सड़कों पर आतिशबाजी थी और हवा में जीत का नशा... एक 'इस्तीफे' ने पूरे मुल्क को जश्न में डुबो दिया था।
सबको लगा कि कहानी खत्म हो चुकी है। लेकिन उन्हें क्या पता था, असली खेल तो अब शुरू हुआ है! बंद कमरों में, पर्दे के पीछे शतरंज़ की एक ऐसी चाल चली जा रही हैं, जो कल्पना से भी परे होगी