।
With this Rs 10000 crore investment , the total commitment of RP Sanjiv Goenka Group to the state of Uttar Pradesh is now pegged at Rs 20,000 crores .
Dr Goenka salutes the vision of Shri Yogi Adityanath ji and looks forward to a deeper relationship with the State of UP.
RP Sanjiv Goenka announces Rs 10,000 crore investment in the state of Uttar Pradesh
Dr Sanjiv Goenka in a meeting today with the Honourable Chief Minister of Uttar Pradesh Shri Yogi Adityanath has announced an investment of Rs 10,000 crore in the state of Uttar Pradesh .
Renewables as a sector will be allocated Rs 7500 crores . Power Distribution and Retail sector , both will receive Rs 1000 crore each . Sports Academies in the state of Uttar Pradesh will see an investment of Rs 500 crores .
इंदौर में प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन में प्रवासियों को रजिस्ट्रेशन और आने-जाने का ख़र्चा करने के बाद भी बाहर ही रखा गया। भाजपा सरकार की बदइंतज़ामी के ख़िलाफ़ विश्व भर से आये इन प्रवासियों का आक्रोश जायज़ है क्योंकि वो अपने ही देश में ठगा हुआ व अपमानित महसूस कर रहे हैं।
शर्मनाक!