*हिंदुओं के त्योहार में*
*मिंया अखिलेशुद्दीन पैसे उनको बांट रहा है*
*जो राखी को हराम मानते हैं*
*हिजाबिया पैसे ले रही हैं-लेकिन किसी ने भी*
*टोटिचोर को राखी नहीं बांधी*
*जो बाबर के लिए*
*लाखो रामभक्तों को मरवा सकता है*
*उसके लिये राखी का अपमान करना*
*कौन सी बड़ी बात है*
अब इसमें कोई शक नहीं रहा कि राहुल जितना बोलेंगे अपनी पार्टी का नुकसान करेंगे । राहुल की गूंज को युवा यदि झूठ की गूँज बनाकर पेश कर रहे हैं तो पार्टी के लिए शर्म की बात है । क्या तमाशा है कि बीएसएनल को बेच दिया , भारत में इन्डस्ट्री खत्म हो गई , स्टार्टअप बर्बाद हो गए , इसरो को बेच दिया जैसे फेक नैरेटिव फैला रहे हैं ? कहां बेच दिया ? कब बेच दिया ? किसे बेच दिया ? यूँ ही बक बक किए जा रहे हैं या कोई सच्चा आंकड़ा है आपके पास ? और फिर आईआईटी की उस जेन जी लड़की के खिलाफ कर्नाटक में एफआईआर दर्ज करा दी जिसने आपके फेक नैरेटिव का भंडाफोड़ कर दिया ?
बारह साल हो गए नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं । लेकिन विपक्ष की कहानी आज भी वहीं से शुरू होती है—“मोदी सरकार ने किया ही क्या है ?” सवाल सुनकर लगता है जैसे 2014 से 2026 के बीच देश रुका हुआ हो ? सड़कें नहीं बनीं , रेल नहीं बदली , डिजिटल भुगतान नहीं आया , गरीबों के बैंक खाते नहीं खुले , टैक्स व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ , अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में कोई नई दिशा नहीं मिली और भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में आगे नहीं बढ़ा ? मतलब न 370 हटी , न तीन तलाक हटा , न राम मंदिर बना , न सेना में आमूल क्रांति आई , न भारत मिसाइल और अत्याधुनिक सैन्य सामग्री का निर्यातक देश बना , न आर्थिक और सैन्य शक्ति बना ?
तो फिर सवाल यह है कि क्या देश की जनता को दिखाई देने वाला बदलाव विपक्ष को दिखाई नहीं देता ? या फिर विपक्ष की राजनीति का चश्मा कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया है ? माना कि विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है । लोकतंत्र में यह जरूरी भी है । लेकिन आलोचना और नकारवाद में अंतर होता है । सरकार की नीतियों की कमियां गिनाइए, सवाल पूछिए, आंकड़े मांगिए, संसद में आइये , भ्रष्टाचार हो तो मुद्दा उठाइए ? लेकिन अगर देश में कोई बदलाव हुआ है तो केवल इसलिए उसे नकार देना कि उसका श्रेय मोदी सरकार को मिल जाएगा , विपक्षी राजनीति की गंभीरता को कमजोर करता है ।
GST आया , देश की जटिल अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक ढांचे में लाने की कोशिश हुई । इसमें समस्याएं भी आईं और सुधार भी हुए । लेकिन क्या इसे कोई सामान्य फैसला कहा जा सकता है ? UPI आया और डिजिटल भुगतान ने आम आदमी की जिंदगी बदल दी । जिस देश में कभी छोटे भुगतान के लिए भी नकदी जरूरी समझी जाती थी, वहां आज चाय की दुकान से लेकर बड़े कारोबार तक मोबाइल से भुगतान हो रहा है । फिर भी विपक्ष पूछता है—“बड़ा काम क्या हुआ ?” सरकार के काम गिनाना न तो हमारा मकसद है , न हमारा काम । यहीं से राजनीति का असली व्यंग्य शुरू होता है । अगर सरकार कुछ करे तो विपक्ष कहता है—“इसमें नया क्या है ?”
अगर सरकार कुछ न करे तो विपक्ष कहता है—“सरकार सो रही है । सरकार योजना बनाए तो—“जुमला” । योजना सफल हो तो—“हमारे समय में भी शुरू हुई थी” ।
और अगर योजना में समस्या आ जाए तो—“देखिए, मोदी सरकार फेल” ? यानि समस्या काम में नहीं, शायद काम करने वाले के नाम में है । 12 सालों से यही सब चलते चलते विपक्ष अजीब मकाम पर आ पहुंचा है । अब कुछ भी हासिल करने की जिद हो गई है । लोकतंत्र के रास्ते न हो पाए तो सड़क के रास्ते छीन लेने की प्रवृत्ति विकसित हुई है । यह बेहद खतरनाक है । किसी भी तरह सत्ता हासिल करने की हनक में राहुल गांधी ने नेता प्रतिपक्ष होते हुए भी सब ताक पर रख दिया है । क्या यह स्वस्थ लोकतंत्र है ???
भारत खासतौर से दिल्ली, बांग्लादेश से अलग थोड़े ही है। तिलक नगर की हिंदू लड़की मुस्कान को उसके ही जिम ट्रेनर इमरान ने चाकू से गोद कर मार डाला।
लड़कियां इतना जंक फूड खाती ही क्यों है कि मोटापा दूर करने के लिए जिम जाना पड़े।
जिम जाना भी है तो हिंदू जिम ट्रेनर इन्हें नहीं मिलता।
पहले फंसती हैं, फिर मरती हैं।
रक्षाबंधन के नाम पर अखिलेश का PR स्टंट, किसको बाँट रहे कैश, जरा गौर से देखो सिर्फ मुस्लिमों को
इस्लाम में तो रक्षाबंधन का कोई महत्व ही नहीं है न वो इस धर्म पर्व को मानते हैं क्योंकि ये काफिरों का त्यौहार है।
IIT मद्रास की एक Gen-Z बेटी ने राहुल गांधी के झूठ का शानदार तरीके से पर्दाफाश किया है! 🔥
इस युवा छात्रा की वेबसाइट "झूठ की गूँज" ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूँज' कार्यक्रम में किए गए 40 दावों का Fact-Check किया है और सच्चाई चौंकाने वाली है:
कुल दावे: 40
FAKE (फर्जी): 29
MISLEADING (भ्रामक): 11
कहा था 'छात्रों की गूंज', लेकिन असल में यह निकला 'झूठ की गूंज'! 🤦♂️
नया भारत और देश का युवा अब जाग चुका है, वो इनके नैरेटिव और झूठ के झांसे में नहीं आने वाला। इस बेटी के साहस और रिसर्च को सलाम! 👏
वेबसाइट का लिंक यहाँ है, आप भी खुद सच्चाई देखें:
https://t.co/FmsxKGFNuv
कंगना रनौत ने हिंदू परंपराओं का मज़ाक उड़ाने वालों पर करारा हमला बोला 🔥
सुधीर ने पूछा – “क्या ईद पर भी ऐसा विज्ञापन बना सकते हैं?”
कंगना का जवाब – “मुसलमान अपनी बहन से शादी करते हैं, इसलिए उन्हें इतना सेंसिटिव नहीं होना चाहिए। लेकिन हिंदू धर्म की कुछ लाल रेखाएं हैं। गिवा के विज्ञापन में टीका कहां है? आरती कहां है? यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” 💯
🇮🇳🚩भारत में हज सब्सिडी को साल 2018 में पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था।
लेकिन आज कल नेता कम और मुल्ला प्रेमी ज्यादा दिखते हैं।
वोटों की खातिर यहाँ,बदल रहे सब भेष।
राजनीति की आड़ में,बँट रहा है देश।
हक़ की बातें छोड़कर,तुष्टीकरण का खेल।
जनता सब कुछ देख रही,कैसे होगा मेल।
संकट की हर घड़ी में पड़ोसी का सच्चा साथी—हमारा भारत! 🇮🇳🤝🇳🇵
बाढ़ की मार झेल रहे नेपाल के लिए आदरणीय PM @narendramodi जी के नेतृत्व में तुरंत 10 टन राहत सामग्री पहुँचाई गई।
आज का भारत केवल बातें नहीं, 'वसुधैव कुटुंबकम' का पालन करता है। 💪
दोगलापन की हद है।
राहुल मनुस्मृति पर हमला करता है तो बहुत खुश होती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं दी तो नाराज हो रही है।
मजे की बात यह है हिजाब और बुर्के की वकालत करने वाली आरफा शेरवानी खुद वेस्टर्न ड्रेस को इंजॉय करती है। तब मजहब पीछे हो जाता है।