सोमनाथ मंदिर के नीचे बुद्ध विहार 😮
पुरातत्व विभाग का खुलासा : सोमनाथमंदिर के नीचे 3 मंजिला इमारत और बौद्ध गुफाएं है,
जमीन से 12 मीटर अंदर तक जांच की गई।
भारत बुद्ध की भूमि है, बुद्ध ही सत्य है।
नमो बुद्धाय ✊
आरक्षण को खत्म करना है तो आरक्षणवादियों की गोलबंदी को तोड़ना होगा।
पिछड़ों को यादवों के खिलाफ और दलितों को जाटवो के खिलाफ भड़का दो।
यह शब्द वी��ियो दिख रहे इस बुजुर्ग व्यक्ति के हैं जिन्हें पूर्व न्यायधीश C B पाण्डेय बताया जा रहा है।
यदि यह सच है तो सोचो न्यायाधीश रहते हुए?
देश मे असली आरक्षण तो मुगलो और अंग्रेजो के जमाने से ब्राह्मण ही ले रहे है.
जब SC, ST, OBC पढने लगे,उन्होने अपना हर स्थान पर हक और प्रतिनिधित्व मांगा तो यही ब्राह्मण आरक्षण का रोना रोने लगे.
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जी ने संविधान के माध्यम से आपको वो हक और अधिकार दिलाए.
जय भीम 💙🙏🏻
ब्राह्मणो का आरक्षण....
देश के हर उचे पद पर ब्राह्मण आरक्षण है.देश के आजादी से लेकर अब तक सर्वोच्च ��्यायालय पर सिर्फ ब्राह्मण आरक्षण रहा है .दो या तीन SC वर्ग से होंगे.
विद्यापीठो मे प्रोफेसर, HOD पदो पर सब ब्राह्मण आरक्षण.
कोलेजियम, लेट्ररल एन्ट्री आरक्षण से ब्राह्मणो की नियुक्ती होती है.
फिर भी आरक्षण के विरुद्ध दिन रात ब्राह्मण ही रोते रहते है.
क्यूँकी ब्राह्मणो के सामने जिनको खडे रहने का हक नही था वो आज उनके बराबरी में आकर बैठ गये है. इसी दर्द के कारण 52 आरक्षण का रोना रोते है.
आरक्षण ये आपक�� हर स्थान पर प्रतिनिधित्व है. जिसपर सिर्फ ब्राह्मण कब्जा जमाये बैठे है.
Thank you Dr Babasaheb Ambedkar 🙏🏻💙
We are because, he Was
प्यार किया तो डरना क्या, जाति धर्म का करना क्या !
महाराष्ट्र के ना���देड़ में ऑनर किलिंग का शिकार हुए सक्षम ताटे के परिवार से मुलाकात की। सक्षम की डेडबॉडी से शादी करने वाली आंचल मामीडवार अब सक्षम के घर पर ही रहती हैं। आंचल का परिवार अब जेल में है।
अपनी ��ाति को ऊंचा मानना और दूसरी जाति को नीच मानने वाली मानसिकता ने दो-दो परिवारों को बर्बाद कर दिया। जल्द @TheNewsBeak पर सक्षम और आंचल की कहानी आएगी।
ये कोई साधारण यात्रा नहीं है।
ये उन लोगों की आवाज़ है जिनकी ज़िंदगी अरावली से जुड़ी है।
जहाँ अरावली रहेगी, वहाँ पानी रहेगा।
जहाँ पानी रहेगा, वहाँ जीवन रहेगा।
आज पहाड़ काटे ज�� रहे हैं, जंगल उजाड़े जा रहे हैं,
और हमें समझाया जा रहा है कि ये “विकास” है।
लेकिन जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य छीन ले,
वो विकास नहीं, विनाश है।
सफेद कपड़ों में चलती ये भीड़,
हाथों में तख्तियाँ नहीं - चेतावनी है।
अगर आज अरावली नहीं बची,
तो कल न खेती बचेगी, न किसान, न इंसान।
अरावली बचाओ।
प्रकृति बचाओ।
भविष्य बचाओ।
ऑपरेशन सिंदूर पर ह��ारे बहादुर सुरक्षा बलों ने जिस साहस और कुशलता से कार्य किया है, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
आतंकवाद के ख़िलाफ़ यह सख़्त और निर्णायक कार्रवाई न सिर्फ़ आतंकियों को करारा जवाब है, बल्कि यह भी साबित क���ती है कि हमारे जवान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपनी जान की परवाह न करने वाले इन वीरों को सलाम। हम एकजुट होकर आतंकवाद के ख़िलाफ़ खड़े हैं – अब कोई समझौता नहीं।
जय हिंद! वंदे मातरम्!
भारत का जवाब पाकिस्तान के लिए अवसर है कि वह सोचे ��ि उसकी ज़मीन पर आतंक क्यों पनप रहा है। आतंकी अड्डे होने का अपराध बोध उस पर किसी बम से भारी पड़ना चाहिए। उसे अपने भीतर की इस अराजकता और छद्म लोकतंत्र का प्रतिकार करना चाहिए। सेना ज़रूरी है लेकिन सरकार चलाने के लिए नहीं। जहां भी सेना सरकार बन जाती है या सेना में सरकार घुस जाती है वहाँ अराजकता और आतंक को ही अवसर मिलता है। अतः भारत का यह संयमित जवाब उसके भीतर एक लोकतांत्रिक और व्यवस्थित देश बनाने की लड़ाई का अवसर होना चाहिए। पाकिस्तान को अपने भीतर जवाब खोजना चाहिए।
दुनिया युद्ध का विरोध कर रही है, करना भी चाहिए, युद्ध किसी के हक में नहीं होता है। आप कहें या न कहें यही साबित बात है। बार-बार आतंकी हमले जवाबी हमले का कारण बनेंगे। युद्ध की आशंका को जन्म देंगे। दुनिया को मिल कर आतंकी अड्डों की समाप्ति का स्थायी रास्ता निकालना चाहिए।
26 भारतीय और एक नेपाली नागरिक ने अपने लिए एक अदद छुट्टी चाही थी। उनके जीवन को तबाह करने का ख़्याल अपराध है।उन्होंने बिना युद्ध के अपनों को खोया।
तमाम नफरती उकसावों को किनारे कर देश की एकजुटता ���सी बात को लेकर रही कि जवाब दिया जाना चाहिए। जवाब दिया गया। इसकी आवाज़ कश्मीर से भी आई। आतंकी हमले ने उनके पेट पर हमला किया था। एक झटके में काम धंधा बंद हो गया। विपक्ष भी मजबूती से खड़ा रहा और सरकार ने जवाब देकर इस भावना का सम्मान भी किया।
पहलगाम हमले का दुख उल्लास में नहीं बदला जा सकता। कम भी नहीं हो सकता। सरकार के इस जवाब को लेकर उन्माद में बदलने का उद्योग नहीं होना चाहिए। यह सटीक और संयमित जवाब के परा���्रम को हल्का करेगा। इसी वक्त में उन्माद से बचा जाना चाहिए। युद्ध के विनाश की बात करने वालों को भी सुना जाना चाहिए। लोकतंत्र को स्थगित करने की चाह से बचना चाहिए
इस जवाब को संक्षेप में भी कहा जा सकता है। दो शब्दों में भी। जय हिंद।
“मेरी माँ को नहीं पता कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कहाँ है…” लेकिन आज मैं उस ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी में खड़ा हूँ, जहाँ मैंने एक ग्लोबल मीडिया कांफ्रेंस में हिस्सा लिया और दलित कम्युनिटी मीडिया की आवाज़ को दुनि��ा के सामने रखा।
मेरी माँ अनपढ़ हैं, लेकिन उन्होंने कभी हमें सपनों से दूर नहीं होने दिया। एक सरकारी स्कूल, एक तंग गली, और एक चपरासी के बेटे के लिए ये रास्ता आसान नहीं था। लेकिन इस रास्ते को चलने लायक बनाया बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने। उन्होंने सिर्फ संविधान नहीं लिखा, उन्होंने हम जैसे करोड़ों लोगों को इतिहास में अपनी जगह लिखने की हिम्मत दी।
मेरे दादा जूते बनाने का काम करते थे। उन्हें कभी ���रक्षण का लाभ नहीं मिला, क्योंकि तब तक बाबा साहब की क्रांति ज़मीन तक नहीं पहुँची थी।
मेरे पिता-माँ आरक्षण की बदौलत एक सरकारी दफ्तर में चपरासी की नौकरी तक पहुँचे।
और आज उनका बेटा—मैं—हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में, बिना किसी सरकारी नौकरी या कोटे की चाहत के, सिर्फ अपनी आंबेडकरवादी सोच और मीडिया के काम के दम पर खड़ा हूँ।
आरक्षण सिर्फ़ किसी को आगे नहीं बढ़ाता, बल्कि ये उन्हें उस दौड़ में शामिल करता है जहाँ बाकी लोग पहले से दौड़ रहे हैं। ये नीति नहीं, राष्ट्र-निर्माण की नींव है।
बाबा साहब ने ���ो रास्ता दिखाया, उसी पर चलते हुए हम आज अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुँचा पा रहे हैं।
आज हार्वर्ड में मैं अकेला नहीं था—मेरे साथ मेरे दादा का पसीना, मेरे पिता की मेहनत, मेरी माँ के त्याग और पूरे आंबेडकरवादी समाज की उम्मीदें थीं। शुक्रिया बाबा साहब 💙
जय भीम।
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सुकला स्वघोषित ब्राह्मण:
मनु ने ६ कर्म सिखाए जिसमे में एक भी नहीं आता ।
काम - दिन रात बहुजनों और बौद्ध के प्रति नफ़रत फैलाना।
ज्ञान - वेद में इंद्र की पूजा करना और रामायण में इंद्र का समागम ऋषि की पत्नी अहिल्य�� से समागम करने के बात लिखे को धर्म ग्रंथ बताना
कब्जा: अपना कुछ भी न होना, बुद्धिस्ट स्तूपों महाविहार पर नवब्राह्मणों के अवैध घुसपैठ को जस्टिफाई करना।