‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के ख़िलाफ़ एक और गहरी साज़िश है। आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं।
भाजपा व उनके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते हैं या कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात करते हैं या ‘आरक्षण त्यागने’ की सलाह देते हैं, वो सदियों से शोषित-वंचित लोगों को मिले आरक्षण के अधिकार की हक़मारी की लगातार की जा रही कोशिश के अलग-अलग मुखौटे हैं।
आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा!
ये भी अजब बात है कि एक तरफ़ तो भाजपा और उनके संगी-साथी अपने लोगों को प्रोटेस्टर्स के बीच भेजकर युवाओं को गलत साबित करने में लगे हैं; दूसरी तरफ़ जब उन्हें ‘भाजपाई’ कहा जाता है तो वो चिढ़ जा रहे हैं।
आज जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के घर-मकान-दुकान-प्रतिष्ठान व गाड़ियों से भाजपा के झंडे उतरे हैं कल भाजपा भी उनके दिलोदिमाग़ से उतर जाएगी क्योंकि वो भोले-भाले भावुक लोग हैं लेकिन उनमें भी बुद्धि-विवेक है और वो भी भाजपाइयों की निम्नलिखित काली-करतूतों से बेहद-बेहद शर्मिंदा हैं :
1. अयोध्या में ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ का रामघात
2. दिल्ली में बच्चियों तक पर बेदर्दी से प्रहार
3. पूरे देश में युवाओं पर हिंसक प्रहार
4. मुंबई में आंदोलनकारियों को ड्रग्स के झूठे केस में फँसाने की धमकी
5. लखनऊ अग्निकांड में मृतक बच्चे की दुखी माँ तक के साथ उप्र के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया, अति निंदनीय दुर्व्यवहार व माँ का तिरस्कार
अब भाजपा के Paid & Unpaid तथाकथित समर्थक भी अब किसी काम नहीं आ रहे हैं। दरअसल अब वो जनाक्रोश को देखकर घर से बाहर तभी निकल रहे हैं, जब बहुत ज़्यादा मजबूरी हो। इसीलिए मोहल्ले और सोसाइटियों के पार्कों में भी, अब वो बरसाती वायरल बुख़ार या सर्दी-ज़ुकाम के नाम पर तबियत ख़राब होने का बहाना करके नहीं जा रहे हैं, उनके व्हाट्सएप ग्रुप भी ठंडे पड़े हैं।
भाजपा के कट्टर समर्थकों के सामने सबसे बड़ा संकट ये है कि उन्होंने पिछले 10-12 सालों में हर कुतर्क से भाजपा और उनके संगी-साथियों की ढाल बनकर रक्षा की, अपने बचपन के मित्रों, सहपाठियों, सहकर्मियों व सहयोगियों से लड़ाई की लेकिन अब वो भी भाजपा की कारस्तानियों से समझ गये हैं कि असल में वो ख़ुद ही गलत थे, तो वो किस मुँह को लेकर घरों से बाहर निकलें। जिस तरह भाजपा ने लोकतंत्र को ख़त्म किया, सरकारी विभागों-एजेंसियों का भ्रष्टाचारीकरण किया, कमीशनख़ोरी से महंगाई बढ़ाकर लूटा, शिक्षा-परीक्षा में घनघोर धांधली की व भर्ती-नौकरी-रोज़गार की जगह केवल अपने कुछ भाजपा समर्थक गिने-चुने खरबपतियों के लिए श्रमिकों को पैदा करने का काम किया, बलात्कारियों को छुड़वाकर गले में हार डलवाया, दुनिया के सबसे घिनौने अमेरिकी कांड में नाम आने पर भी अपने मंत्री को नहीं हटाया, उत्तराखण्ड हो या उत्तर प्रदेश की बेटी उनके बलात्कारियों को बचाया, लखीमपुर खीरी के थारकांड में किसानों को मारनेवाले के साक्षात् सबूतों को झुठलाया, पीडीए पर हर तरह का अत्याचार किया व उनका आरक्षण मारने के लिए कोर्ट में साज़िशों का जाल बिछाया, संविधान को मिटाने की हर संभव कोशिश की, विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाकर झूठे मुक़दमे किये, बुलडोज़र व एनकाउंटर का अमानवीय दुरुपयोग किया, यहाँ तक कि शंकराचार्य जी पर भी निकृष्टतम आरोप लगाया… ऐसे और भी अनेक कुकृत्य और कुकर्म हैं जिनसे भाजपा का असली चेहरा अब उनके समर्थकों के भी सामने आ गया है।
इसीलिए भाजपा समर्थकों के लिए ये तथाकथित अमृतकाल अब सरेआम अपमान के ज़हर भरे घूंट पीने के ‘विषकाल’ बन गया है।
Hi,
Is this a correct time to put website on maintenance during tatkal ticket booking.
We as citizen of india feel that IRTC website and application are not made for us, because I never get a confirmed tatkal ticket at any cost.
@IRCTCofficial@RailMinIndia
एक ही दिन में दुनिया की तीन धुरंधर पहलवानों को हराने के बाद आज विनेश के साथ-साथ पूरा देश भावुक है।
जिन्होंने भी विनेश और उसके साथियों के संघर्ष को झुठलाया, उनकी नीयत और काबिलियत तक पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए, उन सभी को जवाब मिल चुका है।
आज भारत की बहादुर बेटी के सामने सत्ता का वो पूरा तंत्र धराशाई पड़ा था जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे।
चैम्पियंस की यही पहचान है, वो अपना जवाब मैदान से देते हैं।
बहुत शुभकामनाएं विनेश। पेरिस में आपकी सफलता की गूंज, दिल्ली तक साफ सुनाई दे रही है।
#GoForGold
सर मेरी समझ से बेकार उपाय है।
इसमें नफ़रत, द्वेष और समाज के लोगों को चिह्नित करने वाली बात ही नहीं है, जिससे लोग लड़ें और राजनीति हो।
आपके उपाय में तो लोग आराम से आएंगे, खायेंगे, पियेंगे और चले जाएंगे।
और ऊपर से सरकार का खर्चा।
मेरी तरफ से ना है।
फिर भी मैं पैरवी कर देता हूं।😀
#कांवड़यात्रा
एक उपाय मैं सूझा रहा हूं। सरकार को चाहिए कि कांवड़ यात्रा वाले रास्ते में प्रत्येक कुछ किलोमीटर पर कांवड़ियों के खाने- पीने की व्यवस्था कर दे। वहां शुद्ध भोजन- पानी और अच्छे- ताजे फल उपलब्ध हों!
सरकार को मेरी इस सलाह पर विचार करना चाहिए। @CMOfficeUP@ukcmo