चंपत राय की एक अलग दुनिया थी। जैसे कोई राजा टाइप। उनकी अपनी सेना थी जिसे निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स कहते हैं। एक करोड़ रुपया महीना और सालाना 12 करोड़ निजी सेक्यूरिटी गार्ड्स को दिए जा रहे थे वो भी नंबर एक से और अकाउंट से। ये सेक्युरिटी गार्ड्स लूट के मॉल के रूट पर तैनात रहते थे। ये चढ़ावा चोरी का मामला आपको जितना सरल लगता है वो बेहद पेचीदा और साजिशों से भरा हुआ है। बहुत ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग की तरह इसे ऑपरेट किया जा रहा था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब 400 निजी सुरक्षाकर्मी रडार पर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा अब और बड़ा होता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, CCTV फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद मंदिर परिसर में इतनी बड़ी संख्या में निजी गार्ड क्यों लगाए गए थे?
सूत्रों का दावा है कि जिस निजी सुरक्षा कंपनी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, वह RSS से जुड़े बिहार के एक पदाधिकारी से संबंधित बताई जाती है, जो पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। इसी कंपनी पर ट्रस्ट हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये खर्च करता था। यानी सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च हो रहे थे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि चढ़ावे के आवागमन के दौरान नियमों का पालन हुआ या कुछ लोगों को बिना जांच के आने-जाने की छूट दी गई। सवाल यह भी है कि अगर दान-पात्र, गिनती कक्ष और चढ़ावा रूट पर निजी सुरक्षा तैनात थी, तो चोरी और गड़बड़ी कैसे होती रही?
अब जांच सिर्फ गिनती कक्ष तक सीमित नहीं है। बैंक नियमों के उल्लंघन, ट्रस्ट की निगरानी, निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका और करोड़ों के सुरक्षा खर्च तक सवालों के घेरे में हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में हर दिन नया खुलासा हो रहा है, और जांच अब छोटे कर्मचारियों से आगे बढ़कर पूरे सुरक्षा और प्रबंधन सिस्टम की तरफ जाती दिख रही है।
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