आज का दिन मेरे लिए विशेष है, एक ओर विश्व श्रमिक दिवस है और दूसरी ओर मेरे विवाह की 40वीं वर्षगांठ।
इस पावन अवसर की शुरुआत मैंने अपनी जीवनसंगिनी प्रीति के साथ केदारनाथ धाम में भगवान महादेव के दर्शन और आशीर्वाद से की।
चार दशकों की इस यात्रा में, प्रीति का साथ मेरे लिए केवल जीवन का संबल नहीं, बल्कि हर चुनौती में एक शांत शक्ति और हर सफलता में एक विनम्र आधार रहा है, इसके लिए मैं हृदय से उनका आभारी हूँ।
हमने महादेव से प्रार्थना की कि वह हमारे देश को निरंतर प्रगति, समृद्धि और शक्ति प्रदान करें, और हम सभी को राष्ट्र निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान देने की प्रेरणा दें।
आज, विश्व श्रमिक दिवस के अवसर पर, मैं अदाणी परिवार के अपने 4 लाख से अधिक साथियों से जुड़ने के लिए एक नई पहल, ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ की शुरुआत कर रहा हूँ।
यह मेरे लिए केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि अदाणी परिवार में सभी से दिल से जुड़ने का एक प्रयास है।
इस पहल के माध्यम से, मैं समय-समय पर अपने विचार, अपने अनुभव और अपनी सीख साझा करूँगा और उतनी ही विनम्रता से सीखने का प्रयास भी करूँगा।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब अदाणी परिवार के लाखों सदस्य एक-दूसरे के सहयोगी बनकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जुड़ेंगे, तब हम सिर्फ परियोजनाएँ ही नहीं बनाएँगे, बल्कि विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में अपना विनम्र योगदान भी दे सकेंगे।
आप सभी का विश्वास और साथ ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।
जय श्रमशक्ति, जय राष्ट्रशक्ति।
🙏
ये बच्चा अपने खेल में फिजिक्स का बहुत ही खुबसुरत उपयोग कर रहा है।👇
क्यूं न हम खेल भी ऐसा खेलें, जिस मे दिमाग का भरपूर इस्तेमाल हो, या बॉडी की अच्छी वार्जिश हो।✨💫
पांडुलिपियों, भोजपत्रों, ताम्रपत्रों, शिलालेखों और अभिलेखों में संकलित भारत के ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान को नई पीढ़ी के सामने लाने के लिए मोदी जी के दूरदर्शी विजन से शुरू हुए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का नई दिल्ली में आयोजन बहुत ही हर्ष का विषय है। यह आयोजन विश्व की समृद्ध ज्ञान परम्पराओं के विद्वानों, शोधार्थियों और युवाओं को साझा मंच प्रदान कर रहा है।
₹483 करोड़ की लागत से देशभर की 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, डॉक्यूमेंटेशन और विश्लेषण से ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ समूचे विश्व को फिर से भारत की अकल्पनीय ज्ञान विरासत से जोड़ने वाला है।
अफगानिस्तान में 50+ आयु के तालिबानियों ने किया।
पाकिस्तान में इमरान के 40+ आयु के समर्थकों ने किया।
श्रीलंका में 30+ आयु के युवकों ने किया।
बांग्लादेश में 20+ आयु के कॉलेज वाले विद्यार्थियों ने किया।
नेपाल में 15+ आयु के हाय-स्कूल के छात्रों ने किया।
भारत में 12+ आयु के मिडिल स्कूल वाले क्रांति करेंगे।
दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित है एक बहुत ही सुंदर जैन तीर्थ, जहां विराजमान हैं भूगर्भ से प्राप्त भगवान महावीर की 1200 वर्ष प्राचीन प्रतिमाजी। दिल्ली ncr में रहने वाले श्रद्धालु एक बार यहां अवश्य दर्शन को आए🙏🏻💕✨
Shri Manshapurna Mahaveer Kshetra, Gangnahar, Didoli, UP
पनीर खाना छोड़ दीजिए, नहीं तो म₹ जाएंगे
ये गोरखपुर का मोहम्मद खालिद है, 25 लीटर दूध से 400 Kg पनीर बनाकर प्रतिदिन के 1 लाख 40 बाजार और महीने के मोटा माटी 42 लाख कमाता था
शाणा इतना कि अपनी फैक्ट्री में बना पनीर खुद नहीं खाता था बल्कि गोरखपुर में ही कई जगह आम जनता को सप्लाई कर रहा था
इस केमिकल से बने पनीर से कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ होती है
अब खाद्य विभाग के छापे में खालिद की फैक्ट्री पकड़ी गई
इस तरह की देश में हज़ारों पनीर की फैक्ट्रीयां है जिन्हें खालिद जैसे टोपीबाज चला रहे हैं
Sir, you r forced to write your words in English in order to make it understandable for a larger audience, How can one expect a banker to learn the local language instantly ???? Customer services weren't affected there as there were local staff presented to assist customers ..
प्रेस वक्तव्य
“जैन गर्ल्स हॉस्टल” के नाम से एडिटेड फोटो वायरल — यह कोई मज़ाक नहीं, जैन समाज की गरिमा पर साइबर हमला है: दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए
रायपुर, छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जैन समाज की आस्था, परंपरा और धार्मिक मूल्यों को चोट पहुँचाने वाला एक अत्यंत गम्भीर मामला सामने आया है। पचपेड़ी नाका स्थित “जैन गर्ल्स हॉस्टल” के पास लगे एक सामान्य बोर्ड की तस्वीर को एडिट कर उसमें ‘Non Veg Available’ जैसे आपत्तिजनक और झूठे शब्द जोड़कर सोशल मीडिया पर जानबूझकर वायरल किया गया। यह कृत्य न केवल निंदनीय है, बल्कि सुनियोजित सामाजिक और धार्मिक विद्वेष फैलाने का प्रयास है।
वास्तविकता क्या है?
यह स्पष्ट किया जाता है कि जिस बोर्ड की फोटो वायरल की गई है, वह हॉस्टल के पास तो लगा है, पर उसमें मांसाहार का कोई उल्लेख नहीं था। किसी शरारती तत्व ने उस बोर्ड की तस्वीर को डिजिटली एडिट कर, जैन समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने और हॉस्टल संचालक श्री नरेंद्र जी दुग्गड़ की छवि धूमिल करने की कोशिश की है।
प्रवीण प्रकाशचंद सिंघी जी से हुई वार्ता:
इस विषय में मेरी श्री प्रवीण प्रकाशचंद सिंघी जी से भी विस्तृत वार्ता हुई, जिन्होंने पूरी घटना की पृष्ठभूमि और तथ्य हमें बताए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह एक पूर्व-नियोजित षड्यंत्र है और इसका उद्देश्य केवल श्री दुग्गड़ जी नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जैन समाज को अपमानित करना है।
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छत्तीसगढ़ सरकार एवं प्रशासन से माँग:
मैं, नितिन जैन (संयोजक, श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल), छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री, रायपुर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम शाखा से निम्नलिखित कठोर एवं त्वरित कार्रवाई की माँग करता हूँ:
1. फोटो को एडिट कर फैलाने वाले अपराधियों की तुरंत पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाए।
2. पूरे मामले की डिजिटल फोरेंसिक, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से निर्दोषों को न्याय और दोषियों को दंड मिले, यह सुनिश्चित किया जाए।
3. जैन समाज के स्थलों की सुरक्षा, निगरानी और धार्मिक प्रतिष्ठानों के मान-सम्मान की रक्षा हेतु स्थायी तंत्र विकसित किया जाए।
4. इस कृत्य को आईटी एक्ट, IPC की धारा 295A (धार्मिक भावना भड़काना), 469 (झूठा दस्तावेज़ बनाना), 500 (मानहानि) और अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत दर्ज कर उदाहरणात्मक सज़ा दी जाए।
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जैन समाज की चेतावनी और एकजुटता का आह्वान:
हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि जैन समाज शांतिप्रिय अवश्य है, लेकिन अपनी आस्था, मर्यादा और संस्कृति पर हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। यह घटना केवल एक फोटो का मामला नहीं, बल्कि जैन धर्म की पवित्रता पर सुनियोजित हमला है।
मैं समस्त भारतवर्ष के जैन समाज, विशेषकर युवा वर्ग से आह्वान करता हूँ कि:
• सोशल मीडिया पर #JainSamajKiGarima, #JusticeForJainHostel जैसे हैशटैग के साथ इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएँ।
• संबंधित अधिकारियों को ईमेल, ज्ञापन और अन्य विधिक साधनों द्वारा दबाव बनाएँ।
• श्री नरेंद्र जी दुग्गड़ के साथ हर मोर्चे पर खड़े रहें और इस अन्याय के विरुद्ध संगठित विरोध दर्ज कराएँ।
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यह अपराध यदि आज अनदेखा किया गया, तो कल यह चलन बन जाएगा — और अगला निशाना कोई भी धार्मिक संस्थान बन सकता है।
श्री दुग्गड़ जी ने इस विषय में साइबर थाने में विधिवत शिकायत दर्ज कराई है। अब जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह समाज में विश्वास बहाल करे और दोषियों को न्याय के कठघरे में खड़ा करे।
सम्पर्क:
नितिन जैन
संयोजक, श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल
मो.: 9215635871
तुम लोग बीजेपी को बर्बाद कर दोगे …
तुम लोग मोदी के नाम पर चुनाव जीत तो जाते हो किंतु देश को भाषा के नाम पर लड़ाने वालों का साथ दे रहे हो ,
अंग्रेज़ी भी यहाँ की भाषा नहीं है ।
शर्मनाक शर्मनाक …
इस आदमी पर अगर कर्नाटका में बीजेपी दाव खेलने का सोच रही है तो मैं बता दूँ फिर चुनाव हारोगे ।
Year 1970 – Give your college seats
Year 1990 – Give your government jobs
Year 2025 – Give your private jobs
Year 2035 – Give your land and wealth
Year 2045 – Give your daughters
Year 2055 - Leave this country
Silence often leads to your end !
ड्राइवर ने कहा उसके पास सारे कागज हैं, बस ड्राइवर की आवाज SDM राकेश कुमार साहब को चुभ गई और जड़ दिए थप्पड़ !
क्या लोकतंत्र में गरीबों की इज़्ज़त इतनी सस्ती हो गई है !!
🎥 बिहार के बक्सर का है ।
I knew @RahulGandhi was mentally slow but never expected him to be totally dumb. DGMO of @adgpi mentioned that post strikes on terrorist camps they LEFT A MESSSGE on hot line of hitting terrorist camps, not army. At least check before you @INCIndia bots display your ignorance
Jai Bhim was inspired by true events. You know what they did? They replaced the villain who is a Christian with a Hindu.
Tell me this ain’t propaganda!
क्या आज के भारत में एक सामान्य वर्ग का हिंदू पुरुष होना सबसे बड़ा अपराध बन गया है?
हर मनुष्य की जान की क़ीमत बराबर होनी चाहिए !!
प्रयागराज के एक कॉन्वेंट स्कूल में नर्सरी के मासूम छात्र शिवाय जायसवाल को दो शिक्षिकाओं ने सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि वह रो रहा था। जी हां, रो रहा था।
उसे थप्पड़ मारे गए, डंडों से पीटा गया, गला दबाया गया, पानी तक नहीं दिया गया, और अंत में उसके गुप्तांगों पर डंडे मारकर उसकी जान ले ली गई।
चश्मदीद उसका बड़ा भाई है, जिसने सबकुछ अपनी आंखों से देखा। फिर भी FIR में लिखा गया – “अज्ञात शिक्षिकाएं”।
क्यों?
क्योंकि वे महिलाएं थीं?
क्या भारत में महिला होना अब न्याय से ऊपर हो गया है?
कोई गिरफ्तारी नहीं। कोई पूछताछ नहीं। कोई टीवी डिबेट नहीं। कोई आंदोलन नहीं।
क्योंकि मरने वाला बच्चा सिर्फ एक सामान्य वर्ग का हिंदू male था – और इस देश में अब उसकी जान की कोई कीमत नहीं बची है।
जहाँ कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों की गोलियों का सामना करते हुए जब २६ पुरुष वीरगति को प्राप्त होते है, तब उनसे अधिक उनकी पत्नियों को सम्मान मिलता है, जिनकी जान उनके महिला होने की वजह से बच गई और उनके पति एक हिंदू पुरुष होने की वजह से मारे गए.
जब हाल के भारत-पाक कॉन्फ्लिक्ट में हमारे पुरुष जवान वीरगति को प्राप्त होते हैं, तब दिल्ली में बैठी दो महिला अफसरों को ऑपरेशन का सारा श्रेय दे दिया जाता है – सिर्फ इसलिए कि वे महिलाएं हैं और ब्रीफिंग पढ़ने का काम कर रही थीं ?
तो क्या सामान्य हिंदू पुरुष होना अब सबसे बड़ा पाप है?
शिवाय के साथ जो हुआ, वह सिर्फ हत्या नहीं, यह भारत की न्याय व्यवस्था, मीडिया और समाज के पाखंड की शवयात्रा है।
अगर यही बच्चा किसी और वर्ग से होता, अगर पीड़ित की जगह कोई महिला होती – तो आज इंडिया गेट पर मोमबत्तियाँ जल रही होतीं, मंत्री बयान दे रहे होते, गिरफ्तारियां हो चुकी होतीं।
लेकिन आज – एक सामान्य वर्ग के हिंदू बालक की मौत पर पूरा तंत्र मौन है।
शिवाय का कसूर क्या था?
कि वह हिंदू था?
कि वह पुरुष था?
कि वह सामान्य वर्ग से था ?
या सिर्फ ये कि वह न्याय के लिए “अनारक्षित” था?
अब नहीं।
अब ये मौन नहीं चलेगा।
अब ये एकतरफा कानून नहीं चलेगा।
अब पुरुषों के अधिकारों की भी बात होनी चाहिए ।
अब सामान्य वर्ग के हिंदू पुरुष की जान की कीमत भी तय होनी चाहिए जैसे अन्य सभी की होती है।
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