"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" के उद्घोष से भारतीय जनमानस में क्रांति की ज्वाला फूंकने वाले, मां भारती के अमर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर शत्-शत् नमन।
#NetajiSubhashChandraBose
भारत माता के सच्चे सपूत, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' महाघोष के प्रणेता, 'नेताजी' ने आजाद हिन्द फौज की स्थापना कर आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी। आपका शौर्य, पराक्रम एवं माँ भारती की नि:स्वार्थ आराधना वंदनीय है।
ऐसे महान राष्ट्र आराधक 'नेताजी' सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि व प्रदेश वासियों को 'पराक्रम दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय हिंद!
@KarishmaAziz_@rashtrapatibhvn Mushlim sikshak ko paisa Sanatan Dharm k logo ne diya h 👈
Aur Shri Ram ji k mandir ka paisa humne diya h🏇🚩
Jalan tum jaise chamcho ko ho rahi h 😂😂
@Dr_MonikaSingh_ Ye videshi bhasa h 👈 hum deshi log h 🙏
Jisko dikat h Bharat m Hindi se vo Jaa sakta h yaha se 👈
Hamne angrejo ko bhaga diya maar maar k 👈 tu kis baat angreji ki karti h 👈😂😂
BJP ko full support h 🏇🚩
🔥 देश की सुरक्षा के सच्चे प्रहरी! 🇮🇳⚖️ 🔥
राष्ट्रवादी वकील अश्वनी उपाध्यक्ष जी ने अकेले ही 18 याचिकाओं की बैंड बजा दी है, जो रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने से रोकने के लिए थीं। 🙌💪 दे���भक्ति की इस मिसाल को देखकर हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है। 🦁🔥
कानून और न्याय की ताकत!
जब किसी ने सोचा कि ये याचिकाएं दब जाएँगी, अश्वनी उपाध्यक्ष जी ने दिखा दिया कि हिम्मत और ईमानदारी के आगे कोई नहीं टिक सकता। ये काम सिर्फ एक वकील का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा का संदेश है।
देश के लिए लड़ना कोई आसान काम नहीं!
18 याचिकाओं का अकेले सामना करना, यह दिखाता है कि देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं बल्कि कर्मों में होती है।जनता के विश्वास और देश के नियमों की रक्षा के लिए यह एक मिसाल है। अश्वनी उपाध्यक्ष: सच के सच्चे योद्धा! देशभक्ति की राह पर जो कदम रखते हैं, वही इतिहास में याद किए जाते हैं। आज अश्वनी उपाध्यक्ष जी ने दिखा दिया कि कि���ी भी समस्या का सामना अकेले भी किया जा सकता है।
देशवासियों के लिए संदेश!
हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना होगा और ऐसे नायक की सराहना करनी होगी। अश्वनी उपाध्यक्ष जी जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि देशभक्ति का मतलब केवल बोलना नहीं, बल्कि काम करना भी है।