मध्य प्रदेश सरकार केवल राज्यसभा सीट जीतने के लिए जुगाड़बंदी कर रही है। प्रदेश की कानून व्यवस्था भगवान भरोसे हैं।इस औरत की आवाज से कलेजा कांप रहा है या नहीं @CMMadhyaPradesh , मेरा तो कलेजा फट रहा है। मुझे मनुष्य होने पर शर्म आ रही है।
सतना के नागौद बस स्टैंड के पास मजदूर से मारपीट का यह वीडियो है। मजदूर की पत्नी छोड़ देने की मिन्नते कर रही है। गरीबों, मजलूमों के लिए अपराध प्रदेश में बदलते जा रहे एमपी में पुलिस सो रही है क्या?
अगर थोड़ी सी भी संवेदना शेष है तो जो मार रहा है उसका कल जुलूस निकाल कर दिखाइयेगा। यह वीडियो में पिछले कई घंटों से अलग अलग जगहों पर देख रहा हूं और मर रहा हूं।
यह मुर्दों का देश, कोई बचा लो न इसको
📍#UGCRegulations
क्या आपने कभी ठहरकर यह सोचा है कि भारत के कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में “ब्राह्मण भारत छोड़ो” जैसे नारे इतनी सहजता से कैसे लग जाते हैं?
ये नारे अचानक नहीं उगते—इनके पीछे सोच भी है और सोचने वाले लोग भी। 🤔
एक दिलचस्प सवाल है
क्या आपने कभी किसी ईसाई समाज में यह कहते सुना है कि “हमारे पादरी या फादर काम नहीं करते, दान-दक्षिणा पर पलते हैं”?
या किसी मुस्लिम समाज में यह तंज सुना है कि
“हमारे मौलवी-मौलाना कोई नौकरी नहीं करते, दान पर ज़िंदा हैं”?
शायद नहीं।
लेकिन यही बात ब्राह्मणों के लिए कहना आज प्रगतिशील सोच मान ली जाती है, ख़ासकर सोशल मीडिया और कैंपस की राजनीति में।
आख़िर निशाना हमेशा एक ही क्यों ❓
यह कोई संयोग नहीं है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्मांतरण का संगठित विरोध हुआ, मुग़ल काल में सबसे आगे ब्राह्मण खड़े थे।
परिणाम? तलवारें, कत्लेआम, चुन-चुनकर हत्या ⚔️
ब्रिटिश काल में आज़ादी की लड़ाई में हर वर्ग ने बलिदान दिया—इसमें कोई विवाद नहीं।
लेकिन आँकड़े बताते हैं कि सबसे ज़्यादा फाँसियाँ, सबसे ज़्यादा दमन, ब्राह्मणों ने ही झेला 😔
आंध्र प्रदेश में रज़ाकारों के अत्याचारों की घटनाएँ भी दर्ज हैं— जहाँ जिन गाँवों पर हमला हुआ, वहाँ पहले ब्राह्मणों को चिन्हित कर मारा गया।
यह भावुक कथा नहीं, दस्तावेज़ी सच्चाई है।
आज वही इतिहास असहज करता है, इसलिए उसे मौन से या नारों से दबाने की कोशिश हो रही है।
सवाल पूछना गलत नहीं है
लेकिन सवाल अगर चयनात्मक हों और नफ़रत अगर वैचारिक मुखौटे में छुपी हो, तो उसे पहचानना ज़रूरी है।
इतिहास न बदलता है, न माफ़ी माँगता है। उसे नकारने से नहीं, समझने से समाज आगे बढ़ता है। 🕊️
@AshwiniUpadhyay@AmitShah@narendramodi
जिन्होंने BJP के रथ को विजय की पथ पर लाया चाहे हो साधू संत हो या ठाकुर , ब्राह्मण, क्षत्रिय सबको अपने काम निकल जाने पर पैरों की जूती समझ कर उतर के फेकने एक कम किया जाता रहा है ।
टिकट दोगे जाती देखकर, मंत्रालय दोगे जाती देखकर,नौकरी दोगे जाती देखकर,आरक्षण दोगे जाती देखकर,मुकदमा भी लिखोगे तो जाती देखकर
फिर स्वर्ण समाज बचाव के लिए आगे आ गया तो वो
जातिवाद हो गया..है कोई जवाब नहीं ना ?
जय भवानी जय परशुराम 🔥✊ #UGC_RollBack
आज सर्वोच्च न्यायालय में हमारी उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें हाल ही में लागू किए गए यूजीसी नियमों को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने यूजीसी नियमों पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
इस बहन से सुनिए कौन है सवर्ण और कौन है सवर्ण समाज , कितना अत्याचार सहेंगे क्या इसी के लिए हमने 543 रियासतें दे दी अपनी और खीस रोड पर आगये ?? पहले एससी/एसटी फिर मंडल कमीशन और अब यूजीसी एक्ट ।
#यूजीसी_वापस_लो#feb1bharatband
दीपक मिश्रा भाजपा पीलीभीत सोशल मीडिया विभाग
Join me on NaMo App in the journey to transform India.
Click https://t.co/aoaqTZCoN9
&
enter code 1P3ZK7-F