डीप डाइव के इस एपिसोड में होस्ट रोहित सावल ने बीजेपी सांसद और भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी का इंटरव्यू लिया. मनोज तिवारी 2014 से नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से सांसद हैं. उन्होंने 2009 लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोरखपुर से लड़ा था, लेकिन योगी आदित्यनाथ से हार गए. इसके बाद 2014 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन की और लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.
देखिए पूरा एपिसोड: https://t.co/Pvwt8yYeBM
#zingabad
@ManojTiwariMP@SavalRohit
सीकर को एक ढंग के ट्रूथ सीकर की ज़रूरत है. वर्ना कोई मतलब नहीं निकलेगा. दिक्कत क्या है, महेश्वर पेरी इशारा कर चुके हैं. बाकी अगर आप एक अंदाज़ा चाहते हैं कि सीकर जगह क्या है और उसका नीट की तैयारी से नाता क्या है, तो आप @somshekharsom की ये रिपोर्ट देखिए.
https://t.co/aJvt4NRMYM
actor @ayushmannk, @Rakulpreet और @iWamiqaGabbi ने zingabad को दिए fun interview में film pati patni aur woh do से जुड़े मजेदार bts किस्से शेयर किए
set के funny किस्सों से लेकर 'zing or fling' game तक, interview रहा full entertaining!
देखिए पूरा interview: https://t.co/NvgRkCSlUp
#patipatniaurwohdo
भोजपुरी फ़िल्मों में महिलाओं के objectification और पवन सिंह, रवि किशन की तारीफ़ में क्या बोलीं अक्षरा सिंह.
देखिए पूरा इंटरव्यू आज दोपहर 2 बजे, ज़िंगाबाद यूट्यूब चैनल पर.
@SavalRohit@AKSHARASINGH1
वेस्टर्न सेक्युलरिज्म कहता है: रिलिजन को पब्लिक स्पेसेस से बिल्कुल बाहर रखो. लेकिन इंडिया का कॉन्स्टिट्यूशनल मॉडल (आर्टिकल्स 14 और 25 के अंडर) सभी फेथ्स के इक्वल ट्रीटमेंट के बारे में है, ना कि फेथ को पब्लिक लाइफ से मिटाने के बारे में. अगर तुम हिजाब अलाउ करते हो, तो लॉजिकली तुम बिंदी बैन नहीं कर सकते. ये सेक्युलरिज्म नहीं है, ये डिस्क्रिमिनेशन है.
पूरी स्टोरी जल्दी ही हमारे यू ट्यूब चैनल पर.
कविता, राजनीति और ज़िंदगी के अनकहे किस्से!
deepdive के इस एपिसोड में देखिए @DrKumarVishwas का एक अलग अंदाज़.
पूरा वीडियो देखें: https://t.co/nsfmojyQrY @SavalRohit
क्या उत्तर प्रदेश का चुनाव फंसा हुआ है? ज़िंगाबाद के साथ हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में क्या बोले कुमार विश्वास. देखिए पूरा एपिसोड आज शाम 5 बजे ज़िंगाबाद पर.
@DrKumarVishwas@SavalRohit
इन चोरों को जेल नहीं, सीधे 'होम सिक्योरिटी कंसल्टेंट' की जॉब मिलनी चाहिए. इतना प्रोफेशनल डेडिकेशन कि चोरी के बाद फीडबैक भी दे रहे हैं!
इंसिडेंट बनारस का है. चालीस लाख की चोरी हुई. दो चोर पकड़े गए. मकान मालिक से फेस टू फेस हुआ तो बोले, ‘अंकल इतने बड़े घर के गेट पर एक छोटा सा ताला काहे लगाया था.’
ps: इस ट्वीट(x) पर हरिसन, गोदरेज या लिंक-लॉक्स टाइप किसी ब्रांड का इंटीग्रेशन किया जा सकता है.
‘होर्मुज़ स्ट्रेट में गोलीबारी हुई? हमें तो पता ही नहीं!‘
ईरान का जवाब सुनकर लग रहा है कि उन्होंने बिलासपुर वाले भाई के बादाम अभी तक नहीं खाए हैं. बिसाइड जोक याददाश्त और जानकारी दोनों ही ज़रा कैज़ुअल लग रहे हों, पर 'रिश्ते मज़बूत' तो डेफिनेटली हैं.
लेवल सबके निकलेंगे, पर जिसके पास बादाम होंगे उसका काम पहले होगा!
बिलासपुर के एक शख्स ने हाउसिंग बोर्ड ऑफिस को ही 'बादाम दरबार' बना दिया. फाइल गुम हुई तो सीधा बादाम का पैकेट अधिकारी की टेबल पर, 'खाइए और याददाश्त बढ़ाइए!' गजब बेइज्जती है भाई!
गाजियाबाद में झुग्गियों में लगी आग के बाद लोगों का गुस्सा फूटा है, लोगोंका कहना है की'अगर fire brigade वक्त पर आती तो सब बच जाता' अब हालात ये है कि किसी की बेटी का दहेज जल गया, तो किसी की उम्र भर की कमाई!
देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट: https://t.co/quYX6F7BXH
अच्छा है कि कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं हो रही. क्योंकि उसको सीधी करने के लिए ही तो पूरा सिस्टम लगा हुआ है. अच्छा है कि समय रैनाओं की आवाज़ नहीं दबती. बुरा है कि उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है. संस्कार के नाम पर देश के बैकयार्ड में पुराने सड़े विचारों वाले तालाब की सफ़ाई ना करना कहां तक सही है? कहां से सही है? ऐसे मुहावरों को कॉल आउट करने की ज़रूरत है, उनके कनॉटेशन को कॉल आउट करने की ज़रूरत है, अंकल सोच को कॉल आउट करने की ज़रूरत है. कुछ ऐसी क्रांतिकारी पूछों की ज़रूरत है, जो सीधी नहीं होती.
@actmukeshkhanna@SavalRohit@rajpalofficial@rainarajesh
ये है नोएडा पुलिस. उत्तर प्रदेश पुलिस. असंवेदनशील, आक्रामक, अहंकारी, अक्खड़, असभ्य पुलिस. ये मज़दूरों की आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों को भी नहीं बख़्शती. उनसे ख़राब व्यवहार करती है. नोएडा NSEZ सेक्टर 83 में एक प्रोटेस्ट चल रहा था. फैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूर अपना वेतन बढ़ाने की मांग कर थे. आसमान छूती महंगाई के बीच भी फ़ैक्ट्री मालिक नए श्रम क़ानून नहीं मान रहे. कम पैसों में ज़्यादा काम करा रहे. यानी विशुद्ध शोषण.
इसके ख़िलाफ़ समाज का सबसे कमज़ोर तबका सड़क पर है और हमारी पुलिस से उन्हें मदद या इंसाफ़ तो छोड़िए, हमदर्दी तक नहीं मिल रही. ज़िंगाबाद मज़दूरों की ख़ैर-खबर लेने उनके बीच पहुँचा था और ज़िंगाबाद के एक सवाल पर पुलिस अधिकारी किस तरह भड़क गए ये आप इस वीडियो में देख ही सकते हैं. ये व्यवहार साफ़ तौर पर बदतमीज़ी है.
यूपी पुलिस भले ही अपने फ़र्ज़ से मुँह मोड़ ले, हमें अपना काम अच्छी तरह से मालूम है. ज़िंगाबाद कमज़ोरों की आवाज़ उठाता रहेगा.
यूपी पुलिस का ये बर्ताव न सिर्फ़ ऑब्जेक्शनेबल है, बल्कि ये चिंता भी पैदा करता है कि ग़रीब तबके को इनसे सहानुभूति और न्याय की उम्मीद करनी भी चाहिए या नहीं! जो पुलिस कैमरे पर इतनी हमलावर मुद्रा में नज़र आने से नहीं झिझकती, वो अकेले में मज़दूरों/ग़रीबों की आवाज़ क्या ही सुनेगी! पावर का ऐसा कौन सा नशा है इन लोगों को कि मानवीयता के बेसिक सबक़ भी ये लोग भूल जाते हैं. बेहद शर्मनाक!