तो सुबह नींद में से उठो। प्रार्थना करो कि हमें झूठ, कपट, बेईमानी, भोग, संग्रह, शरीर और संसार की आसक्ति मिटाने की सत्बुद्धि दे, महाराज। इतना आप कर सकते हैं, इसमें कोई जोर नहीं आएगा। तेरे तरफ प्रीति दे दे, क्योंकि हम जीवात्मा चैतन्य परमात्मा के हैं। शरीर जड़ है, परिवर्तनशील है और हमारा नहीं है, महाराज, यह हम अब समझे हैं। शरीर मैं नहीं हूँ, शरीर मेरा नहीं है। अगर मेरा होता तो महाराज, मेरे कहने में चलता। अब खोपड़े में बात समझ आ गई। शरीर मेरा होता तो मेरे कहने में चलता। मैं चाहूंगा क्या बाल सफेद हो जाए, झुर्रियाँ पड़ जाए, बीमार हो जाए या मर जाए। कोई नहीं चाहता, तो शरीर हमारे कहने में नहीं चलता और शरीर हम नहीं हैं। फिर भी महाराज, आपकी माया आप ही हरिए हरि और आपकी कृपा आप ही भरिए, महाराज। हम अब आपके सन्मुख होना चाहते हैं। हमारी ताकत नहीं है, तुम्हारी कृपा और दया चाहते हैं। #AsharamjiBapu
भगवान राम के गुरुदेव वशिष्ठ महाराज कहते हैं कि ये जो केंचुए पेट के बल से रेंग रहे हैं, साँप, केंचुए और दूसरे तुच्छ जीव कभी मनुष्य थे, लेकिन मनमानी करते-करते, करते-करते इस नीच गति को प्राप्त हुए और सहशस्त्र-नेत्रधारी जो इंद्र हैं, वे शास्त्र, सत्संग, सत्कर्म करते-करते, करते-करते देवताओं से सम्मानित हो गए।
इसीलिए हे राम जी! भाग्यवाद को दूर से ही त्याग दो। जो भाग्य में लिखा होगा, वो होगा। इस जीव को जैसे-जैसे कर्म, जैसा-जैसा संग, जैसा-जैसा पुरुष ऐसे-ऐसे फल को प्राप्त होगा।
#AsharamjiBapu
Sant Shri Asharamji Bapu के सत्संग पर आधारित सत्साहित्य Madhur Vyavahar की कुंजियाँ लोगों के जीवन में बहुत परिवर्तन ला रही हैं।
जैसे- कहने के ढंग में मामूली अंतर से कार्यदक्षता पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
मिलजुलकर काम करना है तो अपने अहंकार को दूसरों पर नहीं लादें।
#WisdomQuotes
Sant Shri Asharamji Bapu कहते हैं: Madhur Vyavahar का जीवन जीना चाहिए। प्रतिदिन कुछ समय गीता, रामायण व अन्य सद्ग्रंथों के स्वाध्याय, स्तोत्र-पाठ, भगवन्नाम-जप तथा भगवत्पूजन में लगाना चाहिए। विकार पैदा करनेवाला अश्लील साहित्य न पढ़ें, न चित्र देखें, न वार्तालाप करें।
#WisdomQuotes
Madhur Vyavahar केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि श्रेष्ठ जीवन जीने की दिशा दिखाने वाली प्रेरणादायी मार्गदर्शिका है । संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी से संकलित यह पुस्तक हमें उत्तम आचरण का महत्व समझाती है। जो इन #WisdomQuotes को अपनाता है उसका जीवन सुख, शांति से भर जाता है ।
#WisdomQuotes : Atman is Truth Absolute, Knowledge Absolute & Bliss Absolute & body is unreal, inert & pain giving. It did not exist in past & will cease to exist in future.
Quotes from discourses of Sant Shri Asharamji Bapu & literature like Madhur Vyavahar pave path to peace.
संत श्री आशारामजी बापू Charitra Nirman पर बल देते हुए कहते हैं: विदेशी चैनलों, सिनेमा और गंदे साहित्य से दूर रहकर अपनी गौरवमयी भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों को अपनाकर #Brahmacharya का दृढ़तापूर्वक पालन करते हुए संयमी, सदाचारी बनकर अपने देश की खोयी हुई गरिमा को स्थापित करें।
आपकी बुद्धि में ये बिठा दो कि परमात्मा का सुख पाना ही सार है। हमारा आत्मा अनंत है और परमात्मा अनंत हैं। हमारा अंत नही होगा, शरीर का अंत होगा, हमारी मौत नही होती और परमात्मा एक रस है। आत्मा सदा है, परमात्मा सदा है।
शरीर भी बदलता है, संसार भी बदलता है, तो बदलनेवाले के लिए मांग मांग कर मजूरी करके युग बीत गए, अब तो अबदल की ही मांग पैदा हो। ज्यों भगवान की गरिमा, भगवान की मधुरता, भगवान का सामर्थ्य सत्संग के द्वारा सुनोगे, त्यों बुद्धि में भगवद प्राप्ति की मांग की जगह बढ़ेगी। ज्यों संसार की पोलपट्टी विचार करोगे, त्यों-त्यों संसार की मांग की जगह घटेगी।
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गीता के छठे अध्याय में भगवान कहते हैं कि तपस्वी से भी योगी अधिक है, ज्ञानी से भी योगी अधिक है, कर्मी से भी योगी अधिक है इसलिए अर्जुन, तू योगी होना । योग का मतलब है मेल । अपने आत्मा-परमात्मा से मेल रखते रहना ।
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मुस्कुरा के गम का जहर जिनको पीना आ गया। यह हकीकत है कि जहां में उनको जीना आ गया। फरियाद मत कर। रामतीर्थ बोलते थे, "हे भगवान! हे God, you forgot me। हे प्रभु! तुम मुझे भूल गए क्या? नई मुसीबत भेजो, जिससे शक्ति और आनंद बढ़े मेरा।" तुमने तो क्या देखी है मुसीबत? द्रोपदी की मुसीबत के आगे तुम्हारी मुसीबत क्या है? शबरी की तकलीफों के आगे तुम्हारी तकलीफें क्या है? ध्रूव और प्रहलाद की मुसीबतों के आगे, धन्ना जाट की मुसीबतों के आगे, लीलाशाह बापू की मुसीबतों के आगे तुम्हारी मुसीबतें क्या है? समर्थ रामदास और शिवाजी की मुसीबतों के आगे तुम्हारी मुसीबतें कुछ भी नहीं है। फिर भी मस्ती से जीना जानते थे। मैं भगवान का हूँ। मैं चेतन हूँ। मुसीबतें जड़ है। मुसीबतें आने जाने वाली है। मैं सदा रहने वाला हूँ। शरीर पैदा होने वाला, बीमार होने वाला, तंदुरुस्त होने वाला, मरने वाला। लेकिन मैं तो अमर आत्मा हूँ। हम हैं अपने आप, हर मुसीबतों के बाप। हरि ओम्मा! हरि ओम्मा! ओम्मा!
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