1. सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक़ उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के ख़ासकर करोड़ों दलितों व आदिवासियों का जीवन द्वेष व भेदभाव-मुक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का हो पाया है। अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर तोड़े व पछाड़े गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित?
@teacheremployee@vishnudsai@brijmohan_ag महोदय जी समर कैंप का आयोजन स्थगित किया जाए । गर्मी सभी को लगती है। आराम की आवश्यकता बच्चों को भी होती है कुछ दिन आराम करने दीजिए, फलने फूलने दीजिए।🙏🙏🙏
मान.@vishnudsai@brijmohan_ag जी,
मान.स्कूल शिक्षा सचिव महोदय द्वारा जारी राज्य स्तरीय आदेश में समर कैंप पूर्णतः स्वैच्छिक है, किंतु ब्लॉक/जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए इसे अनिवार्य किया जा रहा है।#CG_समर_कैंप_स्वैच्छिक_हो
कृपया त्वरित संज्ञान लीजिए।
70% 80% 90% छत्तीसगढ़ सरकार का फैसला था, जब इस नियम को समाप्त किया जा रहा है तो इस नियम से प्रभावित हुए कर्मचारियों को नियुक्ति दिनांक से 100% वेतन तथा पूर्व की भांति 2 वर्ष परिवीक्षा प्रदान किया जाना चाहिए । तभी न्याय होगा।@bhupeshbaghel@RahulGandhi@RChoubeyCG@TS_SinghDeo
निश्चित ही ये घोषणा नए कर्मचारियों के लिए शानदार है बस माननीय मुख्यमंत्री @bhupeshbaghelजी से इतना अनुरोध है कि नए और पहले से कार्यरत नवीन कर्मचारियों के वेतन में अन्तर हो इसके लिए परिवीक्षा अवधि पहले की तरह 2 वर्ष होनी चाहिए और stipend से कटी राशि को समान किश्तों में arearमिले
बिल्कुल सही कहा आपने सर stipend को समाप्त तो कर दिया लेकिन इसके साथ पहले से लगे कर्मचारियों के लिए परिवीक्षा अवधि पूर्व की भांति 2 वर्ष होनी चाहिए और काटी गई राशि का arear देना चाहिए तभी न्याय होगा
आपका बहुत बहुत धन्यवाद काका जी लेकिन न्याय तो तभी होगा जब पहले से 2 से 3 साल तक stipend में कार्यरत कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि पहले की तरह 2 वर्ष हो और stipend से कटी राशि को समान किश्तों में arear के रूप में दिया जाएगा या फिर GPF में जमा कर दिया जाएगा 🎉💐🎊
@poetakshay@ChhattisgarhTak@milindkhandekar@IndiaToday@aajtak@aroonpurie छत्तीसगढ में वर्तमान में पिछले 7 8 सालों से एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है..सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति।आपसे अनुरोध है कि इस मुद्दे पर भी एक सार्थक डिबेट आप आयोजित करें और सभी का पक्ष जानकर एक बीच का रास्ता निकालने का प्रयास हो जिससे आप मीडिया और सरकार दोनों की ही सार्थकता बने।
छत्तीसगढ में वर्तमान में पिछले 7 8 सालों से एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है..सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति।आपसे अनुरोध है कि इस मुद्दे पर भी एक सार्थक बहस आप आयोजित करें और सभी का पक्ष जानकर एक बीच का रास्ता निकालने का प्रयास हो जिससे आप मीडिया और सरकार दोनों की ही सार्थकता बनी रहे।
छत्तीसगढ़ में स्टाइपेंड समाप्त करना उचित कदम है।
साथ ही 2019 में स्टाइपेंड नियम के अंतर्गत नियुक्त हुये सभी कर्मचारियों को भी नियुक्ति तिथि से लाभ मिलना चाहिए। क्योंकि वे इस पीड़ा को झेल रहे है। परिवीक्षा 2 वर्ष होना चाहिए। तभी सही न्याय होगा।
@bhupeshbaghel@RahulGandhi