@Dev_Baba01@psunionup भाई ये निर्णय धरने से पहले ही लिया जा चुका था धरने की वजह से इसे बाद में लागू किया गया है खुशी तो है लेकिन इससे कुछ भी नहीं होने वाला कम से कम न्यूनतम वेतन नियमानुसार वेतन होना चाहिए
उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लाखों नोकरी देने की बात होती है लेकिन 57000+ पंचायत सहायकों को 6000 और अब 9000 मानदेय दिया जा रहा है रोज़गार देने का यही तरीका है
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
सेवा में,
माननीय राष्ट्रपति महोदया जी
भारत गणराज्य, नई दिल्ली
@rashtrapatibhvn
विषय: गांधी जयंती एवं ग्राम स्वराज की संकल्पना के आलोक में उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों के श्रमसम्मान, पारिश्रमिक एवं सेवा-व्यवस्था के पुनर्मूल्यांकन के संबंध में।
महोदया जी,
उत्तर प्रदेश के लगभग 57,000 पंचायत सहायकों की ओर से आपको सादर प्रणाम।
2 अक्टूबर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर जब संपूर्ण राष्ट्र उनके ‘ग्राम स्वराज’ के आदर्श का स्मरण करता है, तब उन कर्मशील मानव संसाधनों की सामाजिक एवं प्रशासनिक स्थिति पर विमर्श करना भी आवश्यक हो जाता है, जो प्रतिदिन ग्राम्य शासन-व्यवस्था को धरातल पर क्रियान्वित करने में संलग्न हैं।
महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना केवल पंचायत संस्थाओं की स्थापना तक सीमित नहीं थी। उसका मूलाधार ग्रामवासी, ग्राम्य आत्मनिर्भरता, उत्तरदायी स्थानीय शासन तथा उस व्यवस्था को संचालित करने वाले मनुष्य के सम्मान में निहित था।
वर्तमान समय में पंचायत सहायक ग्राम पंचायत की डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न शासकीय पोर्टलों, अभिलेखीय संधारण, ऑनलाइन प्रक्रियाओं तथा ग्रामीण नागरिकों को केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने जैसे विविध दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। डिजिटल शासन के विस्तार के साथ उनके कार्यभार, तकनीकी उत्तरदायित्व एवं प्रशासनिक दायित्वों का निरंतर विस्तार हुआ है।
वस्तुतः ग्राम सचिवालय की डिजिटल एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार आज पंचायत सहायकों के श्रम पर अवलंबित है।
इसके बावजूद पंचायत सहायकों के लिए वर्तमान में ₹9,000 का मानदेय निर्धारित किया गया है। प्रश्न केवल इस राशि की न्यूनता का नहीं, बल्कि उस निर्धारण-प्रक्रिया की वस्तुनिष्ठता एवं तर्कसंगतता का भी है।
जब शासन बाह्यस्रोत कर्मियों के पारिश्रमिक एवं सामाजिक संरक्षण के संबंध में न्यूनतम मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयत्नशील है, तब ग्राम पंचायतों में शासन की प्रत्यक्ष कार्यप्रणाली को संचालित करने वाले पंचायत सहायकों के श्रम का भी उसी न्यायसंगत एवं मानवीय दृष्टिकोण से पुनर्मूल्यांकन अपेक्षित है।
क्या पंचायत सहायकों के वर्तमान पारिश्रमिक के निर्धारण में उनके वास्तविक कार्यभार, तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक उत्तरदायित्व, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, कार्य की प्रकृति तथा ग्राम्य शासन में उनकी अनिवार्य भूमिका का समुचित एवं वैज्ञानिक आकलन किया गया है?
यदि ग्राम पंचायत ग्राम स्वराज की आधारभूत प्रशासनिक इकाई है, तो उस व्यवस्था के दैनिक संचालन में संलग्न मानव संसाधन के श्रम, गरिमा एवं सामाजिक सुरक्षा की उपेक्षा ग्राम स्वराज की मूल भावना के अनुरूप कैसे मानी जा सकती है?
अतः इस गांधी जयंती के पावन अवसर पर विनम्र निवेदन है कि उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों के पारिश्रमिक, कार्यभार, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा-व्यवस्था का स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ एवं तथ्याधारित पुनर्मूल्यांकन कराया जाए तथा उनके वास्तविक दायित्वों के अनुरूप सम्मानजनक पारिश्रमिक एवं स्पष्ट, न्यायोचित तथा सुरक्षित सेवा-व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएं।
गांधी जयंती केवल एक महापुरुष की स्मृति का दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहारिक शासन-दर्शन में परिणत करने का अवसर भी है। ग्राम स्वराज को वास्तविक अर्थ प्रदान करने के लिए आवश्यक है कि गांव के प्रशासन को सुदृढ़ करने वाले प्रत्येक कर्मशील व्यक्ति के श्रम एवं सम्मान को समान महत्व दिया जाए।
पंचायत सहायक किसी विशेष अनुकम्पा अथवा कृपापात्रता की अपेक्षा नहीं करता। उसकी अपेक्षा केवल न्यायोचित मूल्यांकन, श्रम की गरिमा और उत्तरदायित्व के अनुरूप पारिश्रमिक की है।
गांव सशक्त हो, तो ग्रामकर्मी का सम्मान भी सशक्त हो।
ग्राम स्वराज सुदृढ़ हो, तो ग्राम प्रशासन के श्रमिक का जीवन भी सुरक्षित हो।
और शासन जनोन्मुख हो, तो शासन की अंतिम पंक्ति में कार्यरत व्यक्ति का श्रम भी गरिमापूर्ण हो।
सादर।
भवदीय
पंचायत सहायक
उत्तर प्रदेश
@narendramodi@AmitShah@mopr_goi@spsinghbaghelpr@CLCMOLE@myogiadityanath
#ग्राम_स्वराज_का_सिपाही_पं०सहायक
पंचायत सहायक सिर्फ एक पद नहीं, ग्राम पंचायत की जमीनी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
गांव के डिजिटल कार्यों से लेकर जनकल्याणकारी योजनाओं तक, पंचायत सहायक लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
अब जरूरत है सम्मानजनक मानदेय, समय पर भुगतान और स्थायी सेवा व्यवस्था की।
काम के अनुरूप सम्मान और भविष्य की सुरक्षा—पंचायत सहायकों का अधिकार। 🇮🇳
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@theomendrapal
🔥 साथियों लड़ाई अब और तेज करनी है!
*₹9,000 की वृद्धि आधिकारिक रूप से लागू हो चुकी है। अब हमारी लड़ाई यहीं रुकने वाली नहीं है।*
*हमारा अगला स्पष्ट लक्ष्य है*
*DBT के माध्यम से न्यूनतम ₹18,000 मानदेय और धरने में सहमत हुई अन्य सभी मांगों का शीघ्र आदेश।*
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₹9,000 को अंतिम नहीं, *अगली लड़ाई की शुरुआत मानो।*
*लक्ष्य न्यूनतम ₹18,000 + अन्य सभी सहमत मांगों का क्रियान्वयन।*
*लड़ाई शांत नहीं, संगठित और धारदार होनी चाहिए।*
*57,000 पंचायत सहायकों की एकजुट आवाज़ ही हमारी ताकत है। ❤️*
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*पंचायत सहायक कल्याण समिति उत्तर प्रदेश*
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पंचायत सहायक के काम देखो -
Panchayati Raj, eGramSwaraj, Ayushman, Kisan Panjikaran, Geo-Tag, SIR Duty,Awas Survey, Gram Sabha...
29 विभाग का काम, और मानदेय सिर्फ ₹9000?
शौचालय देखभाल का भी ₹9000, हमारा भी ₹9000 कहाँ का न्याय है
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