@DrMohanYadav51@realmanubhaker@OlympicKhel मध्यप्रदेश में खिलाड़ियों के लिए ऐसी योजना बनाई जाए जिसमे वह अच्छा पोष्टिक भोजन और चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सके बाकी मुक्तखोरी(1250मासिक) आलसी बनाने वाली योजना बंद की जाए
एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे....
एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी। कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया। जहाज पर एक युवा दम्पति थे।
जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है। इस मौके पर आदमी ने औरत को धक्का दिया और नाव पर कूद गया।
डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा।
अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा? ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ! I hate you!
प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है?
वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना
प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ? लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी।
प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है!
प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया। कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली।
डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे।
ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया। उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था।
लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा।
जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी।
◆इस संसार में कइयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं। इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता।
◆ कलह होने पर जो पहले माफ़ी मांगे, जरुरी नहीं उसी की गलती हो। हो सकता है वो रिश्ते को बनाये रखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझता हो।
◆ दोस्तों के साथ खाते-पीते, पार्टी करते समय जो दोस्त बिल पे करता है, जरुरी नहीं उसकी जेब नोटों से ठसाठस भरी हो। हो सकता है उसके लिए दोस्ती के सामने पैसों की अहमियत कम हो।
◆ जीवन में जो लोग आपकी मदद करते हैं, जरुरी नहीं वो आपके एहसानों के बोझ तले दबे हों। वो आपकी मदद करते हैं क्योंकि उनके दिलों में दयालुता और करुणा का निवास है।
◆ आपको अपनी कहानी पता है पर कभी दूसरों की कहानी पता करने की कोशिश करे
#lifelessons #life #GoodMorningTwitterWorld
@CMMadhyaPradesh महोदय नामांतरण का अधिकार तहसीलदार को है न की पटवारी को। नामांतरण आदेश उपरांत कंप्यूटर में फीड करने का काम होता है पटवारी का। हर किसी को मिल गया बेचारा पटवारी गर्दन मरोड़ने के लिए । सॉफ्ट टारगेट।
सभी पटवारी भाई ध्यान दे जो भी नामांतरण का प्रतिवेदन लगाए पावती अपने पास रखे।
@CMMadhyaPradesh@CollectorGuna पटवारी के पास नामांतरण का कोई अधिकार ही नहीं बचा है अब…लेकिन तालियाँ बजवाने के लिए पटवारी का नाम भाषण में आना ज़रूरी है😃
@CMMadhyaPradesh 28 साल से पटवारियों का वेतन नहीं बढ़ा है और नामांतरण में केवल पटवारी रिपोर्ट लगती है नामांतरण का अधिकार तहसीलदार /नायब तहसीलदार को है इसलिए सभी की गलती के लिए पटवारी को दोषी न माना जाए व्यक्ति बेकार होता है पूरा संवर्ग नही
रेत माफिया के ट्रैक्टर से कुचले गए पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल की बेटी को सुनिए, बीजेपी के भ्रष्टाचार और जंगलराज के कारण पूरा परिवार बिखर गया और उन पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।
शिवराज जी,
इन आंसुओं के ज़िम्मेदार केवल आप हैं।
मध्य प्रदेश के शहडोल में रेत माफिया की क्रूरता का शिकार बने पटवारी प्रसन्न सिंह की बेटी प्रिया की भी सुनी जाये जो सवाल उठा रही है कि रात में बिना पुलिस सुरक्षा के उसके पिता को अवैध खनन रोकने ज़िला प्रशासन ने क्यूँ भेजा ? नन्ही प्रिय अपने दो भाइयों को सम्भाले या माँ को जिनका रो रोकर बुरा हाल है @ABPNews@dmshahdol@ChouhanShivraj
नजर से गिरी सरकार,
सत्ता से भी उतर जाती है!
@BJP4MP केवल,
बर्बादी का खुला बयान है!
काठ की हांडी,
बार-बार नहीं चढ़ती!
अब जंग लगी तलवार,
और खाली म्यान है!
@ChouhanShivraj
बेरोजगार नौजवानों को देखकर मुझे बड़ी बैचैनी होती है, इन नौजवानों को प्यार से पालकर बड़ा करने वाली माताओं-बहनों को देखकर मुझे पीड़ा होती है।
आज नौजवानों का भविष्य हमें सुरक्षित रखना है, कृषि क्षेत्र में क्रांति लानी है। हमने पहली किश्त में किसानों का कर्जा माफ किया था, हमारी सरकार आएगी सब किसानों का कर्जा हम फिर से माफ करेंगे।
―कमलनाथ