हम सहमत हैं कि अस्पताल में कार्यरत मरीजों की privacy, dignity aur confidentiality बरकरार रहनी चाहिए। पर इसकी आड़ में अगर आप मीडिया को अस्पताल परिसर के भीतर से कवरेज करने से रोकेंगे तो यह कतई उचित नहीं है।
रांची के सिविल सर्जन डॉ अमरेंद्र प्रसाद इस तुगलकी व्यवस्था के नए तुगलक बनकर उभरे हैं।स्वास्थ्य मंत्री माननीय डॉक्टर @IrfanAnsariMLA जब मरीजों के साथ मिलते है और बोलकर फोटो खिंचवाते हैं तो उस समय मरीजों की निजता भंग नहीं होती है सिविल सर्जन साहब?
लेकिन सिस्टम की कमियां दिखाने वाले मीडिया के प्रवेश को रोकने के लिए ये तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया।
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आजकल माननीय विधायक @Tigerjairam और एक थाना प्रभारी के बीच का वायरल वीडियो चर्चा में है। इस वीडियो के बाद थाना प्रभारी ने मुकदमा भी दर्ज किया। जांच से ही पूरे मामले की सत्यता सामने आती।
लेकिन थाना प्रभारी के द्वारा दर्ज मुकदमे में पुलिस एसोसिएशन के द्वारा सीधे गिरफ्तारी की मांग आश्चर्जनक है। बीएनएस में पहले नोटिस देकर आरोपी के पक्ष जानने का प्रावधान है।यहां सीधे गिरफ्तारी की मांग क्यों ?
तो क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में झारखंड पुलिस इसी तरीके से काम करती है? पहले गिरफ्तारी और उसके बाद जांच! सोचिए जब एक माननीय विधायक के साथ ऐसा हो सकता है तो झारखंड की आदिवासी मूलवासी जनता को थानों में क्या झेलना पड़ता होगा!
झारखंड आंदोलन के क्रम में सर्वदलीय अलग राज्य संघर्ष समिति के जुलूस का नेतृत्व करते पिताजी न्यायमूर्ति एलपीएन शाहदेव जी की यह तस्वीर। देश के इतिहास का संभवत पहला मौका था जब आंदोलन के क्रम में किसी पूर्व न्यायमूर्ति की गिरफ्तारी हुई हो।
झारखंड के पहले भूमिपुत्र न्यायमूर्ति से लेकर सड़कों पर उतरकर झारखंड के लिए संघर्ष की अविस्मरणीय गाथा।न्यायिक सेवा में आने से पहले पिताजी रांची सिविल कोर्ट में एक वकील थे।
गर्व है मुझे कि मैं ऐसे परिवार से आता हूं जिसने झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में अपना अमिट छाप छोड़ था।
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आज कोतवाली थाने में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एक नया मुकदमा दर्ज हुआ।बड़ा प्रश्न है कि शिकायतकर्ता महिला के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा रांची जिला के वरीय नेता हेमलाल मेहता क्या कर रहे हैं? शिकायतकर्ता खुद झामुमो से जुड़ी हुई बताई जाती हैं। मुख्यमंत्री जी आप फिर से छात्र शक्ति को अंडरस्टीमेट कर रहे हैं। बड़े-बड़े तानाशाहों के राजपाट को इसी छात्र शक्ति ने पलटा है। उम्मीद है @ranchipolice बिना जांच किए छात्रों पर फर्जी मुकदमे नहीं करेगी।
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झामुमो कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी देखनी है तो इस वीडियो को देखें। जिला अध्यक्ष मुस्ताक आलम के नेतृत्व में झामुमो कार्यकर्ताओं ने छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनका पुतला छीन लिया।झामुमो कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने लाठियां से छात्रों को पीटा भी। कई जख्मी छात्र अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस भी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करती रही।
उम्मीद है इस पर संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई होगी @HemantSorenJMM जी। बंगाल में ममता बनर्जी के हश्र को मत भूलिएगा माननीय।
Vc - Pintu dubey
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चिट्ठी नहीं राहुल जी, हिम्मत दिखाइए अगर आप सच में छात्रों का साथ है तो समर्थन वापस लीजिए!
छात्र आंदोलन को लगभग एक महीना होने जा रहा है। छात्र सड़क पर हैं, भूख हड़ताल पर हैं, बारिश में भीग रहे हैं और अपने भविष्य के लिए न्याय मांग रहे हैं।
अगर आपको सचमुच छात्रों की इतनी ही चिंता है, तो आप अब तक झारखंड क्यों नहीं आए?
आपको सभी चीजों के लिए समय है लेकिन झारखंड के उन छात्रों के बीच आने का समय नहीं है, जिनके भविष्य की चिंता का आज आपको पत्र लिखकर दिखावा करना पड़ रहा है?
गजब की राजनीतिक दोगलापन है!
राहुल जी जिस सरकार को आपने पत्र लिखा है, वह आपकी ही गठबंधन की सरकार है।
अगर छात्रों की सही में आपको परवाह है तो चिट्ठी क्यों?
@HemantSorenJMM जी को एक फोन करिए और विनम्रता से साफ-साफ कहिए छात्रों की मांगें मानिए, अन्यथा कांग्रेस अपना समर्थन वापस लेगी।
लेकिन ऐसा करने का आपकी हैसियत नहीं, क्योंकि आपको पता है कि कांग्रेस की अस्तित्व क्या है परजीवी बनकर किसी तरह सरवाइव कर रही है कांग्रेस।
और राहुल गांधी जी, आपके पत्र में भाजपा और RSS का भी जिक्र है।
जरा यह भी बताइए,
झारखंड में भर्ती व्यवस्था की जिम्मेदारी किस सरकार की है?
झारखंड में सरकार आपकी सहयोगी पार्टी चला रही है, फिर हर बात में भाजपा और RSS क्यों?
अब तो लगता है भाजपा का नाम लेना आपके राजनीतिक विमर्श का ऑटोमैटिक रिप्लाई बन चुका है।
छात्र आंदोलन करें- भाजपा!
छात्र सवाल पूछें - भाजपा!
पेपर लीक हो- भाजपा!
सरकार जवाब न दे पाए- फिर भाजपा!
और आपकी उस बात पर भी जबाव जरूरी है, जिसमें आपने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को RSS और BJP के कब्जे में होने की बात कही है।
@RahulGandhi जी आप को असल तकलीफ शायद यह है कि शिक्षा में भारत के इतिहास, उसकी सभ्यता, उसके नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, और इस मिट्टी के वास्तविक नायकों को उनका उचित स्थान देने की बात हो रही है।
आप की सरकार में जिन मुगलों और दूसरे विदेशी आक्रांताओं को वर्षों तक इतिहास में जरूरत से ज्यादा महिमामंडित किया गया, उनके बजाय भारत के भूमि-पुत्रों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों की भूमिका को प्रमुखता से पढ़ाया जाए, क्या इससे आपको परेशानी है?
आप की इसी सोच को अगर कोई नाम देना हो तो इसे दिमागी नक्सलवाद कहना गलत नहीं होगा।
जहां हर राष्ट्रवादी विचार दुश्मन दिखाई देता है, हर भारतीय गौरव की बात कट्टरता लगती है और हर समस्या का जिम्मेदार भाजपा को बताना ही राजनीतिक तर्क बन जाता है।
राहुल गांधी जी,
छात्रों को आपकी चिट्ठी नहीं, न्याय चाहिए।
नाटक नहीं, समाधान चाहिए।
चिट्ठी और कॉल नहीं, जिम्मेदारी चाहिए।
अगर सच में छात्रों के साथ हैं तो झारखंड आइए।
हेमंत सोरेन जी से मिलिए।
छात्रों से मिलिए।
उनकी मांगें पूरी करवाइए।
वरना यह चिट्ठी भी छात्रों के नाम पर की गई एक और राजनीतिक रस्म ही मानी जाएगी।
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कांग्रेस के प्रवक्ता के झूठ को मैने नेशनल टीवी पर एक्सपोज कर दिया। वह कह रहे थे कि मंत्री इरफान अंसारी एवं अन्य मंत्री धरना स्थल पर गए थे।उल्टे इरफान अंसारी ने तो कहा था कि लाठी चार्ज ही नहीं हुआ।पुलिस वालों को ही पीटा गया।
दूसरी ओर हमारे माननीय प्रदेश अध्यक्ष @AdityaPdSahu जी, माननीय नेता प्रतिपक्ष @yourBabulal जी के साथ धरना स्थल पर हमारे विधायक और पदाधिकारी गए थे और छात्रों के आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया था।
On @News18India #Debate
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एक के बाद एक रोज हो रहे हैरान कर देने वाले ख़ुलासे के बावजूद कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर JSSC-CGL को रद्द करने में मजबूरी बता रही झारखंड सरकार को JSSC के प्रभारी चेयरमैन आईएएस प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता को फ़ौरन पद से मुक्त कर उनपर एफआईआर और कारवाई न करने में कौन सी मजबूरी है?
JPSC घोटाले में इस्तीफ़ा देने वाले ख्यांगते जेल चले गये तो JSSC घोटाले में इस्तीफ़ा देने वाले नीरज सिन्हा पर मेहरबानी क्यों? क्या ऐसा इसलिये कि ख्यांगते आईएएस रहे हैं और नीरज सिन्हा आईपीएस, जिनपर झारखंड पुलिस के उनसे जूनियर आईपीएस अधिकारी उन्हें बचाकर “चोर-चोर मौसेरा भाई” का गेम खेल रहे हैं?
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, इन सवालों का जबाब आपको इन आंदोलनकारी छात्रों को देना ही होगा। आपकी नीयत साफ है तो पहले ये सब कारवाई करिये, घूस देकर नौकरी पाये जिन दस-बारह लोगों के नाम वायरल हो रहे हैं उन्हें बिना देर किये पद से हटाईये और उनपर एफआईआर करिये। छात्रों की मांग के अनुसार सारे मामले सीबीआई के हवाले करिये। इसके बिना आप आंदोलन को समाप्त कराने के लिये फूट डालने, डराने धमकाने सहित जितने भी हथकंडे अपना लें ये आंदोलन ख़त्म होने वाला नहीं है।
@ANI@PTI_News@ians_india@JPSCreformanch
गजब की थेथरलॉजी है झारखंड मुक्ति मोर्चा वालों की!
आज पूरा झारखंड देख रहा है कि अपने हक-अधिकार और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे छात्र किस पीड़ा से गुजर रहे हैं। जो युवा अपनी जान की परवाह किए बिना अनशन पर बैठे हैं, सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लाठियां सह रहे हैं, उनकी तपस्या और संघर्ष पर सवाल उठाकर उन्हें बहकाया हुआ बताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और छात्रों का त्याग तपस्या और संघर्ष का अपमान है।
ये किसी बड़े घराने के बच्चे नहीं हैं। ये झारखंड के गरीब, आदिवासी, मूलवासी और सामान्य परिवारों से आने वाले मेहनती अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और उम्मीद के सहारे सरकारी नौकरी का सपना देखा था। अगर व्यवस्था पर सवाल उठाना भी अब बरगलाना कहलाएगा, तो फिर लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ कहाँ सुनी जाएगी?
और रही बात आदरणीय श्री @yourBabulal जी की वे हमेशा झारखंड के युवाओं, छात्रों और आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाते रहे हैं। छात्रों के साथ खड़ा होना कोई अपराध नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।
छात्रों को कौन भड़का रहा है और कौन उनके साथ खड़ा है, यह तय करने के लिए JMM के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।
झारखंड के छात्र और जनता बहुत समझदार हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि उन्हें कौन बरगला रहा है। तीन-तीन, चार-चार दौर की बैठकों के बाद भी जब छात्रों की जायज़ मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता और हर बार मंत्रियों की ओर से सिर्फ आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, तो असली बरगलाना इसे ही कहते हैं।
छात्र महीनों मेहनत करके परीक्षा देते हैं, अपने भविष्य की उम्मीद लेकर सरकार के दरवाजे पर पहुंचते हैं और बदले में उन्हें बार-बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। अब वे अपने हक के लिए आवाज़ उठा रहे हैं तो उन्हें बहकाया हुआ बताना छात्रों के संघर्ष का अपमान है।
@JmmJharkhand शर्म करे, छात्रों को बदनाम करने की राजनीति बंद करे और उनके सवालों का जवाब दे।
युवाओं की आवाज़ को बहकावा बताना बंद कीजिए, क्योंकि झारखंड की जनता सब देख रही है, कौन आश्वासन दे रहा है और कौन न्याय की आवाज़ उठा रहा है!
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@AdityaPdSahu@bjpkarmveer@itssuniltiwari
नाजी जर्मनी में हिटलर का एक प्रचार मंत्री थथा जोसेफ गोएबल्स।उनका प्रसिद्ध सिद्धांत था - THE BIG LIE. यानी एक ही बड़े झूठ को 100 अलग-अलग जगह से बोलो तो लोग उसे कुछ समय के लिए सच मानने लगते हैं।
आगे कुछ लिखने की जरूरत नहीं है।
स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं।
जोहर रहेगा मेरे भाई 🙏🙏
अब समझ में आ रहा है कि हजूर को CBI जांच से इतनी परेशानी क्यों है!
पूरे मामले को CID के हवाले करके लीपापोती की कोशिश क्यों की जा रही है?
क्या सरकार को डर है कि निष्पक्ष जांच हुई तो बड़े-बड़े नाम बेनकाब हो जाएंगे?
और अब @JmmJharkhand गिरिडीह जिलाध्यक्ष से जुड़े वायरल ऑडियो ने सवाल और गंभीर कर दिए हैं। ऑडियो में जिस तरह जुगाड़ और काम कराने की बातें सामने आ रही हैं।
@HemantSorenJMM जी बताएं आखिर कितने प्रतिशत में काम कराने की बात हो रही थी?
किसके लिए जुगाड़ बैठाने की बात थी और यह पूरा नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा था?
और जब सरकार पर ही जांच को प्रभावित करने के सवाल उठ रहे हों, तो सरकार की अपनी एजेंसी से जांच करवाना दूध की रखवाली बिल्ली को सौंपने जैसा क्यों न माना जाए?
झारखंड का गरीब युवा 12-12 घंटे पढ़कर अपनी नींद और आराम छोड़कर परीक्षा की तैयारी करता है, उसे भरोसा होता है कि मेहनत के दम पर नौकरी मिलेगी। लेकिन अगर उसी व्यवस्था में पैसे, पहुंच और जुगाड़ की चर्चा होने लगे, तो इससे बड़ा युवाओं के साथ धोखा क्या होगा?
नौकरी कोई राजनीतिक दुकान नहीं है, जिसे पैसे और पहुंच के हिसाब से चलाया जाए।
CID की लीपापोती नहीं, स्वतंत्र और निष्पक्ष CBI जांच कराइए।
युवाओं की मेहनत बिकने नहीं देंगे।
नौकरी के नाम पर जुगाड़ का खेल नहीं चलने देंगे
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@yourBabulal@AdityaPdSahu@bjpkarmveer@itssuniltiwari@pratulshahdeo
जनता को गुमराह करना बंद कीजिए हजूर...
JMM-कांग्रेस आज जनता को भ्रमित कर रही है कि मोदी सरकार झारखंड का खनिज छीनकर दिल्ली ले जा रही है।
पहले कानून पढ़िए, फिर झूठ फैलाइए।
नए MMDR संशोधन में कहीं नहीं लिखा कि झारखंड की जमीन केंद्र की हो जाएगी।
कहीं नहीं लिखा कि झारखंड की रॉयल्टी बंद होगी।
कहीं नहीं लिखा कि झारखंड को खनिजों से मिलने वाला उसका वैधानिक हिस्सा खत्म हो जाएगा।
बदला क्या है?
राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकार और mineral-bearing land पर मनमाने ढंग से नए Tax, Cess और Levy लगाने पर केंद्रीय स्तर से शर्तें और सीमाएं तय होंगी।
यानी अब खनिज क्षेत्र में मनमानी वसूली और अलग-अलग तरह के अतिरिक्त बोझ पर लगाम लगेगी।
खनिज के नाम पर कंपनियों से बार-बार अलग-अलग टैक्स और सेस वसूलने की छूट आखिर किसके हित में थी? जनता के या सरकार की मनमानी वसूली के?
JMM-कांग्रेस के शासनकाल में खनिज क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अवैध खनन को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं। अगर सरकार की वसूली पारदर्शी और प्रभावी थी, तो फिर सवाल यह भी है कि राजस्व की तुलना में अवैध खनन और खनिज तस्करी का कारोबार इतना बड़ा कैसे बना रहा?
अब एक समान और स्पष्ट taxation framework से मनमानी वसूली की गुंजाइश घटेगी, mining sector में transparency और predictability बढ़ेगी तथा अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी।
और रही बात झारखंड के हिस्से की तो ये बात आप भी जानते है @HemantSorenJMM
जी
इस बिल में कहीं नहीं लिखा कि झारखंड की रॉयल्टी खत्म कर दी गई है।
रॉयल्टी में कटौती का कोई प्रावधान नहीं है।
झारखंड की जमीन दिल्ली को हस्तांतरित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
तो फिर आप किस बात का डर दिखा रहे है झारखंड की जनता को।
इस कानून से संभावित फायदे पर नज़र डाले
1. मनमाने अतिरिक्त Tax और Cess पर नियंत्रण
2. mining sector में एक समान और predictable taxation
3. निवेश के लिए बेहतर वातावरण
4. mining और mineral-based industries को बढ़ावा
5. steel, metal और downstream industries को फायदा मिलने की संभावना
6. रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा
7. critical minerals की exploration और production को गति
8. अवैध खनन और अनियमितताओं पर कार्रवाई के लिए अधिक व्यवस्थित regulatory framework
lithium, cobalt, graphite जैसे रणनीतिक खनिजों की exploration और production बढ़ाने से भारत की energy security, EV, electronics और manufacturing को मजबूती मिलेगी।
खनिज के नाम पर डर फैलाना बंद कीजिए हेमंत जी कानून पढ़िए, तथ्य बताइए और जनता को गुमराह मत कीजिए।
#Jharkhand #MMDRAmendmentBill2026 #MineralResources
@yourBabulal@AdityaPdSahu@bjpkarmveer@kishanreddybjp@KishanReddyOfc@itssuniltiwari@pratulshahdeo
पूरा खनिज तो भ्रष्टाचारी सरकारी संरक्षण में लूट-खा गई झामुमो-कांग्रेस-राजद और अब देखिए इनके बोल-बच्चन!
खुद इस्तीफा देने से बचने और CBI जांच से भागने के लिए एक महाषड्यंत्र रचा जा रहा है!
छात्र आंदोलन से मुद्दे को डायवर्ट करने का प्रयास मुख्यमंत्री कर रहे हैं। अपनी पार्टी JMM को झारखंड में अराजकता फैलाने के लिए खुलेआम उकसा रहे हैं। कारण सिर्फ एक है, लोगों का ध्यान छात्रों के आंदोलन, उनकी मांगों और सरकार की जवाबदेही से भटक जाए!
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी का भी यही आचरण था। जनता इतनी परेशान हो गई कि उसने हिसाब कर दिया!
जहां तक केंद्र सरकार को धमकी देने की बात है, मुख्यमंत्री जी, अगर छात्रों पर दमन से फुर्सत मिल गई हो तो थोड़ा समय निकालकर संविधान पढ़ें।
हमारा देश एक संघीय गणराज्य है। इसमें केंद्र और राज्य की शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
लेकिन संविधान और व्यवस्था के दायरे में काम करने के बजाय केंद्र से टकराव मोल लेना और राज्य में अराजक स्थिति पैदा करना ही इनकी मंशा दिखाई देती है।
सवाल सीधा है - आखिर मुख्यमंत्री जी छात्रों के सवालों का जवाब देने, निष्पक्ष CBI जांच की अनुशंसा करने और अपनी जवाबदेही तय करने के बजाय हर रोज एक नया विवाद क्यों खड़ा कर रहे हैं?
छात्र सवाल पूछ रहे हैं, मुख्यमंत्री मुद्दे बदल रहे हैं!
@narendramodi@PMOIndia@AmitShah@NitinNabin@blsanthosh@kishanreddybjp
हेमंत सोरेन जी को लगता है वो झारखंड के युवाओं को अपनी पुलिस के दम पर डरा लेंगे, मुख्यमंत्री जी ये झारखंड के छात्र आपकी तरह राजनीति चमकाने वाले लोग नहीं है, ये अपनी भविष्य के लिए लड़ रहे है, थोड़ी मानवता दिखाइए और इनसे बात कर बिना किसी शर्त की इनकी माँग मानिए।
झारखंड और पूरा देश आपको संवेदनहीनता देख रहा है।
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इनको कांके या आगरा में जाके इलाज कराना चाहिए। दरअसल “कोलकाता साड़ी कांड” की यातना और ज़लालत झेलने के बाद से ही ये आये दिन अलबल बोलते रहते हैं। यू हीं नहीं इन्हें “झारखंड का पप्पू” कहा जाता है भाई।
कल छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान सरकार के आदेश पर प्रशासन द्वारा जिस तरह की बर्बरता की गई, वह बेहद दुखद और निंदनीय है। छात्रों पर लाठी, बल और दमन का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
छात्रों की आवाज़ लाठी और बंदूक के बल पर दबाई नहीं जा सकती। सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर संवेदनशीलता के साथ छात्रों की जायज़ मांगों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
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