संविदा नियमों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को स्थायी करने की दिशा में आखिर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है? 🤔
संविदा भर्तियों के माध्यम से चयनित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर न कोई स्पष्ट रोडमैप नजर आ रहा है और न ही वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीरता दिखा रही है। कार्यवाही करना तो दूर, ऐसा लगता है मानो इस विषय पर विचार तक नहीं किया जा रहा है।
जबकि नियमानुसार ���ब तक हजारों पात्र कर्मचारियों को स्थायीकरण का लाभ मिल जाना चाहिए था। आखिर इन कर्मचारियों को कब तक इंतजार करना पड़ेगा? उनके भविष्य और वर्षों की सेवा का जवाबदेह कौन होगा?
संविदा कर्मचारियों को केवल आश्वासन नहीं, अपने अधिकारों के अनुरूप ठोस कार्रवाई चाहिए।
यह स्थिति वास्तव में पीड़ादायक है। 💔
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🚩 विजयादशमी पर माननीय मुख्यमंत्री जी व आदरणीय मुख्य सचिव महोदय से विशेष अनुरोध 🚩
जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने अन्याय रूपी रावण का अंत कर धर्म, न्याय और सत्य की स्थापना की थी, उसी प्रकार माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी @BhajanlalBjp व मुख्य सचिव महोदय @svoruganti1466 , आपसे भी विनम्र अनुरोध है कि राजस्थान से "संविदा रूपी रावण" का शीघ्रातिशीघ्र अंत कर सभी संविदाकर्मियों को नियमित कर न्याय एवं सम्मान प्रदान करें।
श्रीराम ने अपने आदर्शों और न्यायप्रियता से लोगों के हृदय में स्थान बनाया था। मुख्यमंत्री जी, आप भी संविदाकर्मियों को नियमितीकरण का उपहार देकर उनके हृदय में सदैव के लिए स्थान स्थापित कर सकते हैं।
इस दशहरे पर केवल रावण का पुतला ही नहीं, बल्कि संविदाकर्मियों के शोषण और अनिश्चित भविष्य का भी अंत हो!
🙏 आशा है, यह विजयादशमी राजस्थान के हजारों संविदाकर्मियों के जीवन में स्थायित्व, सम्मान और खुशियों ���ा नया सवेरा लेकर आएगी।
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इतिहास हमें सिखाता है कि आचार्य चाणक्य जैसे शिक्षक केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं थे, बल्कि राष्ट्र और समाज की दिशा बदलने की क्षमता भी रखते थे। शिक्षक का वास्तविक सम्मान उसके ज्ञान, अनुभव और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को पहचानने में है।
इसी भावना के साथ ATUR राजस्थान सरकार से विनम्र अपील करता है कि महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में कार्यरत Assistant Teachers के योगदान, योग्यता और अनुभव को उचित महत्व दिया जाए तथा उनके नियमितीकरण के लिए सकारात्मक और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
इन शिक्षकों ने विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर मेहनत की है। उनके अनुभव और ���ेवाओं का लाभ विद्यार्थियों को निरंतर मिलता रहे, इसके लिए उन्हें सेवा सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करना आवश्यक है।
हमारा विश्वास है कि सरकार और शिक्षक एक-दूसरे के सहयोगी हैं। शिक्षकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित भविष्य देना न केवल उनके हित में है, बल्कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
हमारा उद्देश्य विरोध नहीं, संवाद है। हमारा आग्रह टकराव नहीं, समाधान है।
आइए, शिक्षकों के अनुभव का सम्मान करें, उनके भविष्य को सुरक्षित बनाएँ और महात्मा गांधी विद्यालयों में कार्यरत Assistant Teachers के नियमितीकरण की दिशा में सकारात्मक पहल करें।
शिक्षक सशक्त होंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था और सशक्त होगी।
सादर नियमितीकरण व स्थाईकरण की अपील सहित🙏🏻
विपुल शर्मा
प्रदेश अध्यक्ष
व समस्त असिस्टेंट टीचर्स
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कांट्रेक्चुअल हायरिंग रूल्स टू सिविल पोस्ट्स 2022 एक मील का पत्थर है।
यह अवश्य है कि एक बार काम शुरू होने में समस्याएं आ रही हैं परन्तु भविष्य के किसी संवि���ा कर्मी को किसी प्रकार की लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी।
शीघ्र सभी विभागों के आदेश आने वाले है सीधा सा नियम है
मार्च 2027 तक सभी संविदार्मियों को 5 वर्ष (आईएएस पैटर्न एवं एडॉप्शन सुशील संख्या 20 के अनुसार नियमितीकरण अवधि) पूर्ण हो जाएंगे एवं बिंदु की कार्यवाही करनी ही होगी।
धन्यवाद।
शमशेर गांधी
राजस्थान संविदा शिक्षक: ‘ब्रह्मा कैलेंडर’ का शिकार!*
*राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल रूल्स 2022: एक ऐसी टाइम-मशीन जिसमें 3 साल = 3 जन्म!*
नमस्कार सरकार,
एक कहानी सुनिए।
*नियमों की किताब में लिखा है:*
Rajasthan Contractual Hiring to Civil Posts Rules, 2022 के अनुसार संविदा पर लगे कार्मिकों को 5 साल में नियमित किया जाएगा, और उसमें 2 साल की विशेष छूट दी गई है। सीधा गणित है - 5 में से 2 गए, बचे 3। मतलब 3 ���ाल की सेवा के बाद पक्के।
*हमारा गणित:*
हमारी अंतिम पदस्थापन: *जुलाई-अगस्त 2023*
आज का महीना: *अक्टूबर 2026*
हमने स्कूल में बच्चों को गिनती सिखाई, खुद भी गिन ली - पूरे *3 साल* हो गए।
*सरकार का गणित:*
सरकार का कैलेंडर हमारे वाला नहीं, ब्रह्मा जी वाला है।
हमने ब्रह्मा जी से पूछा तो वो भी बोले -
"इतना लंबा इंतजार? मेरे ब्रह्मा कैलेंडर में भी नहीं लिखा था!
मेरे यहाँ तो सत्य युग 17,28,000 साल का होता है, पर तुम्हारा 3 सा��� उससे भी लंबा लग रहा है!"
हमारा सफर कुछ ऐसा रहा:
*जुलाई 2023:* फाइल चल पड़ी! लगा अब तो जीवन पक्का।
*2025:* 2 साल बीत गए... शब्द थे ‘पक्के’ नहीं, *‘पक कर अचार’* बना रहे हैं! हम अभी तक संविदा ही हैं।
*अक्टूबर 2026:* अब तो हालत ये है - 3 साल का मतलब 3 जन्म? क्या पुनर्जन्म में फिर से शिक्षक बनना पड़ेगा? दशकों का इंतजार, अब तो ‘परमानेंट’ की जगह ‘पाषाण’ न बन जाए!
हम संविदा के अनिश्चित भविष्य के बीच भी पूरी निष्ठा से पढ़ा रहे हैं, क्योंकि बच्चे इंतजार नहीं करते। पर सवाल तो बनता है:
जब नियम आपने बनाया, छूट आपने दी, 3 साल हमने ईमानदारी से काट लिए, तो फिर हमारे नियमितीकरण की फाइल किस ‘सरकारी टाइम-मशीन’ में अटकी है जो 3 साल को 3 युग बना रही है?
*असिस्टेंट टीचर्स यूनियन ऑफ़ राजस्थान (ATUR) की ओर से सरकार से सीधी माँग नहीं, गुहार है:*
1. नियम 2022 के अनुसार 3 साल पूर्ण कर चुके सभी संविदा सहायक शिक्षकों की स्क्रीनिंग तुरंत शुरू की जाए।
2. नियमित कैडर में समायोजन की प्रक्रिया को कागज से निकालकर धरातल पर लाया जाए।
3. शिक्षा विभाग में अचार बन चुके इस मुद्दे को अब तो परोसा जाए!
हमें भरोसा है, सरकार सुनेगी। क्योंकि शिक्षक का सम्मान, स्थायी नियुक्ति से ही है।
संविदा नहीं, स्थायी ही समाधान!
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