पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष युवा राष्ट्रीय लोकदल तराई क्षेत्र उत्तर प्रदेश
पूर्व जिलाध्यक्ष युवा रालोद सीतापुर,
graduate by csjmu Kanpur polytechnic deploma
राजनैतिक हंगामा संध्या दैनिक समाचार पत्र में मेरा लेख हादसे के इंतजार में कब तक? आग लापरवाही और खोती हुई जिंदगियां,संपादक महोदय O.p. Mishra जी का हार्दिक आभार.
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AIMIM के लोकसभा प्रत्याशी इम्तियाज़ जलील को समाजवादी उम्मीदवार के कारण हार का मुंह देखना पड़ा।
उसका बदला अगर ओवैसी उत्तरप्रदेश में लेते हैं तो ये उनका हक़ है ।
Congratulations to the Indian Women’s Cricket Team on a remarkable performance today. The skill, the composure, the way they played for each other, that’s what made it special to watch.
And to every young girl across India who tuned in, what you saw today is what’s possible when you trust your team and back yourself. Keep going, champions, we’re all rooting for you in the matches ahead.
@journalist_syed अगर बसपा और कांग्रेस साथ आए तो निश्चित ही यूपी सहित कई राज्यों के चुनाव परिणाम बदलेंगे कांग्रेस का एक धड़ा है जो सपा के बजाय बसपा के साथ जाना चाहता है और बसपा के भी कई नेताओं का मानना है कि बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो लेकिन कांग्रेस में कई लोग है जो सपा कार्यालय पर निर्भर हैं..
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि वे इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू करना किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशासन की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह वही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।