छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के सरकारी स्��ूलों में व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों हुनरमंद बनाने वाले वोकेशनल टीचर्स को ठेकाप्रथा में रखा गया है। जिसके कारण ठेका कंपनियां vocational teachers का कम मानदेय, समय पर सैलरी नहीं, सहित कई तर�� से शोषण कर रही है।