यह ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट है। गंगा किनारे साधु, संत, श्रद्धालु, यात्री सभी एक पांत बिछाना लिये हवा के ठंडे झोंकों में सोये हुए हैं। इन्हीं के बीच एक शख्स ऐसा है, जिसे आप भी पहचान जाएंगे। पहचानिये कौन?
इश्क़ हर लम्हा हाथ थामे चलने का नाम नहीं,
इश्क़ तो भीड़ में भी एक-दूसरे को
महसूस कर लेने का नाम है।
ये साथ बैठकर बातें करने की मोहताजगी नहीं,
ये तो ख़ामोशी में भी एक-दूसरे की
साँसें सुन लेने का नाम है।✨❣️
#રાધાસ્વરા#बज़्म
"लो प्राण डालो इसमें जल्दी..(बाबा हाथों से पंप जैसी मुद्रा बनाकर प्राण डालने का नाटक करता है) मुर्दा लेकर आये थे. इसके प्राण उड़ रहे थे ऊपर. वह चिपक गये, वो जाने और महाकाली. अब इसके प्राण पूरे भर चुके है, जा चुके थे."
कानपुर के "बोतल बाबा उर्फ हरिओम यादव" ने इस तरह एक बच्चे के शरीर में प्राण डालने का प्रहसन किया. बोतल बाबा पर एक महिला ने रेप अटेम्प्ट और 40 हजार रूपये ठगने के आरोप लगाये है. बाबा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है.
कालनेमियों की पहचान और उनका उचित उपचार सनातन संस्कृति के लिए अपरिहार्य है!!
विवादित आशुतोष महाराज का शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया गया एक और आरोप झूठा निकला। रीवा एक्सप्रेस में कथित हमले की जीआरपी ने गुरुवार को फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों को क्लीन चिट मिल गई है।बताते चलें कि आशुतोष महाराज पर २१ मुकदमे दर्ज हैं, हिस्ट्रीशीट सं ७६ ए है।.
यह खेल बहुत खतरनाक है। हर तरफ धड़ाधड़ एनकाउंटर हो रहे हैं। हर अपराध के लिए एनकाउंटर की मांग होती है। पुलिस जनता की मांग पर एनकाउंटर कर रही है। यह कैसे पता चले कि जो मारा गया, वह अपराधी था ही?
इसी देश में हफ्ते दो हफ्ते केस फाइनल करके सजा सुनाने का भी रिकॉर्ड है। जो सच में अपराधी हैं, जो फांसी के काबिल हैं, क्या उन्हें अदालत के रास्ते सजा नहीं दी जा सकती?
जब न्याय व्यवस्था जनता का ध्रुवीकरण करने के लिए इस्तेमाल होने लगे तो उसके परिणाम यही होते हैं। वे भी मारे जाते हैं, जो पुलिस के मुताबिक मानसिक विक्षिप्त हैं।
जो ब्राह्मण हैंडल इसे जाति का मुद्दा बना रहे हैं , वो कृपया मृतक को बख्श दें। उसकी पहचान , उसके अपने गांव के बेहतरी के लिया लड़ना है। वह उसके लिए लड़ते हुए मरा है।
उसका कुछ भला चाहते हैं , बिहार के असभ्य पुलिस फोर्स के लिए सरकार की जवाबदेही पर प्रश्न करें। बाढ़ और उसकी विभीषिका प्रभावित हजारों जमानिया गाँव की आवाज बने।
सरकार अगर प्रो ऐक्टिव नहीं दिखती है तो
@RJDforIndia और @jansuraajonline इन दो मुद्दों को लेकर जमनियाँ में आंदोलन करें।
जमनिया गाँव बिहार चुनाव से पहले डूब रहा था। हर रोज़ कुछ घर नदी में समा रहे थे, मगर वहाँ कोई मीडिया नहीं थी, न गोदी मीडिया, न ही टोपी वाली मीडिया। जमनिया कोई चंबल का बीहड़ नहीं है और न ही बस्तर का अबूझमाड़, जहाँ पहुँचना दुरूह हो। पर मीडिया करे भी क्या? वह कितने जमनिया तक पहुँच सकती है? अंतर्राष्ट्रीय मजदूर सप्लाई प्रदेश बिहार में ऐसे हजारों जमनिया हैं, जो किसी मानसिक विक्षिप्त का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि उनकी बातें सुनी जाएँ।
जमनिया का भरत तिवारी अपने गाँव के लिए क्रांतिकारी बनना चाहता था। वह क्रांतिकारी की मौत भी पा गया और जमनिया को उसके जैसे हजारों अनाथ जमनिया से अलग भी कर गया। पर क्या मुख्यमंत्री, बिहार ऐसे हजारों मानसिक विक्षिप्तों को झेल पाएँगे?
कहीं पढ़ा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देखा, एक पागल उनकी पुलिस पर बंदूक तान रहा है। ऐसा उनके राज में कैसे हो सकता है? उनका खून खौल गया और शाम तक खबर आ गई कि उस मानसिक विक्षिप्त को मार दिया गया।
पर क्या मुख्यमंत्री का खून कभी बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण के 4,415 करोड़ रुपये, जिसमें से अकेले बाढ़ जोखिम कम करने के लिए 1,525 करोड़ रुपये का बजट है, बाढ़ नियंत्रण कार्ययोजना जिसका बजट 398 करोड़ है, तथा नदी तटबंध और बड़े बाँध निर्माण परियोजना जिसका बजट 2,148 करोड़ रुपये है, इन सबके ठेकेदारों, अभियंताओं और मंत्रियों पर भी खौलता है या नहीं? उनकी “मानसिक विक्षिप्तता” के लिए उनके पास चार पाँच पीतल की गोलियाँ हैं या नहीं? क्या ऐसे विक्षिप्तों से निबटने के लिए मुख्यमंत्री के पास गुदा है?
बेहतर होगा कि मुख्यमंत्री जमनिया जाएँ, अपनी असभ्य और अप्रशिक्षित पुलिस फोर्स के लिए क्षमा माँगें, भरत तिवारी के नाम का स्मारक बनवाएँ, बाढ़ नियंत्रण और तटबंधीकरण की योजना का कार्यान्वयन अपने कार्यकाल के भीतर पूरा करें और पुनः उसे श्रद्धांजलि देने हेतु चार साल बाद वहाँ पहुँचने का संकल्प लें। नीतीश कुमार ने सड़क और बिजली को लेकर अपनी लेगेसी बनाई, वैसा ही बनाने का प्रयास करें।
कोई दूसरा PR आपको बड़ा नहीं बना सकता, जब तक स्वयं बड़ा बनने के लिए आपकी नीयत ईमानदार न हो।
पुलिस द्वारा मारा गया लड़का भरत तिवारी एक एवरेज लड़का था ।
कट्टर भाजपाई था,
मोदी जी और योगी जी का बड़ा वाला भक्त भी था ।
देश को हिंदू राष्ट बनाने का समर्थक भी था ।
जिहादियों से नफरत भी करता था ।
हिंदू राष्ट के समर्थन में बिहार से छतरपुर की पग यात्रा भी किया था ।
हम जैसे भाजपा की पोल खोलने वाले लोगों की यथाशक्ति भर्त्सना भी करता था ।
लेकिन उसकी पूरी वाल देखने के बाद एक बात स्पष्ट है कि उसका नशा भी तब उतरा , जब आग खुद उसके आस पास पहुंच गई ।
जब भाजपा की सरकार बनी तो उसने भी लड्डू बांटा था । लेकिन एक बाढ़ के बाद पूरा घटनाक्रम ,पूरी सोच बदल गई ।
एक गांव जवनिया को दूसरी जगह बसाया गया और वहां पर मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों की आपूर्ति नहीं की गई । यही से वह बागी बनता चला गया । इस दफ्तर से उस दफ्तर तक जाने की उसकी दिनचर्या उसके फेसबुक पेज पर मौजूद है । उसके बाद एसडीम से विवाद और फिर एक्सट्रीम स्टेप उठाना । यह सब उम्मीद के धराशायी होने का परिणाम था ।
जिस भाजपा सरकार के लिए वह दिन रात मेहनत करता था , आज उसी सरकार ने उसको तिरस्कृत कर दिया था ।
उस मूर्ख को नहीं पता था कि उसने अपने हाथों से अपनी मृत्यु का वरण उसी दिन कर लिया था जिस दिन उसने भाजपा से अपने कर्मों के बदले कोई उम्मीद कर ली थी ।
भाजपा कुर्बानी मांगती है । देश प्रेम में स्वार्थ नहीं देखा जाता ।
लेकिन मूर्ख इंसान हर जगह अपना स्वार्थ देख रहा है । देव तुल्य भाजपाई नेताओं पर लांछन लगाने की कोशिश करने लगा है । उसका अंत होना ही है । देशद्रोह की माफी नहीं होती ।
भरत भूषण तिवारी कोई बड़ा अपराधी नहीं थे , हिस्ट्रीशीटर नहीं थे फिर भी इनका एनकाउंटर कर दिया गया। आज उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने ख़ुद उनको मानसिक विक्षिप्त बताया, भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उन्हें 4 गोली मार दी गई……क्यों? आख़िर क्यों?
किसी बाप के बुढ़ापे की लाठी छीन लिए, किसी माँ के जिगर का टुकड़ा उससे अलग कर दिया। किसने हक दिया तुम्हें? कौन हो तुम? भगवान हो?
मीडिया को चुप करा देना, पत्रकारों के मुँह ठूँस देना, लेकिन इस ग़रीब के एनकाउंटर को अब पूरा देश जानेगा।
पूरी मशीनरी लगा दो लेकिन नहीं दबा पाओगे इस केस को। मामला बिहार के भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र का।
भरत तिवारी का वीडियो है जिसमें वह जवानियां गांव के लोगों के लिए आवाज उठा रहा है।बिहार पुलिस ये बताए कि ये कहा से पागल दिख रहा है?पहनावे से पागल दिख रहा है या बोलने की शैली से पागल दिख रहा है?
बिहार पुलिस को बिनाकोई साक्ष्य के किसी को पागलघोषित करके काउंटर करने का अधिकारकिसनेदिया?
भाजपा-आरएसएस को घृणा है हिंदुओं से।
हिंदुओं को सचेत रहना होगा। कृपया हिन्दू-विरोधी गिरोह से बचकर रहें। यदि इन्हें भनक भी लग गयी कि आप आस्तिक हिन्दू हैं तो आपका खेल खत्म।
फिरोजाबाद
➡बैंक ऑफ इंडिया से 96 पैकेट सोना गायब
➡ग्राहकों का करोड़ों को सोना गायब, हड़कंप
➡गोल्ड लोन के बदले गिरवी रखा था सोना
➡तत्कालीन मैनेजर समेत तीन पर FIR दर्ज
➡स्टाफ अधिकारी, मुख्य चाबीधारक गायब था
➡बिना किसी सूचना गायब रहने से काम ठप
➡डुप्लीकेट चाबी से सेफ खोलने पर मचा हड़कंप
➡मैनेजर संदीप, असिस्टेंट मैनेजर दिलीप अरेस्ट
➡सहायक स्टाफ नरेश भी गिरफ्तार किया गया
➡भारौल गांव स्थित बैंक की ब्रांच से सोना गायब
@dm_firozabad@firozabadpolice@BankofIndia_IN@RBI@UPGovt@CMOfficeUP
कभी-कभी मन इतना थक जाता है लोगों की आवाज़ों से, उम्मीदों से, रिश्तों की अनकही मांगों से कि भीतर से एक धीमी-सी पुकार उठती है चलो, कहीं दूर बहुत दूर चला जाए। इतनी दूर कि पहचान भी पीछे छूट जाए। जहाँ मेरा नाम किसी को मालूम न हो, मेरी उपलब्धियाँ किसी को याद न हों, और मेरी असफलताओं पर कोई चर्चा न हो।
बस एक एकांतवास हो…और मैं।
मैं सोचता हूँ, किसी पहाड़ की गोद में एक छोटी-सी झोपड़ी हो, जिसमें मिट्टी की दीवारें, खपरैल की छत, दरवाज़े पर लकड़ी की कुंडी और फिर सुबह सूरज जब पहाड़ियों के पीछे से झाँके तो उसकी पहली किरण सीधे मेरे आँगन में गिरे। हवा में चीड़ और गीली मिट्टी की मिली-जुली खुशबू हो। दूर कहीं कोई नदी चुपचाप बह रही हो, जैसे जीवन अपनी धुन में चलता रहता है, बिना शोर किए।
उस एकांत में कोई मोबाइल न हो, कोई खबरें न हों, कोई बहसें न हों। सिर्फ़ पत्तों की सरसराहट हो, पक्षियों की आवाज़ हो, और कभी-कभी किसी वन्यजीव के चलने की आहट। कोई डर नहीं, बस एक जंगली-सी सच्चाई कि प्रकृति में सब कुछ अपने नियम से चलता है, बिना दिखावे के।
झोपड़ी के बाहर एक छोटा-सा चूल्हा हो, मिट्टी का चूल्हा जिसमें लकड़ियाँ धीरे-धीरे सुलगती रहें। उस जलती लकड़ी की महक, वो धुआँ जो आँखों में हल्की-सी चुभन देता है, पर दिल को अजीब-सी शांति। अपने हाथों से आटा गूँथूं, रोटी बेलूँ, और अंगारों पर उसे सेंकते हुए देखूँ कि कैसे वह फूलती है, जैसे भीतर दबा हुआ कोई सपना आकार ले रहा हो।
साथ में हरी मिर्च, नमक और सिलबट्टे पर पीसी हुई चटनी, बस इतना ही। कोई शाही भोजन नहीं, कोई थाली की सजावट नहीं पर जो स्वाद उस सादगी में होगा, वो शायद शहर के हजारों पकवानों में भी नहीं। क्योंकि उसमें मिलावट नहीं होगी न तेल की, न दिखावे की, न स्वार्थ की। उसमें सिर्फ़ मेरी मेहनत और प्रकृति की देन होगी।
मैं पहाड़ की चोटी पर बैठकर दूर तक फैले आसमान को देखूँ। सोचूँ कि इंसान ने कितनी भी ऊँचाइयाँ छू ली हों, पर असली ऊँचाई तो यही है जहाँ मन हल्का हो जाए। जहाँ कोई तुलना न हो, कोई प्रतिस्पर्धा न हो, सिर्फ़ अस्तित्व हो।
रात को झोपड़ी के बाहर चारपाई डालकर लेट जाऊँ। ऊपर असंख्य तारे हों, जैसे आकाश ने अपनी सारी चुप्पियाँ बिखेर दी हों। हवा में ठंडक हो, और भीतर एक अजीब-सी गर्माहट कि मैं पर्याप्त हूँ। मुझे किसी प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं, किसी ताली की आवश्यकता नहीं।
शायद ये भागना नहीं है, शायद ये तो लौटना है अपने मूल की तरफ़। उस जीवन की तरफ़ जहाँ ज़रूरतें कम थीं और संतोष बड़ा था। जहाँ रोटी और चटनी में भी उत्सव था। जहाँ अकेलापन बोझ नहीं, बल्कि आत्मा का विश्राम था।
कभी-कभी लगता है, अगर सच में ऐसा एकांत मिल जाए, तो मैं खुद को फिर से लिख पाऊँगा। बिना किसी संपादन के, बिना किसी दबाव के, जैसे मिट्टी पर बारिश की पहली बूँद अपनी कहानी खुद लिखती है।
शायद मैं सच में वहाँ चला न जाऊँ, पर ये इच्छा मेरे भीतर एक छोटा-सा पहाड़ बना देती है जहाँ मैं जब चाहूँ, चढ़ सकता हूँ। जहाँ मैं खुद से मिल सकता हूँ।
और सच कहूँ, मुझे बस इतना ही चाहिए। एक झोपड़ी, कुछ पहाड़, जलती लकड़ी की आँच, अपने हाथों की बनी रोटी…और एक शांत मन। बाकी दुनिया अपने शोर के साथ जहाँ है, वहीं रहे। ❤️
राघवेन्द्र चतुर्वेदी ✍️
अयोध्या राम मंदिर में दान पेटिका से चोरी के मामले में जब आवाज उठानी चाहिए तब धर्मनगरी हरिद्वार के बड़े संत घी पीकर सोए रहे।
आज अचानक से निरंजनों अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज पत्रकारों के सामने पड़ गए, फिर भी इस कुकृत्य पर कोई टिप्पणी नहीं बस कह दिया कि यदि ऐसा हुआ है तो प्रधानमंत्री चिंतित होंगे, प्रधानमंत्री कोई बड़ी जांच करेंगे।
स्वामी जी आप भी चिंतित है कि नहीं ?
@JiKailashanand