"कभी सोचा है…
किसी के लिए आपके 2 मिनट की मदद उसकी पूर��� ज़िंदगी बदल सकती है।
पैसा नहीं… बस समय, सम्मान और संवेदना दीजिए। ��️✍️
दुनिया में अच्छाई फैलाने के लिए रीपोस्ट करें। ❤️"
जोहार
जंगल की जान,अतुल्य पहचान,अद्वितीय संस्कृति,आदिम सभ्यता की अमीरी से ओतप्रोत प्रकृति के सबसे दुलारे,निष्कपट,निस्वार्थ दुनिया के तमाम आदिवासियों को #विश्व_आदिवासी_दिवस पर बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई जोहार आदिवासियों का संसार,ये दिवस नही ये है त्योहार,बोलो मिलकर के जोहार।
🫁जिस हवा में हम साँस लेते हैं
🍲जो भोजन हम खाते हैं
🚰जो पानी हम पीते हैं
🌆जिस पर्यावरण में हम रहते हैं
🔥जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, खतरनाक रसायन और प्राकृतिक पर्यावास का विनाश…
हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है
⬇️
हमारा स्वास्थ्य एक स्वस्थ पर्यावरण पर निर्भरहै
मासूमों की जान गई उसका कुछ नहीं ..... इस पर भी राजनीति गरमाई हुई है..... राजनीति करने लायक कोई बात ही नहीं थी फिर भी बखेड़ा खड़ा कर दिया कोई भी हो किसी भी पार्टी के बस पार्टी के नाम से हाई लाइट होना है और पार्टी का प्रचार प्रसार करना है और कुछ नहीं......😒😒
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले का रहने वाला ये शख्स छह साल पहले अपने 15 साथियों के साथ बंगाल की खाड़ी में हल्दिया के पास मछली पकड़ने गया था। तभी अचानक समुद्र का रुख बदल गया तेज़ तूफान उठा, लहरें बेकाबू हो गईं और देखते ही देखते ट्रॉलर पलट गया।
हर कोई समंदर की विशाल लहरों में बह गया... रवीन्द्रनाथ भी।
लेकिन वो डरने वाला नहीं था। पेशे से मछुआरा होने के कारण पानी उसका दुश्मन नहीं, साथी था। उसने हार नहीं मानी।
वो तैरता रहा… तैरता रहा… ऊपर बस आसमान, नीचे अथाह पानी।घंटे बीते, दिन बीत गए।
5 दिन तक रवीन्द्रनाथ समंदर में अकेले तैरता रहा, न खाना, न पीने का पानी, सिर्फ़ ज़िंद�� रहने की जिद। जब बारिश होती, वो वर्षा जल पीकर खुद को जीवित रखता। हर पल मौत नज़दीक थी, लेकिन हिम्मत उससे ज़्यादा मज़बूत थी।
5वें दिन… क़रीब 600 किलोमीटर दूर, बांग्लादेश के कुतुबदिया द्वीप के पास, एक जहाज़ 'एमवी जवाद' गुजर रहा था। जहाज़ के कप्तान ने दूर से समंदर में कुछ हिलता देखा। ध्यान से देखा… कोई इंसान तैर रहा था!
कप्तान ने फ़ौरन एक लाइफ जैकेट फेंकी, लेकिन रवीन्द्रनाथ तक वो नहीं पहुंची। फिर भी ��प्तान रुके नहीं… उन्होंने सीमाओं, धर्मों, जातियों की रेखाओं को भुलाकर सिर्फ़ एक चीज़ देखी --- इंसान।
कुछ दूरी पर रवीन्द्रनाथ फिर नज़र आए, और इस बार कप्तान ने जहाज़ घुमा दिया। लाइफ जैकेट फेंकी, और इस बार रवीन्द्रनाथ पकड़ने में कामयाब रहे।
एक क्रेन से उसे ऊपर खींचा गया थका हुआ, अधमरा, लेकिन ज़िंदा। जब ��ो जहाज़ पर चढ़ा, तो पूरे जहाज़ के नाविक खुशी से चिल्ला उठे।वो सिर्फ़ एक इंसान को नहीं, इंसानियत को ज़िंदा देख रहे थे।
उस लम्हे का वीडियो जहाज़ के एक नाविक ने रिकॉर्ड किया और वो दृश्य आज भी देखने वालों की रूह तक को हिला देता है।
❤️ धन्यवाद, उस जहाज़ के हर नाविक को।
आपने सिर्फ़ एक जान नहीं बचाई आपने हमें याद दिलाया कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है।
कभी-कभी एक इंसान की जिद, और दूसरे इंसान की करुणा , प��री दुनिया को बेहतर बना सकती है
जोहार नमन 💐
19 जून,1947 को अपने गुरु को ब्रिटिश पुलिस के क्रूर अत्याचार से बचाने हेतू आज ही के दिन अपना बलिदान दिया था, गुरु की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली भील वीरांगना कालीबाई कलासुआ एवं रास्तापाल कांड में शहीद वीर शहीदों को जोहार नमन 💐
#जोहार#नमन
भावुक कहानी है विलेश दादा की, सुनेंगे तो रो दोगे !
संघर्ष, प्रताड़ित, समाज का दर्द, माय माटी की लड़ाई, जन्म देने वाली माँ की कोख से सालों से दूर रहना, बड़ी दर्द भरी है दास्तान...
अपने समाज के हक अधिकार और जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक साथी का अमूल्य योगदान समाज के लिए
जोहार नमन💐
आदिवासी महानायक,धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन जल,जंगल,ज़मीन की रक्षा केलिए उनका बलिदान,आदिवासी अस्मिता के लिए उनका संघर्ष और अन्याय के ख़िलाफ़ उनकी बुलंद आवाज़ हम सभी को सच्चाई,न्याय और अधिकारों की लड़ाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।
"नेता बड़ा या समाज?
अधिकारी बड़ा या समाज?
या फिर संगठन बड़ा या समाज?
सवाल छोटा है... लेकिन जवाब बहुत गहरा।"
"समाज वो ज़मीन है... जहाँ बीज बनकर नेता, अधिकारी और संगठन उगते हैं।
बिना समाज के कोई नेता नहीं, कोई अधिकारी नहीं, और कोई संगठन नहीं।"
#birsabrigade