राम जी से घात का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा नहीं फलेगा
ज़्यादा दिन नहीं चलेगा
जो लेगा ~ उसको पाप लगेगा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जब भाजपा से कोई आए
पैसे का लालच दिखलाए
तो बैठाके पूछो क्यों चुराया
मंदिर का मान क्यों गिराया
कहना
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
तो समझे…
जिस पैसे से पड़ेगा पाप
उसको नहीं लगाना हाथ
वरना लग जाएगा श्राप
पाप कर देगा सब नाश
इसीलिए
राम जी से घात का पैसा
धर्म-दान पात्र का पैसा
भाजपा के पाप का पैसा
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
ऐसा पैसा ~ नहीं चाहिए
नहीं चाहिए ~ नहीं चाहिए
पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’
पर उसकी वाणी पोल खोले
परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहनेवाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।
जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आँकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवज़ा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं; जिन तक मुआवज़ा नहीं पहुँचा, उनका पैसा कहाँ गया, ये नहीं बताते हैं; अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं; वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं।
अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टाँग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे।
जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि : ’जब मुँह खोला, तब बुरा बोला!’
‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है। जिस समाज के ख़िलाफ़ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है। इनका बस चले तो जो विवादित फ़िल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज़ भी कर दें और टैक्स फ़्री भी कर दें। अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके ख़िलाफ़ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा, उनकी सरकार हटाकर नयी सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा।
शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है। उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा।
"जिस दिन तुमने एनएसजी वापस ली थी उसी समय नियत और मंशा समझ गया था कि डराने चाहते हो, जो डरपोक लोग हैं वो एनएसजी रखे हुए हैं।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
ये है हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी की समाजवादी सेना इस सेना के सामने कोई भी सेना नहीं टिकने वाली
@SAMAJWADISENA_
जय अखिलेश
जय समाजवाद
घोड़े की पीठ पर बैठकर अहसास होता है कि जीवन में संतुलन, निष्ठा और दृढ़ता का महत्व कितना गहरा है। घोड़े हमें सिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी कैसे शांति और शक्ति बनाए रखें। उनकी वफादारी और मेहनत से हमें अनुशासन, समर्पण और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
"जिन्हें लगता है कि समाजवादी सरकार में जो कुंभ का आयोजन हुआ था उसमें कुछ कमियां रह गई थी तो वह यह किताब जरूर पढ़े, हार्वर्ड की स्टडी पढ़े।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
"जब रावण को सीता मां का हरण करना था तो रावण साधु के भेष में आया था, इसलिए हमको और आपको सावधान रहना पड़ेगा।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, कन्नौज
महाकुंभ ख़त्म होने को आया लेकिन दो महीने से काम करनेवाले सफ़ाईकर्मी को वेतन न मिलना बदइंतज़ामी का एक और सबूत है।
सवाल ये है कि उप्र भाजपा सरकार ने महाकुंभ से जो अरबों कमाये हैं वो कहाँ गये?