राम राम जपना...
राम मंदिर चढ़ावा चोरी
पूरे मामले की सही तरीके से जांच होनी चाहिए. अभी जो जांच हो रही है, वो जांच नहीं बल्कि खिलवाड़ है. जांच में ये साफ होना चाहिए कि पैसा कहां गया, उसका क्या इस्तेमाल हुआ और कहीं कोई गड़बड़ी या दुरुपयोग तो नहीं हुआ. शिलापूजन के समय से ही जांच हो उस समय जो पैसा आया, वो कहां चला गया और उसका क्या हिसाब है, ये सामने आना चाहिए. पूरे सिस्टम की समीक्षा करने की जरूरत है, ताकि सच्चाई सामने आ सके. मामले की जिला जज और #SupremeCourt की देखरेख में जांच होनी चाहिए: महंत धर्मदास, हनुमानगढ़ी, अयोध्या
आपका नाम अश्विनी वैष्णव है।
आप रेल मंत्री हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर “रील मंत्री” के नाम से ज्यादा फेमस हैं।
अब आपने भरोसा दिलाया है कि IRCTC की खराब वेबसाइट 30 दिनों में अपडेट हो जाएगी।
वही IRCTC, जहां टिकट से पहले यात्री CAPTCHA से कुश्ती लड़ता है।
वही IRCTC, जहां तत्काल बुकिंग 10 बजे शुरू होती है और उम्मीद 10:01 पर दम तोड़ देती है।
वही IRCTC, जहां लॉगिन फेल, OTP लेट, पेमेंट हैंग, पैसा कट और अंत में नतीजा - वेटलिस्ट या रिग्रेट।
पिछले 3,037 दिनों से यात्री वेबसाइट पर बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहे।
वे बस इतना चाहते हैं कि टिकट बुक करते समय सिस्टम इंसानों जैसा काम करे , सरकारी दफ्तर जैसा नहीं।
डिजिटल इंडिया में एक ट्रेन टिकट बुक करना अगर UPSC प्रीलिम्स जैसा लगने लगे , तो समस्या यात्री की नहीं , सिस्टम की है।
नितिन गडकरी कह रहे हैं कि पिछली रात उन्होंने 100 प्रतिशत इथेनॉल ईधन की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे पेट्रोल-डीजल आयात नहीं करना पड़ेगा और देश के 22 लाख करोड़ रुपये बचेंगे।
चलो मान लिया लेकिन सवाल ये है कि ये 22 लाख करोड़ का होगा क्या...क्या इस पैसे को चुनाव जीतने में नहीं लगाया जाएगा?
और सबसे बड़ा सवाल कि आप इथेनॉल थोड़ा-थोड़ा करके 100 फीसदी पर ले गए लेकिन जनता को कभी सस्सा ईधन मिल पाया❓
Hi @EurekaforbesIN no one from your local service unit is responding to the pending service request. With such pathetic service support (even during warranty period), why should any person prefer to purchase your products.
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अश्विनी वैष्णव जी @AshwiniVaishnaw एक दिन किसी आम यात्री का मोबाइल लेकर खुद Tatkal टिकट बुक करके देखिए। तभी पता चलेगा कि हाई लोड, धीमी वेबसाइट और सेकंडों में खत्म होने वाले टिकटों से आम लोग कितनी परेशानी झेलते हैं। क्या इस व्यवस्था में सुधार होगा?
#Tatkal#IRCTC#IndianRailways
भारतीय रेल कहती है ध्यान मग्न हो जाओ यात्रा बहुत सुन्दर होगी...
यदि तुम ध्यान करो और शैतान आ जाए, तो शैतान को भी ध्यान करने के लिए मजबूर कौन करेगा...IRCTC या रेलवे बोर्ड।
#IndianRailways#IRCTC
E20 पेट्रोल?
गाड़ी खराब हो रही है, यह मैकेनिक हर दिन वीडियो बनाकर बता रहे हैं। जिनकी गाड़ी खराब हो रही, उनको दर्द पता है। लेकिन, सरकार क्यों जबरदस्ती यह पेट्रोल थोपे जा रही है, पता नहीं?
इनका नाम अतुल सुभाष था।
34 साल। बेंगलुरु में प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर। एक बेटे के पिता व्योम।
उन्होंने सिस्टम से उम्मीद नहीं की कि कोई उनकी बात सुनेगा।
उन्होंने हर चीज़ खुद रिकॉर्ड की।
उन पर एक साथ 9 केस दर्ज हुए 498A, घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस, कस्टडी।
हर सुनवाई के लिए उन्हें बेंगलुरु से जौनपुर तक 1700 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था।
4 साल में 40 बार वही सफर।
120 कोर्ट हियरिंग्स।
उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये मांगे गए।
अपने ही बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये अलग से।
अपने वीडियो में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक फैमिली कोर्ट जज ने अनुकूल आदेश के लिए 5 लाख रुपये मांगे।
9 दिसंबर 2024 को उन्होंने बेंगलुरु के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।
पीछे छोड़ा — 24 पन्नों का नोट और 81 मिनट का वीडियो।
हर तारीख। हर केस नंबर। हर यात्रा। हर रकम।
सब कुछ रिकॉर्ड किया हुआ।
मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही:
“मेरी अस्थियाँ गंगा में तब तक विसर्जित मत करना, जब तक न्याय न मिले।”
उनकी मां सुप्रीम कोर्ट गईं, अपने पोते से मिलने की अनुमति मांगने।
उन्हें कहा गया — “आप बच्चे के लिए stranger हैं।”
फिर सुनवाई आई।
जज छुट्टी पर थे।
एक साल की तारीख मिल गई।
इसी बीच, ट्विशा शर्मा केस में सिर्फ 11 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
बार काउंसिल ने घंटों में कार्रवाई कर दी।
AIIMS की मेडिकल टीम चार्टर्ड प्लेन से भेजी गई।
11 दिन में पूरा सिस्टम दौड़ पड़ा।
अतुल सुभाष 81 मिनट का रिकॉर्डेड सबूत छोड़ गए थे।
उन्हें मिला एक साल का इंतज़ार।
उनकी अस्थियाँ आज भी गंगा का इंतज़ार कर रही हैं।
उनका बेटा व्योम अब 6 साल का है।
अतुल सुभाष को न्याय मिलना चाहिए।
अगर रिकॉर्डेड सबूत, दस्तावेज़ और एक इंसान की आखिरी पुकार भी सिस्टम को नहीं जगा सकती, तो फिर आम आदमी आखिर जाए कहाँ?
IRCTC और भारतीय रेल मंत्रालय की खुली लूट
PNR: 6303795548
₹581.80 का रेलवे टिकट बुक किया,
टिकट कन्फर्म नहीं हुआ और अपने आप कैंसल हो गया
लेकिन @IRCTCofficial रेलवे सिर्फ ₹510 रिफंड दे रहा है।
जब सीट मिली ही नहीं तो पूरा पैसा दीजिए
₹60 आप तब काट सकते हैं जब यात्री खुद वेटिंग टिकट को कैंसल कराता हो
यात्रियों के साथ ये गलत है। कृपया पूरा रिफंड दिया जाए।
बेशक चाहे तो UPI चार्ज काट लें लेकिन कैंसिलेशन चार्ज नहीं होना चाहिए
क्योंकि यात्री ने कैंसल नहीं कराया बल्कि रेलवे ने किया है।
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
सूर्यकुमार यादव को आज बिना नुकसान के ज्ञान लेना चाहिए कि अहंकार और ओवर कॉन्फिडेंस से बचें।किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। नहीं तो कर्मा तुरंत आईना दिख देगा।
अभी इसी कप में संजू सैमसन के शामिल करने के सवाल तक का मजाक उड़ा रहे थे,आज सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके कारण सेमी फ़ाइनल में है!
सड़क पर मूतने वाले इस जाहिल की लंगड़ाते हुए वीडियो आनी चाहिए ताकि लोगों में Civic sense पैदा हो सके।
इस शुभ कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए
@police_haryana से निवेदन है, संज्ञान लें।
झूठी केरला स्टोरी आपने 3 घंटे की फिल्म में देखी होगी अब असली केरला स्टोरी इस 60 सेकंड के वीडियो में देखिए...
एक चलती बस में आग लगी तो जैसे ही आसपास के लोगों ने देखा तो फौरन एक्टिव हो गए
सबसे पहले बस में से पैसेंजर को निकाला और फिर आग बुझाने में जुट गए
लोग बिना देरी किए अपनी-अपनी दुकानों से Fire Extinguisher ले आए और आग बुझाने लगे
ढाई-तीन मिनट के बाद वीडियो में पुलिस वाले भी आते दिखाई दिए हैं लेकिन उन्होंने देखा कि लोग आग बुझाने में जुटे हुए हैं और उनकी वहां जरूरत नहीं है तो उन्होंने ट्रैफिक क्लियर करने का काम संभाल लिया।
अब सबसे चौंकाने वाली और जरूरी बात कि पूरे वीडियो में आपको किसी के हाथ में फोन नहीं दिखाई देगा जबकि अपने यहां ऐसी कोई भी घटना होती है तो सबसे पहले लोग फोन निकालकर वीडियो बनाने लगते हैं...
सोचिए ऐसा क्या है केरला में और आपको क्यों वहां के बारे में झूठी फिल्में दिखाकर खुश किया जा रहा है...❓
#KeralaStory
"मां के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए 50 हजार भरता हूं.
जरूरत आई तो Star Health ने पैसे देने से मना कर दिया!"
"बोल रहे- हमसे पूछकर ली थी पॉलिसी?"
क्या देश में Health insurance के नाम पर भी घोटाला चल रहा है?
ये लखनऊ का वीडियो है. मां के इलाज के लिए एक आदमी, Star Health के दफ्तर में बैठा है.
पहले प्रीमियर भरो, फिर बीमारी हो तो धरना दो. ये कौन सा सिस्टम है?
और स्टाफ का attitude देखिए, क्या ये लोग सिर्फ पॉलिसी बेचने के लिए रखे गए हैं या फिर ग्राहकों की मदद करना भी इनके काम में शामिल है?