शिक्षक भर्ती आंदोलन में यूनिटी का अभाव नजर आया। कुछ छात्र नेता ही आंदोलन को कमजोर करने में लगे रहे। कह सकते हैं कि आखिर में वह जीत भी गए।
मैं शिक्षक भर्ती समेत युवाओं के तमाम आंदोलन कवर करता रहा हूं। लेकिन जितनी विषमता इस आंदोलन में होती है उतना कहीं नहीं नज़र आती।
आंदोलन कमजोर होगा तो स्वाभाविक है कि जिस प्रेशर को बनाने के लिए आप बैठे थे वह नहीं बन पाएगा।
🚨 प्रयागराज में 1 लाख सहायक अध्यापक भर्ती की मांग को लेकर प्रशिक्षित अभ्यर्थी UPSSSC के बाहर बेमियादी धरने पर बैठे @myogiadityanath जी, 2018 से नई शिक्षक भर्ती क्यों नहीं? UP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 51,112 रिक्त पद स्वीकारे, RTI में 1.73 लाख, संसद में 2.17 लाख पद खाली बताए है फिर भी
#UPTeacherRecruitment
बड़े पैमाने पर छात्र नौकरियों को लेकर के धरने पर बैठे हुए है...कोई सुनवाई नहीं है सरकार में. विज्ञापन निकला और कुछ देर बाद विज्ञापन डिलीट कर दिया गया...बताओं पेपर लीक की सिल्वर जुबली मन रही है इनकी... कोई कल्पना कर सकता है. पेपर लीक की क्वार्टर सेंचुरी लग चुकी है. अ�� तक..
पेपर लीक मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बड़ा बयान
@yadavakhilesh @samajwadiparty #UttarPradesh #BreakingNews
"गुरु बनना चाहा था, गुनहगार बना दिए गए!"
प्रिय उत्तर प्रदेश,
तुम्हारी गलियों में आजकल सिर्फ़ इम्तिहान के नोट्स नहीं, गुस्से की चिट्ठियाँ भी घूम रही हैं। हाथों में किताबें नहीं, नाराज़ग��� के पोस्टर हैं। और हो भी क्यों ना? ये कोई नई मांग नहीं है, बल्कि पुरानी उम्मीदों की राख़ से निकला हुआ धुआं है—जो अब आंखों में जलन बनकर भर गया है।
बेरोज़गारी कोई आंकड़ा नहीं होता, जनाब। ये सुबह 6 बजे उठकर एडमिट कार्ड ढूंढने वाली बेचैनी होती है, ये ट्रेन की जनरल बोगी में धक्के खाते हुए परीक्षा देने जाने वाली उम्मीद होती है, ये पसीने में लथपथ होकर खाली लौट आने की चुप्पी होती है।
और यूपी के नौजवानों ने ये सब सहा है- सालों तक। हर बार परीक्षा होती है—और हर बार रद्द हो जाती है। हर बार पेपर छपता है—और हर बार लीक हो जाता है। हर बार सरकार आश्वासन देती है—और हर बार विश्वास टूट जाता है, लेकिन मैं ख़त पेपर लीक से नाराज़ होकर नहीं लिख रहा हूं, बल्कि इसलिए लिख रहा हूं, क्योंकि तुम्हारी सड़कों पर आजकल नारे हैं—
“हम शिक्षक बनना चाहते हैं, पर सरकार हमें लाठी बना रही है।” "हम उत्तरप्रदेश के बच्चों का भविष्य संवारना चाहते है, लेकिन सरकार भर्ती नहीं देती।"
एक ओर बेरोज़गारी की आग है, दूसरी ओर उस पर घी डालता शिक्षक भर्ती घोटाला।
कभी पेपर लीक, कभी सूची गायब, कभी मेरिट में हेरफेर, और कभी लाठियाँ- तुमने इन युवाओं को क्या दिया, सिवाय इंतज़ार, अपमान और अधूरे सपनों के।?
2019 में घोषित इस 69000 शिक्षक भर्ती में इतनी गड़बड़ियाँ हुईं कि कोर्ट ने कई बार रोक लगाई। मेरिट लिस्ट में अंक जोड़ने में घपला किया गया। RTI से पता चला कि कई अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल गई जबकि असली मेधावी बाहर रह गए।
फिर बात आती ��ै, 17000 सहायक अध्यापक भर्ती (2018) की, जो
अभी तक पूरी नहीं हो पाई। सरकार की सुस्ती और काउंसलिंग में घपलों ने हजारों युवाओं को अटका दिया।
फिर अगर बात UP TET और SUPER TET की करें तो तुम्हारी पवित्र धरती पर चल रहे घोटाले से तुम्हारा होश उड़ जाएगा।
हर साल परीक्षा के नाम पर युवाओं का भरोसा लिया जाता है, और फिर पेपर लीक कर सब क��छ ज़ीरो से शुरू करा दिया जाता है। 2021 में TET पेपर लीक होने से 20 लाख छात्र प्रभावित हुए।
तुम्हारी सुबहें अब स्कूल की घंटियों से नहीं, धरना स्थलों के नारों से शुरू होती हैं। कभी लखनऊ की सड़कों पर, कभी प्रयागराज के गलियारों में- जहाँ पहले बच्चों की किलकारियाँ गूंजती थीं, अब वहां बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ें गूंज रही हैं- “हमें हमारा हक़ चाहिए!”
प्राथमिक शिक्षक भर्ती - एक टूटी हुई उम्मीद की कहानी, 69,000 ���िक्षक भर्ती, जिसे तुमने “बड़ी उपलब्धि” बताया था,वहीं से शुरू हुई एक ऐसी दास्तान, जो अब थक चुकी है, पर रुकी नहीं। कहते हो ‘शिक्षा का मंदिर’,
पर वहाँ तक पहुँचने से पहले ही,अध्यापक को तोड़ देते हो तुम।
जब शिक्षक ही सड़क पर है…तो छात्र कहाँ जाएगा।? आज जो अभ्यर्थी शिक्षक बनना चाहता है,वो बेरोज़गार भी है, अपमानित भी, और उपेक्षित भी।उसने B.Ed किया, D.El.Ed किया, TET पास किया,हर शर्त पूरी की…सिर्फ ये नहीं किया कि किसी मंत्री के रिश्तेदार बने।
लेकिन सरकार, जिसके पास “बुलेट ट्रेन” का सपना है,पर एक शिक्षक की नियुक्ति की ट्रेन 5 साल से प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी है।
आपके पास “विश्वगुरु” बनने की योजना है,पर गुरु को ही सड़कों पर बर्बरता से कुचला जाता है, एक जमाने में इंसान गुरु का शिष्य बनने के लिए हर तपस्या पूरा करता था, लेकिन आज इंसान गुरु बनने के लिए भरी दोपहर में पसीना पोछते हुए सड़क पर लड़ते है।
आप कहते हैं—"शिक्षा प्राथमिकता है",पर लगता है, सिर्फ प्राथमिक शिक्षक ही प्राथमिक नहीं हैं।
लेकिन,एक सवाल जो हर गले में फंसा है:“सरकार क्यों डरती है योग्य शिक्षक से?” क्यों हर बार कोर्ट के दरवाज़े खटखटाने पड़ते हैं?
क्यों सैकड़ों सीटें खाली पड़ी हैं, पर नियुक्तियाँ नहीं होती।?
प्रिय प्रदेश,जो युवा “पढ़ाने” आया था,अब “संघर्ष” सिखा रहा है।
आप चाहे जितना दबा लें,हर गिरे हुए निय���क्ति पत्र से एक आंदोलन खड़ा हो रहा है। और एक दिन इतिहास पूछेगा कि जब इस देश के युवाओं ने chalk और blackboard उठाने की ठानी थी,
तो सरकार ने उन्हें लाठियां और मच्छरों से भरा हुआ रात और सड़कों का बिछावन दिया था।
खैर! एक गाना मेरे कमरे में गूंज रही है, " सारी उम्र तो मर - मर के जी लिए, एक पल तो हमें जीने दो, जीने दो...."
एक बेचैन छात्र।
चाय इश्क और राजनीति।
Prayagraj...
DELED, TET पास बेरोजगार हुए उग्र, दोनों गेटों को अभ्यर्थियों ने किया जाम.
आयोग के कर्मचारी कार्यालय ��ें कैद, सरकार और बेसिक शिक्षा मंत्री से की मांग.
जल्द भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की, शिक्षा सेवा चयन आयोग के बाहर धरना जारी...
पिछले 7 वर्षों से छात्र लगातार भर्ती की मांग कर रहे हैं, परंतु इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस और सतर्क रुख देखने को नहीं मिला है। अब तक छात्र कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, और आज भी एक और धरना जारी है। यह स्थिति आखिर कब तक चलेगी? सरकार या संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे भर्ती देंगे या नहीं। यदि भर्ती देनी है, तो स्पष्ट रूप से बताएं कि कब तक दी जाएगी। बार-बार छात्र धरने पर नहीं बैठ सकते, यह उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
BTC और B.Ed. दोनों के लिए शिक्षक भर्ती जल्द से जल्द निकाली जाए।
हमारी बस एक ही माँग है शिक्षक भर्ती दे सरकार
#UpShikshakBharti #शिक्षकभर्ती
प्रयागराज -DELED, TET पास बेरोजगार हुए उग्र, दोनों गेटों को अभ्यर्थियों ने किया जाम
आयोग के कर्मचारी कार्यालय में कैद, सरकार और बेसिक शिक्षा मंत्री से की मांग
जल्द भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की, शिक्षा सेवा चयन आयोग के बाहर धरना जारी
#Prayagraj@prayagraj_pol