Sonakshi Sinha:
“मैंने पहले कभी कोई बयान नहीं दिया, लेकिन अब मैं चुप नहीं रह सकती। सोनम जैसी जानी-मानी हस्ती छात्रों के लिए 18 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और सब चुप हैं।
अब मैं आवाज़ उठाऊंगी; अगर हम बोलते हैं तो हम देश-विरोधी नहीं हो जाते, हमारी भी आवाज़ सुनी जानी चाहिए। मैं डरती नहीं हूं, जो होगा देखा जाएगा।
सरकार को सोनम सर से बात करनी चाहिए।”
बनारस की भी चर्चा कर लीजिए..
मोदी जी 7 राउंड मुझसे चुनाव हारे.. मैने उन्हें डंके की चोट पर हराया..!
लेकिन 1 बजे के बाद चुनाव आयोग ने वेबसाइट बंद कर दी और 3 घंटे बाद 4 बजे चुनाव आयोग कहता है मोदी जी 1 लाख 52 हज़ार से चुनाव जीत गए लेकिन भैया बीच का आंकड़ा कहां गया अजय रॉय आगे था कि मोदी जी आगे थे कुछ तो बताओ...बनारस की जनता ने उनके अश्वमेघ घोड़े को बनारस में रोक दिया था.!
अयोध्या में पहले चन्दा चोरी करते थे अब चढ़ावा चोरी करते हैं छोटे छोटे लोगों को जेल भेज दिया लेकिन चंपत राय बंसल जेल कब जाएंगे,अनिल मिश्रा कब जायेंगे,निपेंद्र मिश्रा के खिलाफ कब कार्यवाही करेंगे जो प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव थे,गोविंद गिरी, गोपाल रॉय पर कब कार्यवाही होगी।
अशोक सिंघल के समय चंदा चोरी हुआ और अब चढ़ावा चोरी हो रहा है...माताओं बहनों के आँचल का पैसा इन लोगों ने छीन लिया.!
अजय राय पीसीसी चीफ उत्तरप्रदेश
संयोग ,प्रयोग ,विरोध या स्लीप ऑफ टंग ?
राजस्थान में इन दिनों संबोधनों की राजनीति कुछ ज़्यादा ही चर्चा में है।
पहले मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी को "मुख्यमंत्री" कह दिया।
फिर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मदन राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को "पूर्व मुख्यमंत्री" कहकर संबोधित कर दिया।
और आज विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को "मुख्यमंत्री" कह दिया।
अब सवाल यह है कि यह केवल संयोग है या फिर सत्ता और व्यवस्था के भीतर चल रहा कोई प्रयोग?
कहीं ऐसा तो नहीं कि जुबान वही सच बोल रही है, जिसे राजनीति छिपाने की कोशिश कर रही है!
राजस्थान की जनता भी सोच रही है कि आखिर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन है और सरकार किसके भरोसे चल रही है ?
“नितिन गडकरी जी कह रहे हैं कि लोग Ethanol को ले कर भ्रम फैला रहे हैं !
अरे गडकरी जी,
भ्रम तो गाड़ियों को भी हो गया है
उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि Ethanol डालने के बाद उन्हें चलना है, बंद होना है, झूमना है…
करना क्या है ?”
शेखर सुमन जी ने धुँआ उठा रखा है 🔥🔥🔥
राजस्थान तक के वरिष्ठ पत्रकार @sharatjpr जी ने हनुमान बेनीवाल जी के संबंध में कवि रामधारी सिंह दिनकर जी की दो लाइन्स पढ़कर सच्चाई बयाँ कर दी..
“जिनसे लड़ा, वो मेरे दुश्मन ना थे..
जिनके लिए लड़ा वो मेरे अपने ना थे....”
@hanumanbeniwal
गरीब को गरीब बनाए रखने के आरएसएस के एजेंडे को राजस्थान के वर्तमान शिक्षा मंत्री पूरी निष्ठा से लागू करने में लगे हुए दिखाई देते हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर करने वाले फैसले इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं।
कभी छोटे-छोटे बच्चों को भ्रमण के नाम पर आरएसएस की शाखाओं में भेजने का मामला सामने आता है, तो कभी महात्मा गांधी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों को बंद किया जाता है। जिन स्कूलों में गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रहे थे, आज उन्हीं भवनों में आरएसएस की गतिविधियाँ संचालित होने की खबरें सामने आ रही हैं।
अब स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद मेरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। लगभग हर सरकारी विद्यालय में व्याख्याता, प्रधानाचार्य और विषय अध्यापकों के पद खाली हैं। पूरे विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
यह लड़ाई केवल मेरी या मेरी पार्टी की नहीं है। यह हर उस माता-पिता की लड़ाई है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। यह हर उस जिम्मेदार नागरिक की लड़ाई है जो अपने गांव के सरकारी विद्यालय को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है।
ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानांतरण के माध्यम से अनेक विद्यालयों को जानबूझकर शिक्षकों से खाली कर दिया गया है। यदि स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो स्वाभाविक रूप से बच्चों की संख्या घटेगी और फिर इन्हीं विद्यालयों को बंद करने का आधार बनाया जाएगा। यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की बेहद चिंताजनक दिशा है।
सरकारी विद्यालय केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव हैं। इन्हें बंद या कमजोर करने के बजाय पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है, और इस अधिकार की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। #RSSAgenda
नागौर सीट होगी रिजर्व?
परिसीमन की रिपोर्ट से हनुमान बेनीवाल की बढ़ी टेंशन!🙄🙄
सरकार में बैठे राजनीतिकार याद रखना हनुमान बेनीवाल कमजोर नहीं
हनुमान बेनीवाल राजस्थान के किसी भी कोहने में जाकर चुनाव लड़े तो जीत बंपर होगी
ये जो लोग हनुमान बेनीवाल के अगले संसदीय क्षेत्र का गणित बैठा रहे है उनको बता दूँ कि हनुमान बेनीवाल जी सांसद का चुनाव लड़ेंगे ही नहीं.......!
क्योंकि हनुमान बेनीवाल जी 2028 में राजस्थान के मुख्यमंत्री बन जाएंगे..... @hanumanbeniwal ❤️