One guy is looting money by forcing Ethanol
Another is land grabbing for his real estate empire
One is making money from leaking exam papers
Another is looting by selling the Nicobar Island
Top to bottom, everything is corrupt and compromised in this Modi govt.
अब NDA सरकार के अंदर भी गड़बड़ी अलग अलग स्वरूप में सामने आने लगी है। आप इसे “लॉ ऑफ़ एवरेज” भी कह सकते हैं।
चंदा घोटाला, नीट पेपर लीक, सीबीएसई मार्क्स मेस,जमीन घोटाला,राजेश एक्सपोर्ट स्कैम, के बाद के कर कई मामले सामने आ रहे हैं!
कुछ मामले आने की कतार में है जिनमे कुछ बड़े मामले बताए जा रहे हैं!
हालाँकि सरकार ने अक्काउंटिबिलिटी तय करने और एक्शन लेने की परंपरा को बंद कर दिया है लेकिन इन सब मामलों के एक के बाद सामने आने के बाद सरकार के इक़बाल और नैरेटिव पर जरूर गहरा असर हुआ है!
वहीँ टीवी मीडिया अभी भी दूसरे दलों के नेताओं के तोड़ने के ओपरेशन को मास्टरस्ट्रोक बताने में ही लगी है और समाज देश ले लिए सबसे अहम खबर/जिम्मेदारी बताने में लगी है!
उज्जैन में 2028 के शुरू में सिंहस्थ है।
उसकी तैयारी शुरू हो गई है। बड़े पैमाने पर वहां सरकार जमीन एक्वायर कर रही है और उसका बहुत अच्छा मुआवजा दिया जाएगा।
अब आपकी समझ में आ गया होगा कि जो सैंकड़ों एकड़ जमीन और प्लाट
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने परिवारजनों के नाम से खरीदे हैं उसमें कितना बेशुमार पैसा बनेगा।
उज्जैन में 12 साल बाद लगने वाले कुंभ को सिंहस्थ कहा जाता है।
और बता दें।
मुख्यमंत्री मोहन यादव किस तरह हर क्षेत्र में छा जाना चाहते हैं कि पिछले साल अपने बड़े भाई नंदलाल यादव को उज्जैन प्रेस क्लब का अध्यक्ष बनवा दिया।
पत्रकार के रूप में उनकी कोई पहचान नहीं है।
मगर खबरें ऐसी छपवाई गईं कि सर्वसम्मति से चुना।
तालियां बजीं खुशियां छा गईं।
वाह वाह!
और आगे क्या लिखें?
कोई शिवराज सिंह चौहान के दिल से पूछे!
यह मध्य प्रदेश का मीडिया उनके भी ऐसे ही गुणगान करता था।
और अब मोहन यादव के गुणगान में उसे एक और पहलू मिल गया है शिवराज से आगे बताने का तो वह बताता रहता है।
मोहन यादव को बड़ा दिखाने के लिए शिवराज को रोज छोटा करता है।
मध्य प्रदेश की मीडिया को जीतू पटवारी के वेयरहाउस की तो खबर है मगर उज्जैन में पिछले ढाई साल से क्या हो रहा है इसकी तरफ से पूरी तरह बेखबर है।
मगर आज दिल्ली के अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने मोहन यादव के लिए तो मुश्किलें पैदा कर ही दीं मध्यप्रदेश के मीडिया को भी थोड़ा आइना दिखा दिया।
लोग सिर्फ़ इसलिए कांग्रेस और विपक्ष को कमज़ोर समझ रहे हैं क्योंकि कुछ सांसद BJP में शामिल हो गए हैं।
यह 2015 के संसद सत्र की बात है, जब राहुल गांधी अपनी टीम के सबसे भरोसेमंद सांसदों के बीच भाषण दे रहे थे।
-ज्योतिरादित्य सिंधिया: BJP में शामिल हुए 🤢
-अशोक चव्हाण: BJP में शामिल हुए 🤢
-रवनीत बिट्टू: BJP में शामिल हुए 🤢
-सुष्मिता सेन: TMC में शामिल हुईं 🤢
राहुल गांधी पिछले 12 सालों से न सिर्फ़ BJP और 'गोदी मीडिया' से लड़ रहे हैं, बल्कि उन्हें उन कई करीबी सहयोगियों का भी सामना करना पड़ा है जिन्होंने उन्हें धोखा दिया।
लेकिन क्या आपने राहुल गांधी जी के चेहरे पर कभी कोई तनाव या BJP से लड़ने की इच्छाशक्ति में कमी देखी? नहीं। और आप ऐसा कभी नहीं देखेंगे।
राहुल गांधी का हौसला बहुत मज़बूत है और एक दिन वह BJP को सत्ता से ज़रूर हटाएंगे।i
❗MP गज़ब है : CM बनते ही मोहन यादव ने ज़मीनों की झड़ी लगा दी।
अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के ज़मीन जायदाद के कारोबार पर बड़ा खुलासा किया है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद यादव और उनके परिजनों ने एक सौ अड़सठ एकड़ में फैले दर्जनों प्लॉट खरीदे हैं।
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मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 के बाद के दो सालों में उज्जैन में 168 एकड़ में फैले कम से कम 137 प्लॉट 45 करोड़ में खरीदे हैं — इनमें से ज़्यादातर ज़मीनें उन इलाकों में हैं जिन्हें उनकी सरकार द्वारा घोषित सड़क परियोजनाओं और ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव से फ़ायदा हुआ है।
उज्जैन शहर बड़े पैमाने पर शहरी नवीनीकरण का कारोबार चल रहा है।
नई सड़कों और हाईवे से लेकर ज़मीन के इस्तेमाल ने उज्जैन को भारत के सबसे हॉट प्रॉपर्टी मार्केट में से एक बना दिया है।
शुरुआती निवेशकों में मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनका करीबी परिवार, भाई-बहन और चचेरे भाई-बहन शामिल हैं।
ज़मीन के रिकॉर्ड्स की जांच से पता चला है कि 13 दिसंबर, 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद से, मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं।
ये प्लॉट कुल 168 एकड़ के हैं और इनकी कीमत 45 करोड़ रुपये है।
ये प्लॉट उन इलाकों में हैं जिन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) के विकास से सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ है।
रिकॉर्ड्स से यह भी पता चलता है कि इनमें से कम से कम छह प्लॉट बाद में बेच दिए गए। इसमें परिवार द्वारा 2026 में किए गए ज़मीन के लेन-देन (अगर कोई हुए हों) शामिल नहीं हैं, क्योंकि ज़मीन के सरकारी रिकॉर्ड तुरंत अपडेट नहीं होते हैं।
खतौनी (मालिकाना हक) रिकॉर्ड्स के अनुसार, ये प्लॉट मोहन यादव की पत्नी सीमा, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाइयों नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाइयों गोविंद और नीलेश यादव ने खरीदे थे।
ये खरीद या तो सीधे तौर पर की गई या परिवार द्वारा चलाई जा रही चार रियल एस्टेट कंपनियों के ज़रिए की गई। इन खरीद-फरोख्त से दो अहम मुद्दे सामने आते हैं जो नैतिकता और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट) पर सवाल उठाते हैं।
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१)
इनमें से ज़्यादातर प्लॉट या तो उज्जैन और उसके आस-पास घोषित नई सड़क परियोजनाओं के पास हैं, या फिर उन इलाकों में हैं जिन्हें 'उज्जैन मास्टर प्लान 2035' के तहत खेती वाली ज़मीन से रिहायशी या कमर्शियल ज़मीन में बदलने के लिए चिह्नित किया गया है।
हालांकि 'उज्जैन मास्टर प्लान 2035' मई 2023 में जारी किया गया था (यादव के मुख्यमंत्री बनने से कुछ महीने पहले), लेकिन वे दशकों से इस पवित्र शहर के पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े रहे हैं।
वे 2004-2010 के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, 2011-13 के दौरान MP पर्यटन विकास निगम (MPTDC) के प्रमुख और 2013 से उज्जैन (दक्षिण) से विधायक रहे हैं।
जनवरी 2024 से, यानी मोहन यादव के मुख्यमंत्री का पद संभालने के कुछ ही समय बाद, राज्य सरकार ने इन्हीं इलाकों में कई नई सड़कों और हाईवे की घोषणा की है।
स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि इससे भविष्य में इन ज़मीनों की कीमत बढ़ जाएगी। इसी तरह, कहा जाता है कि ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव से खेती वाली ज़मीनें रिहायशी या कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए खुल गईं, जिससे ये प्लॉट शुरुआती निवेश के लिए फायदेमंद हो गए।
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२)
दिसंबर 2023 के बाद यादव के परिवार की ज़मीन की खरीद ने उनके ज़मीन बैंक को और बढ़ा दिया, जो यादव के CM बनने से पहले ही मौजूद था। यादव परिवार—जिसमें मोहन यादव के बेटे वैभव और बहन कलावती भी शामिल हैं—के पास उज्जैन और उसके आसपास 179 एकड़ में फैले कम से कम 108 प्लॉट थे।
इनमें से कम से कम 85 एकड़ ज़मीन 2021-2023 के दौरान खरीदी गई थी, जब यादव शिक्षा मंत्री थे। लेकिन मोहन यादव के CM पद की शपथ लेने के बाद ही परिवार ने ज़मीन खरीदने का काम बहुत तेज़ी से शुरू किया।
13 दिसंबर 2023 को CM बनने के बाद से लेकर दिसंबर 2025 के आखिर तक, उनके परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जो 168 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन है।
इसमें से 12 एकड़ ज़मीन यादव परिवार के भीतर ही ट्रांसफर की गई थी।
Pushp Ranjan की वॉल से।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार पर अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप। इंडियन एक्सप्रेस ने बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया।
क्या बीजेपी इस्तीफ़ा लेगी मोहन यादव से ? जिस तरह फैक्ट्स रखे गए हैं,यहाँ से मोहन यादव के लिए आगे की राह बहुत मुश्किल।
मुझे समझ नहीं आ रहा कि उद्धव ठाकरे दल से निकल कर भाजपा के दल दल में नेता क्यों जाना चाह रहे हैं!
आज तो आदित्य ठाकरे ने बागी नेताओं के तोते उड़ा दिए, अपना मुँह दिखाने में क्या बागियों को थोड़ी भी शर्म आएगी!
गर्वीले अंदाज से बोल रहे हैं ऑपरेशन टाइगर सक्सेस!
अरे यह गर्व की नहीं शर्म की बात है।
उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ने बहुत सही कहा है यह चोरी डकैती है बिकाऊ लोग है।
ऑपरेशन पॉजिटिव शब्द है सेना के अभियानों के लिए प्रयुक्त होता था। देश की रक्षा के लिए।
चोरी डकैती सामूहिक बलात्कार के लिए कल कहने लगेंगे।
कहेंगे ऑपरेशन रेप सक्सेस!
@dblive15 के लिए आज शाम @RajeevRdb के साथ।
जिस तरह हर दिन घपले की ख़बरें अयोध्या के राम मंदिर से आ रही है,आज़ाद भारत का सबसे बड़ा आस्था घोटाला बना जाएगा।
उससे भी बड़ी बात है कि इस केस में “जाँच” के नाम पर जिस तरह कवर अप करने को कोशिश हो रही है उससे और लोग नाराज होंगे। क्या इसमें में भी दोषी को बचाने को कोशिश ? इतने के बाद भी एक केस तक दर्ज नहीं!
घोटाले सिर्फ़ चंदा चोरी का नहीं है बल्कि मंदिर और अयोध्या में पिछले कुछ सालों में जमीन के सौदे की भी जाँच हो तो उसमे भी करोड़ों का घोटाला सामने आयेगा और इसमें कई बड़े बड़े नाम भी सामने आवेंगे।
सोचिए जिस जगह को आस्था का प्रतीक बनाया जाना चाहिए था उसे घोटाले और हेराफेरी का प्रतीक बनाए जाने लगा।
Everyone could buy Petrol at ₹72 before Modi and his greed took over.
Now you'll have to pay ₹169 to buy pure Petrol and have to pay ₹114 to buy Gadkari's son's spirits diluted with Water and Petrol.
राहुल गांधी छत्तीसगढ़ पहुँच चुके हैं 🔥
एक तरफ़ सत्ता प्रचार में व्यस्त है, दूसरी तरफ़ कांग्रेस ज़मीन पर संगठन को धार देने में जुटी है
ज़िला अध्यक्ष प्रशिक्षण अभियान बता रहा है कि आने वाली राजनीतिक लड़ाई सिर्फ़ नारों से नहीं, मज़बूत कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के दम पर लड़ी जाएगी!
पिछले 12 साल में झूठ का नैरेटिव कैसे गढ़ा गया लोग उसका कैसे शिकार बने और अब कैसे उससे निकल रहे हैं ये पता चलता है कोमोलिका नाम की एक जेन-G की पोस्ट से...पोस्ट अंग्रेजी में थी आप यहां हिंदी में पढ़ सकते हैं...✍️
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मैं राहुल गांधी को एक व्यक्ति के रूप में तब पसंद करने लगी थी जब मैं अभी भी Bजेपी की हार्डकोर सपोर्टर थी। हाँ, आपने सही पढ़ा। जब मैं 17 साल की थी, तब पहली बार ट्विटर जॉइन किया और उसके फार राइट साइड पर पहुँच गई। मुझे वहाँ दयालु, प्रोटेक्टिव लोग मिले जिन्होंने मुझे पूरे दिल से प्यार किया और मेरी इंटरनेट फैमिली बन गए। उस समय ट्विटर कनेक्शन्स और दोस्तियों के बारे में था। आज भी उनमें से कई के साथ मेरी दोस्ती है, लेकिन एक बात जो अब मुझे पसंद नहीं है, वो यह कि ये जानते हुए भी कि मैं सिर्फ एक किशोरी हूँ, उन्होंने अपनी आइडियोलॉजी मुझ पर थोप दी। उन्होंने मुझे खुद चुनने का मौका नहीं दिया।
राहुल गांधी की बात करें तो मुझे भी उनके बारे में "पप्पू" वाला स्टीरियोटाइप फीड किया गया था और मैंने उसे मान लिया था। मैं उनके कंटेंट, स्पीचेस और आर्टिकल्स ढूंढने लगी ताकि मैं मीम्स बना सकूँ और उनका मजाक उड़ा सकूँ।लेकिन जितना ज्यादा मैंने उन्हें सुना, उनके बारे में पढ़ा, उनके कैंपेन फॉलो किए, उनके मीडिया इंटरव्यू देखे और पत्रकारों व राजनीतिक विश्लेषकों की राय सुनी, उतना ही मुझे एहसास हुआ कि ऑनलाइन जो कुछ मैं देख रही थी, वो ज्यादातर झूठ था। वो एक नैरेटिव था।
वे बिल्कुल अलग हैं, जैसा कि मुख्यधारा की मीडिया और फार राइट ने उन्हें चित्रित किया है। वे अच्छी शिक्षा प्राप्त हैं, दयालु हैं, भावनात्मक रूप से बुद्धिमान हैं, स्पष्टवादी हैं, सम्मानजनक हैं और करुणामय हैं।
मैंने कभी उन्हें किसी के प्रति, यहां तक कि अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति भी, अपमानजनक या नफरत भरा व्यवहार करते नहीं देखा।
मेरी राय में, Rahul गांधी एक देशभक्त, ईमानदार नेता और इस देश के युवाओं व भविष्य की आवाज हैं।
Happy Birthday, Pookie Rahul Gandhi Sir
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
बड़ी खबर-
‘जांच तो नृपेंद्र मिश्रा की हो’
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की बात सुनते ही किस पर भड़क उठे जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर?
बड़ी खबर!
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“राम नाम पर लूट है,लूट सके तो लूट “
अब तक इतने खुलासे हो गए हैं कि अब बचाव के सारे तर्क समाप्त हो गए लेकिन नए खुलासे जारी है।
न्यूनतम काम जो अब तक हो जाना चाहिए था वह था कि ट्रस्ट को भंग कर दिया जाता। कैसे वही ट्रस्ट अभी भी सक्रिय रह सकती है जिसके साये में इतना बड़ा पाप ही गया।