एक जोरदार थप्पड़
क्योंकि राजस्थानी डिजर्व भी यही करते हैं...
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में कभी राजस्थानी भाषा के केंद्र खुलने के आदेश नहीं हो पाए। भाषा की मान्यता के मुद्दे पर हम कभी एकजुट नहीं हो पाए। कौन-सी राजस्थानी जैसे सवाल पूछते रह गए और एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्लेजर लेते रहे गए। अब इस मराठी झापड़ का आनंद लीजिए। गाल बजाइए या सहलाइए, अपनी-अपनी सहूलियत, अपनी-अपनी मजबूरी, अपनी-अपनी जरूरत, अपने-अपने अहम् और अपने-अपने वहम के अनुसार।
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खुलेंगे। क्योंकि राजस्थान के प्रथम नागरिक मराठी मानुष हैं। लेकिन अन्य आठ करोड़ मूल नागरिकों की कोई भाषा राजस्थानी के केंद्र विश्वविद्यालयों में नहीं खुल पाएंगे। भले ही महाराष्ट्र में मराठी बोली के अलग-अलग स्वरूप हों, हमें इससे क्या? हमें तो राजस्थानी का विरोध करना है। पीढ़ियों से गुलाम रहे हैं, पीढ़ियों तक और गुलाम रह लेंगे। क्या ही फर्क पड़ता है। गुलामों का कोई आत्म सम्मान, कोई आत्म बोध, कोई आत्म गौरव वगैरह कुछ होता थोड़े ही है।
बधाई हो आप सभी को
इस घोषणा पर ऐसी हर्ष ध्वनि करें कि देवता भी आकाश से पुष्प वर्षा करने के लिए विवश हो जाएं
6. Siempre estar al tanto de su pasado
El pasado de una mujer dice mucho sobre su futuro,
Si alguna vez traicionó a alguien en su pasado...
Te hará lo mismo porque,
Quien una vez es desleal, siempre lo será...
सेवा में,
सचिव महोदय, @RPSC1
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC),
अजमेर, राजस्थान।
विषय: वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2025 में 50% से अधिक पद वृद्धि, नवीन श्रेणियों में पद जोड़े जाने तथा बी.एड. अंतिम वर्ष (Appearing) अभ्यर्थियों के हित में ऑनलाइन आवेदन पुनः आमंत्रित (Form Re-open) करने एवं 12 जुलाई 2026 से प्रस्तावित परीक्षा स्थगित किए जाने बाबत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा दिनांक 17.07.2025 को वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2025 का विज्ञापन 6500 पदों के लिए जारी किया गया था।
विज्ञापन जारी होने की तिथि पर प्रभावी नियमों के अनुसार प्रक्रियाधीन भर्ती में 50% तक पद वृद्धि बिना पुनः आवेदन आमंत्रित किए की जा सकती थी, जबकि 50% से अधिक पद वृद्धि होने पर आवेदन पुनः आमंत्रित (Form Re-open) करना आवश्यक था।
इसके पश्चात राज्य सरकार द्वारा दिनांक 21.07.2025 को नियमों में संशोधन कर उक्त सीमा 50% से बढ़ाकर 100% कर दी गई। संशोधन आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगा। विधि के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, जब तक किसी संशोधन को स्पष्ट रूप से पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव नहीं दिया जाता, तब तक वह पूर्व में जारी विज्ञापनों पर लागू नहीं माना जाता। अतः दिनांक 17.07.2025 को जारी विज्ञापन पर उसी समय प्रभावी नियम लागू होने चाहिए।
इसके बावजूद आयोग द्वारा दिनांक 25.06.2026 को 4037 अतिरिक्त पद जोड़कर कुल पदों की संख्या 6500 से बढ़ाकर 10537 कर दी गई, जो मूल विज्ञापित पदों की तुलना में लगभग 62% की वृद्धि है। इतनी बड़ी पद वृद्धि के बावजूद आवेदन पुनः आमंत्रित नहीं किए गए, जिससे अनेक पात्र अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए।
इसके अतिरिक्त संशोधित पद वर्गीकरण में सहरिया महिला श्रेणी के लिए पहली बार 2 पद निर्धारित किए गए हैं, जबकि मूल विज्ञापन में इस श्रेणी के लिए कोई पद उपलब्ध नहीं था। किसी नई श्रेणी के लिए पहली बार पद निर्धारित होने पर उस श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर प्रदान करना समान अवसर, प्राकृतिक न्याय तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 की भावना के अनुरूप आवश्यक है।
साथ ही, वर्तमान में बड़ी संख्या में बी.एड. अंतिम वर्ष (Appearing) के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जो निर्धारित पात्रता तिथि तक अपनी शैक्षणिक योग्यता पूर्ण कर लेंगे। यदि आवेदन पुनः आमंत्रित किए जाते हैं तो ऐसे अभ्यर्थियों को भी इस महत्वपूर्ण भर्ती में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होगा। यह भर्ती कई वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है, अतः अधिकतम पात्र अभ्यर्थियों को अवसर प्रदान करना लोकहित एवं गुणवत्तापूर्ण चयन की दृष्टि से आवश्यक है।
वर्तमान में इस भर्ती परीक्षा का आयोजन 12 जुलाई 2026 से प्रस्तावित है। यदि आवेदन पुनः आमंत्रित किए बिना परीक्षा आयोजित कर दी जाती है, तो बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी स्थायी रूप से इस भर्ती से वंचित हो जाएंगे तथा भविष्य में अनावश्यक न्यायिक विवाद उत्पन्न होने की भी संभावना रहेगी।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि—
1. 12 जुलाई 2026 से प्रस्तावित वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2025 को तत्काल प्रभाव से स्थगित (Postpone) किया जाए।
2. 50% से अधिक पद वृद्धि होने के कारण ऑनलाइन आवेदन पुनः आमंत्रित (Form Re-open) किए जाएँ।
3. संशोधित पद वर्गीकरण में जोड़ी गई नई श्रेणियों, विशेषकर सहरिया महिला श्रेणी, के पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाए।
4. बी.एड. अंतिम वर्ष (Appearing) के उन अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने का अवसर दिया जाए, जो निर्धारित पात्रता तिथि तक अपनी शैक्षणिक योग्यता पूर्ण कर लेते हैं।
5. भर्ती प्रक्रिया को समान अवसर, पारदर्शिता, प्राकृतिक न्याय तथा प्रचलित नियमों के अनुरूप संचालित किया जाए।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विधिसम्मत भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करते हुए उपर्युक्त तथ्यों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगा तथा समस्त पात्र अभ्यर्थियों के हित में न्यायोचित निर्णय लेगा।
भवदीय,
समस्त पात्र अभ्यर्थी
वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2025
राजस्थान
#2nd_ग्रेड_फॉर्म_रिऑपन_किजिए
गुरुजी मैं आपकी बात से सहमत हूं 2nd Grade मे 62% पद वृध्दि हुई है आवेदन का पोर्टल रिओपन हो होना चाहिए।
हर भर्ती मे 50% से ज्यादा पद बढ़ते है तो आवेदन का पोर्टल रिओपन होना चाहिए...अब 100% पद वृध्दि का नियम लागू है लेकिन यह भर्ती 50% पद वृध्दि नियम के तहत नोटिफिकेशन जारी हुआ था 100% का तो अभी लागू हुआ है।
सुभाष चारण सर को सुने...
अंजना ओम कश्यप ने अबकी बार गलत लोगो से पंगा ले लिया है।
देश के सारे शिक्षक बारी बारी से अपने अपने हिसाब से उनके ऊपर लगे दलाली के मेकअप को धो रहे है।
शायद अब आगे से कभी शिक्षकों पर ऐसी दलाली नहीं करेगी..😂😂
राजस्थान रॉयल्स के मालिक लक्ष्मी निवास मित्तल मैचों के बाद वैभव सूर्यवंशी से किस तरह मिलते-जुलते और बातचीत करते रहते हैं।
जो लोग यह सोचते हैं कि MI, CSK या RCB आसानी से वैभव को RR से अपने पाले में खींच सकते हैं, वे एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं।
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में लेवल-2 विज्ञान-गणित के 8 प्रश्न और संस्कृत के 4 प्रश्न डिलीट होना राजस्थान के लाखों युवाओं के भविष्य और उनकी मेहनत के साथ एक क्रूर मजाक है।
विशेषज्ञों की योग्यता पर तमाचा: जो बोर्ड पूरे पाठ्यक्रम से 150 त्रुटिहीन सवाल भी तैयार नहीं कर सकता, उसकी विश्वसनीयता शून्य है। विज्ञान जैसे सटीक विषय में इतनी बड़ी लापरवाही प्रशासनिक दिवालियेपन को दर्शाती है।
मेधावियों का नुकसान: प्रश्नों के डिलीट होने से अंकभार (Weightage) का गणित बिगड़ जाता है। कठिन और सही हल करने वाले योग्य अभ्यर्थी दौड़ से बाहर हो जाते हैं, जिससे परीक्षा 'योग्यता का पैमाना' न रहकर 'किस्मत का जुआ' बन जाती है।
मानसिक और आर्थिक शोषण: सालों की तपस्या और अभावों में की गई तैयारी को बोर्ड अपनी एक गलती से मटियामेट कर देता है। बाद में आपत्तियों और कोर्ट-कचहरी के नाम पर बेरोजगारों का सिर्फ शोषण होता है।।।
निष्कर्ष: जब तक पेपर बनाने वाले अयोग्य 'विशेषज्ञों' पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सिस्टम की यह घोर नाकामी युवाओं के भविष्य को इसी तरह 'डिलीट' करती रहेगी।।।
सचिन गुर्जर 23 साल की उम्र मे SDM बन गए।
2 साल की जबरदस्त तैयारी से 2 बार Ras एग्जाम क्लियर करके SDM बने।
सचिन गुर्जर का ना तो कोई A प्लान था ना ही B प्लान...ठान लिया की बनना है तो केवल SDM...
2022 मे Graduation कम्प्लीट हुई फिर Ras की तैयारी शुरू की Ras 2023 का एग्जाम क्लियर किया...फिर Ras 2024 का एग्जाम क्लियर करके ऑल राजस्थान मे 216 रैंक,MBC मे 2ND RANK हासिल करके SDM बने।
मेहनत करने वालो के लिए अंसभव कुछ नही होता।
गुरू और शिष्य एक ही तस्वीर मे...
आदरणीय मोदी जी
पेट्रोल डीजल बचाने के जितने भी संदेश जनता के बीच जाने चाहिए थे, वे सारे के सारे जा चुके हैं। आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि अब अपने मंत्रियों को यह बात बता दीजिए। मैं तो कहूंगा कि बाकायदा एक पत्र जारी करके आदेश दे दीजिए कि अब किसी को भी पेट्रोल बचाने का संदेश नहीं देना है। जिनको पेट्रोल बचाना होगा, वे बचाएंगे और जलाना होगा वे जलाएंगे। रेट तो आप वैसे भी बढ़ा ही रहे हैं।
अब देखिए हमारे शिक्षा मंत्री जी रोडवेज की बस में आकर बैठ गए। अब मंत्री जी को यह पता नहीं है कि उनके कितने फोटो खींचे जाएंगे। फोटो खींचने के बाद वे उठने के लिए उद्यत हुए तो उन्हें फिर से बिठा दिया गया। अब आखिर कोई मंत्री, जिसके पास सरकारी फॉर्च्यूनर गाड़ी हो, सरकारी तेल से सरकारी ड्राइवर चलाता हो, वह आखिर रोडवेज में कितनी देर बैठेगा? मीडिया इतना हो गया है कि वह मंत्रियों के धैर्य की परीक्षा लेने पर उतारू हो जाता है।
आखिर हमारे मंत्री क्यों नहीं समझते कि रोडवेज की बस हमारे जैसे लोगों के लिए बनाई गई है। हालांकि हमारे रोडवेज में यात्रा करने से किसी को कोई संदेश नहीं जाता और हम कोई फोटो भी पोस्ट नहीं कर सकते क्योंकि इससे उल्टा संदेश यही जाता है कि भाई आजकल कड़की में चल रहा है। इसलिए लोगों को उनके हाल पर छोड़ दीजिए। आपके मंत्रियों के रोडवेज में आकर बैठने से उल्टा लोग डिस्टर्ब ही होते हैं। रोडवेज की बस तक आने में जो सरकारी पेट्रोल डीजल खर्च होता है वह अलग।
उम्मीद है, आप हमारे मन की बात जरूर समझेंगे और जरूरी कदम उठाएंगे।