उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र स्थित अडींग गांव में एक शिव मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक दलित युवक और उसके साथी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि मंदिर संचालक और उसके साथियों ने उन पर 'मंदिर को अछूत' करने का आरोप लगाया। उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं और लाठी-डंडों से बर्बरतापूर्वक पीटा गया। सूचना के मुताबिक पीड़ितों का कहना है कि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद मामला दर्ज नहीं हो रहा है।
स्रोतः दैनिक भास्कर
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 160 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है और सैकड़ों लापता हैं। मानसरोवर यात्रा के लिए निकले तकरीबन 400 भारतीयों के भी लापता होने की खबर।
#nepal
गंगा एक्सप्रेसवे में उन्नाव के पास आई बड़ी दरारें। 36 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ था।
कौन है इसका जिम्मेदार?
#gangaexpressway
दिल्ली मे मिथुन वाल्मीकि पिछले 3 दिनों से नाले में गिर गया है, अभी तक मिला नहीं है। मासूम बच्चे के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
@DelhiPolice और @CMODelhi से अपील है कि युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाकर मिथुन को जल्द से जल्द तलाशा जाए।
आप सभी से अपील है कि इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि प्रशासन तक आवाज़ पहुंचे और मासूम बच्चे की तलाश तेज हो।
@BhimArmyChief@gupta_rekha@LtGovDelhi
#MithunValmiki #Missing #Rescue
दुनिया भर में प्रख्यात समाजशास्त्री एवं जेएनयू के स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस के डीन प्रो. विवेक कुमार की चर्चित पुस्तक “Dalit Studies and Dalit Movements in India” का दक्षिण एशिया संस्करण प्रकाशित हो गया है। यह भारत में ₹1100/ में उपलब्ध है। अमेजन पर लन्दन/अमरीकी संस्करण का मूल्य ₹22000/ था।
#jnu #vivekkumar
@VivekkumarProf
आरक्षण पर भाजपा बेनकाब, आरक्षण विरोधियों को सतीश प्रकाश का करारा जवाब | ... https://t.co/fl4B7gEtjg via @YouTube
“जब 40 करोड़ लोग एक साथ 'जय भीम' बोलेंगे तो कान बहरे हो जाएँगे” आरक्षण विरोधियों को सतीश प्रकाश का करारा जवाब
#reservation#caste#ashokdas#satishprakash@ashokdasDDastak
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
आरक्षण विरोधी आंदोलन को आरक्षण सुधार आंदोलन बताते हुए यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को देखिए। क्या सिर्फ जिले का नाम सतगुरु रविदास जी के नाम पर रखने के कारण इनकी सरकार को दलितों का हितैषी मान लेना चाहिए??
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे श्री हर्ष दुबे जी के साथ आज लखनऊ में पत्रकार वार्ता कर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की मांगों एवं उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि आगामी दो दिनों में उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा तथा संबंधित केंद्रीय मंत्री जी से उनकी भेंट भी सुनिश्चित कराई जाएगी।
@BJP4India@BJP4UP
“पानी नहीं मूत पिलाएँगे”. दलितों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले और उनको सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने वाले इस जातिवादी को देखिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट से कहना है की ये किसी कमरे के अंदर नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से कहीं गई बात है। @DelhiPolice
आज डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जयपुर में।
राजस्थान के नागौर के डांगावास हत्याकांड में वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त 2026 को आए फैसले ने पीड़ित परिवारों को बेहद आहत किया है। उनका सवाल है कि यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय न मिलना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पुलिस की यह कार्रवाई हमारी आवाज़ नहीं रोक सकती। हम डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाकर रहेंगे। न्याय की यह लड़ाई आख़िरी दम तक जारी रहेगी।