राजपूत संस्कृति में जौहर को कायरता नहीं, बल्कि अभय राजपूत जौहर माना जाता था। यह सम्मान (मर्यादा) की रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक था। दुश्मन के हाथों जीवित बचना अपमान से भी बड़ा माना जाता था, इसलिए आग को चुना गया।
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1971 में ओडिशा में आए चंक्रवात से लेकर भोपाल की गैस त्रासदी तक, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से लेकर गुजरात के भूकंप, सुनामी की प्रलय, उत्तराखंड की बाढ़ और कारगिल युद्ध के घायलों की सेवा तक - संघ ने राहत और बचाव का काम किया है
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विध्वंस की बजाय निर्माण के भाव से ओतप्रोत दुनिया का सबसे बड़ा और रचनात्मक मज़दूर संगठन भारतीय मजदूर संघ, संघ के स्वयंसेवकों ने खड़ा किया ।
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पाकिस्तानी आक्रमण पर, भारतीय सेना को सीमा पर भेजने के लिए,संघ के 200 स्वयंसेवकों ने कुदाल और फावड़े लेकर रातों-रात हवाई अड्डे पर जमीं बर्फ साफ कर दी थी।
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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश,कई सेना अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के मूर्धन्य लोगों ने संघ के विविध कार्यक्रमों में भाग लिया और उन्होंने हमेशा संघ का समर्थन करते हुए संघ को एक देशभक्त और सेवाभावी संगठन बताते हुए सराहना की है।
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@JaikyYadav16 पप्पू मुत्र धारक तुम भी लग रहें हों..!!
वो तुम्हें गोदी मीडिया लग रहा है भाई।
ऐसा मुत्र पीना बंद करों। बाकी 4 जून के बाद 2-4 दिन तो नींद नहीं आएगी।