This link is for Karen. ❤️
Her Evrysdi (risdiplam) costs $5,100 per bottle.
We’re trying to get her second bottle this week while we work toward securing her main treatment.
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जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के सदर मौलाना अरशद मदनी ने कहा, हैरानी की बात यह है कि कुछ राज्यों में खुलेआम गोमांस बेचा जाता है, लेकिन वहां इसके खिलाफ न कोई विरोध होता है और न ही किसी प्रकार की मॉब लिंचिंग देखने को मिलती है। जबकि जहां मुसलमानों की आबादी है, वहां गा�� के नाम पर खून बहाया जाता है। यह श्रद्धा नहीं, बल्कि दोहरा मापदंड और राजनीतिक खेल है।
मैं सभी देश दुनिया के मुसलमानों से अपील करूंगा कि गाय कुर्बानी ना करें।
जो आप के लिए जानवर है वो किसी के लिए माता है। इसलिए किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ ना करें। खास कर बंगाल के लोग।
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राहुल ने जिस संदर्भ के साथ कहा था की जनता के साथ धोखा संविधान के साथ धोखा उसको बिना समझे जब उन पर आक्रमण होने लगे तो राहुल ने कहा कि मैं माफी नहीं मांगूंगा।
राहुल द्वारा अब तक ���ा सबसे बड़ा हमला गद्दार कहने पर भाजपा गोदी मीडिया भक्त सब एक
एक साथ टूट पड़े हैं।
लेकिन यह भी पहली बार है कि कांग्रेस तत्काल राहुल के साथ मजबूती के साथ खड़ी हो गई है।
मीडिया डिपार्टमेंट के चैयरमेन @Pawankhera वरिष्ठ नेता @gurdeepsappal ने जिस तरह पूरे संदर्भों के साथ राहुल का भाषण पेश किया है अगर वैसा ही कांग्रेस के बाकी नेता भी करने लगें तो भाजपा का राहुल पर ��ह वार उल्टा प्रधानमंत्री मोदी को कटघरे में भी खड़ा कर सकता है।
@dblive15 के लिए आज शाम @RajeevRdb के साथ।
ये क्या हो रहा है!
इजराइल अशदोद बंदरगाह पर गाजा ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं के साथ जानवरों जैसा बर्ताव कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन कहाँ हैं?
गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा दिया जाना चाहिए। देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि आखिर कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है, जिसके का��ण सरकार गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा देने से बच रही है? गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा), बेगुनाह इंसानों की हत्या, नफ़रत की राजनीति और मुसलमानों को बदनाम करने का यह खेल अब बंद होना चाहिए। हमें खुशी होगी यदि गाय को राष्ट्रीय पशु’’ घोषित कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि न किसी इंसान की जान जाए और न धर्म के नाम पर राजनीति हो।
हैरानी की बात यह है कि कुछ राज्यों मे�� खुलेआम गोमांस बेचा जाता है, लेकिन वहां इसके खिलाफ न कोई विरोध होता है और न ही किसी प्रकार की मॉब लिंचिंग देखने को मिलती है। जबकि जहां मुसलमानों की आबादी है, वहां गाय के नाम पर खून बहाया जाता है। यह श्रद्धा नहीं, बल्कि दोहरा मापदंड और राजनीतिक खेल है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि जब देश एक है, तो कानून भी एक होना चाहिए। लेकिन ��ेश में पशु वध से संबंधित कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं। देश में कई ऐसे राज्य हैं, जहां खुलेआम गोमांस खाया जाता है और वहां इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यहां तक कि एक केंद्रीय मंत्री अपने एक इंटरव्यू में यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे बीफ खाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां भी यह सब हो रहा है। और इससे भी अधिक हैरानी की बात यह ���ै कि जो लोग देशभर में गाय के नाम पर भीड़ हिंसा कर इंसानों की जान ले लेते हैं, वे भी इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हैं।
हम तो यह चाहते हैं कि गाय को ‘‘राष्ट्रीय पशु’’ का दर्जा देकर इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए। इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि न्याय की मांग भी ��ही है।
#CowAsNationalAnimal | #JusticeForAll | #MobLynching | #ArshadMadani
चूँकि अरविंद केजरीवाल लाखों करोड़ों के बंगले में रहते हैं, बड़ी कार से चलते हैं
इसीलिए स्वाति जी भाजपा में चली गईं जहाँ मोदी जी झोपड़ी में रहते हैं और तांगे से चलते हैं।
कोई और कहानी सुनाओ स्वाति जी, ये वाली हम सब जानते हैं�� 🙏
सीज़ फ़ायर की घोषणा का स्वागत उन सभी को करना चाहिए जो दसवीं में पढ़ते हैं और संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में भाषण देकर ग्लोबल लीडर बनना चाहते हैं। उन्��ें भी करना चाहिए जिनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं । वोटर लिस्ट से नाम कट तो क्या हुआ, विश्व गुरु बनने का चांस अब भी है। सीज़ फ़ायर का स्वागत उसे भी करना चाहिए जो वोटर लिस्ट ��े फ़्रॉड से चुनाव जीतना चाहता है। सीज़ फ़ायर का स्वागत उन्हें भी करना चाहिए जो 39 दिनों से विदेश यात्रा पर नहीं जा सके। सीज़ फ़ायर का स्वागत उन्हें भी करना चाहिए जो दलाल नहीं हैं। उन्हें भी करना चाहिए जो दलाल भी हैं। यही नहीं सीज़ फ़ायर का स्वागत उन्हें भी करना चाहिए जो वीडियो डिलिट कराने और पेज ब्लॉक करा कर सुपर पावर बनने में लगे है। ट्रंप के भाषणों का अनुवाद हर भाषा में होना चाहिए। कोर्स मे�� होना चाहिए।
इस उच्च स्तरीय ट्वीट पर ध्यान देने के लिए शुक्रिया।
ट्रम्प की धमकियों के मद्देनज़र ईरानी जनता ने अपने पॉवर स्टेशन्स, पुलों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर के इर्द-गिर्द ह्यूमन चेन बनानी शुरू कर दी है।
भयावह खतरे के सामने यहाँ बहादुरी अपने मुल्क के लिए बेइंतिहाँ मुहब्बत से ही आती है।
अमेरिका ईरान ने पाकिस्तान को जो धन्यवाद दिया वह मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
ईरानी सभ्यता को कोई खत्म नहीं कर सकता यह तो सबको विश्वास था।
मगर जिस देश को मनमोहन सिंह सरकार ने आतंकवादी देश के तौर पर स्थापित कर दिया था वह इस ��रह हमारी अक्षम नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय महत्व पा जाएगा यह कुछ समय पहले तक किसी ने नहीं सोचा था।
हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि मोदी देशहित में कोई निर्णय नहीं ले सकते।
उन्होंने इसे डरी हुई नीति का दुष्परिणाम बताते हुए यह भी चेता दिया था कि पाकिस्तान और चीन बड़ा खतरा बन जाएंगे।
और यही हुआ।
पाकिस्तान और चीन दोनों की भूमिका अचानक बढ़ गई और हम जो खुद को विश्��� गुरु कहते थे सिर्फ नेहरू को गालियां देने में लगे रहे और जिस नेहरू ने विश्व नीति में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया था उसे पूरी तरह खो दिया।
पाकिस्तान सीज फायर की घोषणा कर रहा है।
वह पाकिस्तान जो कभी इंदिरा गांधी से सीज फायर की भीख मांग रहा था।
1971 में।
मगर नेहरू और इंदिरा गांधी का विश्व में ऊंचा कद हमारे ही देश के नेताओं को पसंद नहीं आया।
उनका कद कम करने के चक्कर में यह लोग देश का कद कम करने की कोशिशों तक आ गए।
अपनी असफलता को छुपाने के लिए और नेहरू इन्दिरा को गालियां देंगे।
गोदी मीडिया खूब उसे दिखाएगा।
पता नहीं देश को और कहां ले जाना चाहते हैं?