डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है
यदि लव जिहाद, लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद, घुसपैठ, धर्मांतरण, जनसंख्या विस्फोट तथा कालाधन हवाला भ्रष्टाचार के खिलाफ 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में आजीवन कारावास देने के लिए कानून नहीं बना तो
जो 1947 में हुआ वह 2047 में भी होगा
ATTN: parents of teen daughters!❤️
Dr Sujata Mittal , senior cancer specialist STRONGLY WARNS against getting young girls injected with HPV vaxx!
Don’t let sleazy P a e d o bill gates friend brainwash u .. do ur own research before deciding anything
Infosys is Above Whole GST Act
1⃣ Withdrwal From Rule 14A Still not allowed on portal even after filling 3 Months Returns.
2⃣Portal is not allowing utilization of SGST credit for IGST Payment without exhausting CGST Credit for January Month GSTR-3B.
Dear @cbic_india@Infosys_GSTN@nsitharaman kindly look into above matter as soon as possible.
Genuine Taxpayer are sufferring Due to Failure of one IT Company.
@CAamanmittal@rishibagree Extra gyan kyo pelna hey sir.
Maximum janta salary hi kamati hai.
Business wala to income tax deta hi nahi hai ya bahut kam tax deta hai.
देश की सबसे ज्यादा भ्रष्ट संस्था FSSAI है, देश में बढ़ रही तमाम बीमारियों के लिए जिम्मेदार है ,इनका जो मैंडेट है उस दिशा में बिल्कुल काम नहीं कर रहे ,
इनकी अपनी कोई रिसर्च या पैरामीटर्स नहीं हैं,सब कॉपी पेस्ट के भरोसे है,टेक्नोलॉजिकली बहुत बैकवर्ड हैं,
पूरी संस्था का बजट कब कौन लील जाता है , कैसे पॉलिसी हाईजैकिंग और ब्लैकमेलिंग होती है , कुछ दिनों में सब आपको बताएंगे ।
कैंसर बीमारी नहीं , सिस्टम की मार बन चुका है।
कैंसर ने सिर्फ मरीज नहीं तोड़े, पूरे परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला दिया है। इलाज से पहले ही लोग दवाइयों के खर्च में टूट जाते हैं।
अब हकीकत सुनिए 👇
डॉ. अनुज के मुताबिक Paclitaxel जैसी जीवन रक्षक दवा , जिसकी कीमत रिटेलर को ₹600 पड़ती है , उसकी MRP ₹12,000 तय की जाती है!
एक मरीज को कई बार 20–30 वायल की जरूरत होती है। यानी इलाज नहीं, सीधा आर्थिक कत्ल।
और ये सिर्फ एक दवा की कहानी नहीं —> ज्यादातर कीमोथेरेपी दवाओं का यही हाल है।
200% मुनाफा भी समझ आता है, लेकिन 1900% मार्जिन? वो भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में?
अब सवाल सीधे सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से 🔥
दवाओं की कीमत पर कोई सख्त नियंत्रण क्यों नहीं?
NPPA और ड्रग कंट्रोलर क्या सिर्फ कागजों में हैं?
क्या गरीब का इलाज सिर्फ अमीरों के लिए छोड़ दिया गया है?
क्या मुनाफा इंसान की जान से बड़ा हो गया है?
इलाज से पहले दवा खरीदने में ही लोग मर जाएं — यही नीति है?
कैंसर से कम और “दवा माफिया” से ज्यादा लोग मर रहे हैं।
ये बीमारी का इलाज नहीं, मरीज की लूट है।
कब लगेगी इस पर लगाम? और जिम्मेदारी कौन लेगा?