बेहद प्रभावशाली कविता और उतना ही कमाल का पाठ राजेंद्र जी का। गिरने का महत्व बहुत सुंदर से बताया गया है। इसे सुनने के बाद गिरते रहने की असीम प्रेरणा मिलेगी। जो भी गिर रहे हैं, ज़्यादा गिरने के लिए यह कविता सुनें।
राजेंद्र जी के यू ट्यूब चैनल का लिंक-
https://t.co/F08YBm1faP
महाराष्ट्र में एक महिला पत्रकार पर रिपोर्टिंग के दौरान हमले का वीडियो वायरल, क्या है ये पूरा मामला?
रिपोर्ट: प्राची कुलकर्णी
शूट: नितिन नागरकर
एडिट: निलेश भोसले
मैं तो नौकरी ऐसे ही करूंगी, तबादला करा दो...
2 लाख लेकर शिक्षक सोते रहते हैं यहां पर..
साइन करके घर चले जाते हैं...एक बच्चे को पढ़ाएंगे?
यह वो गंभीर सवाल है जो सीकर के कीरडोली गांव की सरकारी स्कूल की प्रधानाचार्य हेमलता उठा रही है।
पैशन बोलता है!!
युद्ध हमारे और आपके लिए, एक बरियारी का मुद्दा हो सकता है। लेकिन किसी सैनिक के लिए यह बिल्कुल अलग है।
क्योकि हम आप और नेता, जब घर बैठे फौज को जलावन की तरह, चूल्हे में झोंक कर गर्व की आग तापने, और उस पर वोट सेंकने में लगे होते है,
तब उनकी जान दांव पर लगी होती है।
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युद्ध पर गए पायलट की चिंता, सिर्फ उसके फेलो पायलट और सीनियर करते हैं। दिल हलक पर आया हुआ होता है।
और आपके लिए तो साहब, इतने विमान गिरे-कितने गिराए.. इतने मारकर आये- एक खेल का स्कोरबोर्ड है।
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कांग्रेस की तरफ से बोल रही अनुमा आचार्य कांग्रेस प्रवक्ता बहुत बाद में हुई। उससे पहले वे विंग कमांडर अनुमा आचार्य के रूप में जानी जाती रही है।
और भीतर से अब भी वह विंग कमांडर ही हैं। सैनिक का यह पैशन, उसकी चिंता उनकी जुबान से ही नही, पूरी देहभाषा से टपक रहा है।
वो फौजी, जो इधर या उधर के गिरे हुए जहाज की फिक्र नही गिनता। अपने पायलट की सुरक्षा की चिंता पहले करता है। आपको एक सैनिक, एक महिला, एक एक्स वॉरियर (स्टिल वॉरियर) यह वीडियो देखना चाहिए।
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अफवाहें हैं कि 5 जहाज गिरे। कुछ शहादत भी हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्म्ड फोर्सज को चुनावी मसाला बनाकर दुहने के बाद, आज जब असल चैलेंजेस सामने आए हैं, सत्य छिपाया जा रहा है।
सरकार किस तरह के फर्जी क्वेश्चन फ्रेम कराकर, बच निकलना चाहती है, ये वीडियो उसका उदाहरण है। सरकारी प्रवक्ता जब जवाब न दे सके, तो "विंग कमांडर-स्विंग कमांडर" कहकर खिल्ली उड़ाने लगते हैं।
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इन्हें लगता है, सैनिक तो मरने के लिए ही नौकरी करता है। भला उसके मरने बचने की चिंता क्यो?? हमे सत्ता मिली है, तो शतरंज के प्यादों की तरह सैनिक मरते रहे, हमारे राजा पर कोई दाग न लगना चाहिए।
मानक गुप्ता जैसे बेशर्म सूत्रधार, बहस को घुमाने, गलत सन्दर्भ देने, और वजनदार वक्ता की आवाज काटने, समय काटने की तकनीकों से ही सरकार की लाज बचा रहे हैं।
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विंग कमांडर अनुमा आचार्य, कांग्रेस में मौजूद सबसे डीप पैशन से बोलने वाली महिला प्रवक्ता है। उन्हें फॉलो करता रहा हूँ, लेकिन इस बार उन्होंने लिखने को मजबूर कर दिया।
इस देश को सेना की पीड़ा समझने वाले नेताओं की सख्त जरूरत है। आपको शुभकामनाएं @AnumaVidisha मैंम
इसी पैशन से आगे बढ़ते रहें।
🙏❤️
Serving Dignity, One Breakfast at a Time
Before dawn, over 1,500 daily wage labourers—most of them women—arrive at APMC Yeshwanthpur, Bengaluru to sort and grade vegetables that feed the city. Many come on an empty stomach.
To change that, Daksha Samuha Sanghatane, a women-led collective facilitated by CFAR, has launched a free breakfast cart at the APMC Main Gate. 150 workers are now served fresh, rotating meals every morning—Vegetable pulao, Chitranna, Rava idli and more.
“We wake up at 5 AM to reach here by 6. This breakfast cart is a blessing—we feel seen, cared for, and respected,” says Lakshmamma, 52, a vegetable grader with 20 years of service.
This is not charity—it’s solidarity. A step towards ensuring the Right to Food for those who nourish our cities. In Bengaluru’s Peenya, community members like Lakshmamma are invaluable build local resilience—leading change from the ground up.
This is transformation by the community, for the community. With dignity. With determination. Without leaving anyone behind.
@fcscagok
बहादुरी की जिंदा मिसाल लखीमपुर में देखने को मिली है!
लखीमपुर के बबुरी गाँव में एक तेंदुए ने भट्ठे पर काम करने वाले एक मजदूर पर हमला कर दिया था।
ऐसे मौके पर अक्सर लोग दिल छोड़ बैठते हैं मगर उस जिंदा दिल मजदूर ने तेंदुआ के साथ लड़ना मंजूर किया और आखिर में अपनी जिंदगी की लड़ाई उसे जीत गया।
मुझे नहीं मालूम इस मजदूर का क्या नाम है मगर इसकी बहादुर को सलाम है 🫡
अमरेंद्र कुमार सिंह पहलगाम घटना के समय वहीं मौजूद थे। वो लिखते हैं
कल पहलगाम में मारे गए सभी लोगों को विनम्र श्रंद्धाजलि और ईश्वर उनके परिजन को दुख सहने की शक्ति दें💐🙏
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोई"
सुन कर खुशी मिलता है, पर जो बेकसूर लोग मारे गए जिनमें कम से कम 3 घोड़े वाले भी थे उनके लिए बेहद दुःख और गुस्सा भी है। घटना स्थल से सिर्फ 300 से 400 मीटर पर घोड़े पर मोना और हम थे, अचानक गोलियों की तरतराहट और भागते लोग देख तुरंत समझ आ गया और जान प्राण ले कर हमारा भी घोड़ा वाला हमको ले कर भागा। फिर वापस होटल जो पहलगाम में ही था उसमें आ गया। टूर कल से ही शुरू हुआ था और पहले दिन ही ये सब हो गया, फिर आगे का सारा प्रोग्राम छोड़ आज का टिकट ले कर वापस हो रहे हैं, फ्लाइट शाम की है अभी ही एयरपोर्ट आ गया।
आपसे अनुरोध है किसी बहकावे में न आवे , न्यूज में सुना रेकी किया गया था, जब पता था तो होने क्यों दिए, वहां किसी भी सिक्योरिटी फोर्स से एक भी फोर्स की तैनाती नहीं थी। खैर अब तो राजनीति चलती रहेगी कोई बोल रहा है जात नहीं धर्म पूछा आदि आदि। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। जो चले गए उनके लिए बेहद दुःख है ।
ध्यान रखिए हजारों बचाए गए हैं सिर्फ लोकल सपोर्ट के कारण संभव हो पाया है। घोड़ा वाला, गाड़ी वाला और होटल वाला सभी का सपोर्ट शानदार था।
हालांकि गिद्ध लोग मौके के तलाश में रहते हैं, जहां होटल वाला पेमेंट नहीं लिया गाड़ी वाला पैसे नहीं लिया ड्राइवर रो कर जबरदस्ती करने पर टिप्स पकड़ा वहीं श्री नगर से दिल्ली दो टिकट का 38000 पे करना पड़ा।
आतंक फैलाने वाले और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई चलती रहनी चाहिए और इसमें पूरे देश को एकजुट रहना चाहिए।
सावधान रहिएगा
!!राजनीति चालू आहे!!
जो चले गए ईश्वर उनको चरणों में जगह दें, विनम्र श्रंद्धाजलि 💐🙏
घटना से पहले की कुछ तस्वीर
Acting se शासन नहीं चलता, जवाबदेही से चलता है!
15 अप्रैल को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी कुछ Likes के लिए स्कूल प्रशासन को डाँटती हुई एक "रील" बनवाती हैं... और 16 अप्रैल को वही स्कूल प्रशासन उनकी Acting की पोल खोल कर रख देता है.. क्योंकि उन्हें अच्छी तरह पता है, जिसे कार्रवाई करनी है, वह खुद कमीशन खा रहे हैं! जब सरकार खुद हिस्सेदार हो, तो डर किसे लगेगा?
@AnilYadavmedia1 एक महामानव का कहना था कि
वक्फ की संपत्ति में गरीबों को कुछ नहीं
मिला ,इसलिए मुसलमान युवा आज
पंचर बनाने का काम कर रहे है।
अब ये रावत पंचर, साईं पंचर, मौर्या पंचर, यादव पंचर, मिश्रा पंचर, वर्मा पंचर की दुकान
चलाने वाले हिंदू आखिर किस संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं मिलने से पंचर बना
@JaikyYadav16 वीडियो में देख सकते हैं...👇
दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मी बाई कॉलेज की शिक्षिका महोदया के गोबर क्रांति का जवाब छात्रों ने भी गोबर क्रांति से दिया...
मगर छात्रों के क्लासरूम में गोबर पोतने वाली मैडम आज छात्रों के पहुंचते ही गायब मिलीं !
संतोष फिल्म ऑस्कर और बाफ्टा तक के दरवाजे पर पहुंच गई...इस फिल्म को दुनियाभर में तारीफें मिल रही है लेकिन अपने ही देश में क्यों रिलीज नहीं होने दी जा रही❓
ट्रेलर देखि फिल्म का, एक डायलॉग है फिल्म में
"संतोष इस देश में दो तरह के छुआछूत हैं
एक जिन्हें कोई छूना नहीं चाहता
दूसरे वो जिन्हें कोई छू नहीं सकता "
क्या ज़बरदस्त बात...
अब कोई भाई बतावें फिल्म 'संतोष' कैसे देखी जा सकती है? भारत में तो सेंसर बोर्ड ने इसको रिलीज नहीं होने दिया।
यह फिल्म उत्तर भारत के एक काल्पनिक कस्बे की कहानी पर आधारित है जिसमें एक युवा विधवा पुलिस फोर्स जॉइन कर एक दलित लड़की की हत्या की जांच करती है। फिल्म संतोष पुलिस, निचली जाति की महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और इस्लामोफोबिया जैसे मुद्दों को गंभीरता से उजागर करती है।
ब्रिटेन में बसी संध्या सूरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को पिछले कांस फेस्टिवल में सराहा गया और इसे यूनाइटेड किंगडम की तरफ से 2025 ऑस्कर के लिए इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी में नामांकित किया गया। वहां भी यह चर्चा में रही। लेकिन भारत के सेंसर बोर्ड ने इसे यह कहते हुए भारत में रिलीज नहीं होने दिया कि इससे पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है।