बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
जहाँ संविधान की शपथ ली, आज वहीं संविधान का सम्मान बचाने बैठा हूँ।
मासूमों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।
जय भीम, जय भारत।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
नीले गगन के तले, धरती का प्यार फले
सपनों की धूप खिले ,मन में उजियार पले
धीरे धीरे बहे, पवन कोई गीत कहे
फलों की छांव तले, जीवन मुस्कान रहे
जय प्रकृति
जय जोहार
भारत रत्न, भारतीय संविधान के शिल्पकार, महान समाज सुधारक बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
बाबा साहेब का जीवन केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान की एक विराट चेतना है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर करोड़ों वंचितों को अधिकार, सम्मान और नई दिशा देने का काम किया ।
बाबा साहेब के विचार सदैव हमें प्रेरित करते रहेंगे।
#FilePhoto
#AmbedkarJayanti #DrAmbedkar #अंबेडकरजयंती
जिला बांसवाड़ा, घाटोल से बाप पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी अशोक भाई भील के छोटे भाई अनिल निनामा की बेरहमी से हत्या करने की घटना दु:खद एवं निंदनीय है। @BanswaraPolice से अनुरोध है कि हत्या में सम्मिलित समस्त मुल्जिमों को जल्द गिरफ्तार कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाह करें।
@PoliceRajasthan@RajPoliceHelp@IgpUdaipur@BAP12INDIA
#अनिल_भील_को_न्याय_दो
बाबसाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में सबसे बड़ा झूठ ये है कि वो सिर्फ़ दलितों के नेता थे.
सच तो ये है कि अगर डॉक्टर अंबेडकर दलितों के मसीहा हैं तो महिलाओं के लिए भी भगवान से कम नहीं हैं.
ये डॉक्टर अंबेडकर ही थे जिन्होंने भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाया…वरना स्विट्ज़रलैंड जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1971 में जाकर मिल पाया.
जिस जमाने में महिलाएँ चारदीवारी में बंद रहा करती थीं, डॉक्टर अंबेडकर ने उस दौर में कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिलवाया…वरना अमेरिका जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1993 में मिला.
महिलाओं को नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें संपत्ति में बराबर अधिकार दिलाने की वकालत भी डॉक्टर अंबेडकर ने ही की थी.
ध्यान रहे कि…
बाबासाहेब ने मनुस्मृति को सिर्फ़ इसलिए नहीं जलाया था कि इसमें दलित विरोधी बातें लिखी थीं…बल्कि इसलिए भी जलाया था क्योंकि इसमें महिलाओं को ग़ुलाम बनाने के तरीक़े लिखे थे.
कुल मिलाकर देश की महिलाओं को याद रखना चाहिए कि भारत में महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा डॉक्टर अंबेडकर जी ही थे.
जय भीम जय भारत…🇮🇳💐
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं ज्ञान के प्रतीक 'भारत रत्न' बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जन्म जयंती पर नमन जोहार
#जय भीम
रंगों की बहार, खुशियों की बौछार,
गुलाल की सुगंध, अपनों का प्यार,
होली का त्योहार लाए रंगीन बहार!
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं जोहार
#happyholi2026
यह मेरे सपोटरा–करौली डांग क्षेत्र की अरावली पर्वत माला है। जहाँ करीब 50 लाख पेड़ आज भी जीवन की साँसें बचाए हुए हैं। इन्हें बचाना सिर्फ़ पर्यावरण का नहीं, हमारे भविष्य का सवाल है। #SaveAravalli
यह लड़ाई सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहेगी—सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता,और प्रकृति के विनाश पर चुप्पी कोई विकल्प नहीं है।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत हलफ़नामे में 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली माना न जाना और उनके खनन की अनुमति देना अत्यंत चिंताजनक है।
अरावली पर्वतमाला भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो दिल्ली के रायसीना हिल से गुजरात के पालनपुर तक लगभग 800 किलोमीटर लंबी है। रायसीना हिल की ऊँचाई समुद्र तल से बहुत अधिक नहीं है—लगभग 15 मीटर ऊपर। इसके बावजूद, यह अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने के कारण सामरिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत के राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का केंद्र है, इसलिए इसे अक्सर भारत सरकार के केंद्र के रूप में देखा जाता है।
अरावली का पारिस्थितिक महत्व केवल ऊँचाई पर निर्भर नहीं है। यह परिभाषा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। खनन से भू-जल, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों को गंभीर क्षति होगी। यह निर्णय पूर्व के सर्वोच्च न्यायालय के संरक्षणात्मक आदेशों की भावना के विपरीत है।
हमारा सवाल है @byadavbjp जी से :- अगर 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली में शामिल न करने और खनन की अनुमति देने का निर्णय सही ठहरा, तो क्या रायसीना हिल और इसके आसपास के राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों को भी खनन माफियाओं के हवाले कर दिया जाएगा?
यदि यह नीति लागू होती है, तो यह हमारी प्राकृतिक संपदा, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगी। हम @mygovindia से मांग करते हैं कि वह पर्यावरणीय नुकसान और लंबे समय तक होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय का तुरंत पुनर्विचार करे।
@mygovindia@moefcc
#SaveAravalli #ProtectRaisinaHill #EnvironmentFirst #AravalliProtection
अरावली केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है यह उत्तर भारत की जीवन रेखा है इससे हमें शुद्ध,हवा,पानी,वर्षा,संतुलन और जैव विविधता जैसी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान होती है यह किसान गांव जंगल और आने वाली पीढियों की ढाल है।
#savearavali🏞️🌴🌵🍀🌿
@PMOIndia@byadavbjp@ANI@OfficialBKU
प्रिय दिल्लीवासियों,
बची रहे जो ‘अरावली’
तो दिल्ली रहे हरीभरी!
अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा।
अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है।
अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है।
अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है। जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है। गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है।
अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है।
इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है।
अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है। यहाँ के विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल और मेडिकल सर्विस सेक्टर तक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो लोग बीमारी ठीक करने दिल्ली आते थे, वो अब और बीमार होने नहीं आ रहे हैं।
- यही हाल रहा तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में भी दिल्ली अपनी अहमियत खो देगी।
- विदेशी तो छोड़िए, देश के पर्यटक भी यहाँ नहीं आएंगे।
- न ही दिल्ली में कोई बड़ा इवेंट आयोजित होगा।
- न ही कोई राजनीतिक, शैक्षिक, अकादमिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सम्मेलन आयोजित होगा।
- न ही ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित होगी।
- यहाँ का होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हैंडीक्राफ़्ट बिज़नेस, हर काम-कारोबार व अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाने के कगार पर पहुँच जाएंगी।
- जब प्रदूषण की वजह से हवाई जहाज़ नहीं चलेंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, सड़क परिवहन असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली कौन आएगा।
- यहाँ तक कि इसका असर ये भी पड़ेगा कि लोग अपने बेटी-बेटे की शादी तय करने से पहले दिल्ली के हवा-पानी के बारे में सोचने लगेंगे।
- इसीलिए हर नागरिक के साथ हर स्कूल-कोचिंग, हर व्यापारी, हर कारोबारी, हर दुकानदार, हर रेहड़ी-पटरीवाले, हर घर-परिवार तक को ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए।
- हर चैनल, हर अख़बार को ये अभियान चलाना चाहिए। जो लोग सरकार की चाटुकारिता कर रहे हैं, वो भी समझ लें कि उनका स्वयं का जीवन भी ख़तरे में है।
अरावली को बचाना मतलब ख़ुद को बचाना है।
अगर अरावली का विनाश नहीं रोका गया तो भाजपा की अवैध खनन को वैध बनाने की साज़िश और ज़मीन की बेइंतहा भूख देश की राजधानी को दुनिया की ‘प्रदूषण राजधानी’ बना देगी और लोग दिल्ली छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे।
इसीलिए आइए हम सब मिलकर अरावली बचाएं और भाजपा की गंदी राजनीति को जनता और जनमत की ताक़त से हराएं!
आपका
अखिलेश
जोहार साथियों, उच्च न्यायालय का गलत आदेश को लेकर ऐतिहासिक रैली, धरना प्रदर्शन किया जा रहा है.. वो पहाड़ पर्वत, प्रकृति, पशु हमारा साथ- सहयोग मांग रहे हैं। आपसे निवेदन है कि अपना अमूल्य समय निकालकर कल 22 दिसम्बर को जिला मुख्यालय सलूंबर पहुंचे। #SaveAravalli#अरावली_बचाओ
वर्तमान देश में आदिवासियों का विनाश करके विकास किया जा रहा है।
इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बिरसा मुंडा जयंती को राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया। मोदी जी को ज्ञात होना चाहिए कि बिरसा मुंडा जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए अग्रेजों से लड़े थे, लेकिन आज उसी जल जंगल जमीन को आपकी सरकार व्यापक स्तर पर लूट रही है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी, धरती आंबा बिरसा मुंडा तो जल जंगल जमीन को अपने देवता मानकर पूजते थे। आज उसी जल जंगल जमीन को आप संसाधन मानकर उद्योगपतियों के हवाले कर नीलाम कर रहे हो। बिरसा मुंडा के विचारों और आपके विचारो में जमीन आसमान का अन्तर है।
प्रधानमंत्री @narendramodi व @vishnudsai जंगलो को उद्योगपतियों के नाम कर आदिवासियों की पीढ़ियों को खत्म करने का खेल बन्द करें।
सदियों तक अरावली ने राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली व अन्य राज्यों को मरुस्थल और वायुमंडलीय प्रकोप से बचाने का कार्य किया था। परंतु आज वही अरावली खुद अपने अस्तित्व को लेकर खतरे में है, सभी मिलकर अरावली को बचाएं।। #जोहार#SaveAravaliHills#अरावली_बचाओ#SaveAravalli#SaveAravalimountain