India’s Prime Minister Narendra Modi actually said this👇
• India celebrated Republic day on 26th January. 2+6 =8
• Indonesian President’s birthday is on 17th. 1+7 =8
With this IQ, this man wants to be Nehru!
🤦♀️🤦♀️
THIS GRANDMOTHER DOES NOT RECOGNISE HER INDIA ANYMORE 💔
REPORTER: Children are sitting on hunger strike and the government is not listening. How does it feel?
GRANDMOTHER 🙏: I could not stay away, that is why I came. I have no children of my own, so all these children are mine.
REPORTER: What do you feel seeing their health getting worse?
GRANDMOTHER: I keep telling them to stop harming themselves and find another way. But peaceful protest is the right way, and still nobody is listening.
REPORTER: Has the country changed?
GRANDMOTHER 😔: This is not the India I was born in. Even the British listened when Gandhi sat on hunger strike. Today there is no humanity, no respect, no honesty. The air is full of lies.
मैं सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईं सभी ऑटो कंपनियों को चिट्ठी लिखूँगा, कि वे लिखित में अपने ग्राहकों को यह आश्वासन दें कि गाड़ी में E20 इस्तेमाल करने पर यदि—
1) माइलेज 10% से ज़्यादा गिरता है, तो कंपनी उसकी भरपाई करेगी।
2) गाड़ी का कोई भी पार्ट डैमेज होता है, तो कंपनी उसे मुफ़्त में रिप्लेस करेगी।
अगले हफ़्ते मैं प्रधानमंत्री जी को भी चिट्ठी लिखूँगा और पूछूँगा कि अगर किसी की गाड़ी में कोई भी दिक्कत आती है, तो उसका हरजाना आप देंगे या कंपनी देगी?
Indian Billionaire Son Anant Ambani visits the world's famous Oncologist, Dr. Dheerendra Shastri from Bageshwar Dham. Dr. Dheerendra Shastri prescribes cow urine as a cure for cancer.
यह मध्य प्रदेश के खंडवा में तैनात अपर सत्र न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी हैं। यह उन लोगों में से हैं जिन्हें हम सबको प्यार करना चाहिए।
जज साहब ने आलीशान सरकारी बंगला, वीआईपी कार और अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया है। वे एक छोटे से कमरे में रहते हैं, अपना खाना खुद बनाते हैं और रोजाना पैदल ही कोर्ट जाते हैं।
जज अक्षय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को आवेदन देकर अपनी सैलरी आधी करने की मांग भी की है। निजी संपत्ति के नाम पर उनके पास सिर्फ अपनी मां द्वारा दिया गया एक मोबाइल फोन है। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया है। तबादले पर उन्होंने विभाग से कहा है कि उन्हें देश में कहीं भी भेजा जाए, वे न्यूनतम सरकारी सुविधाएं ही लेंगे।
बचपन में अपनी मां को संपत्ति विवाद के दौरान अदालत के चक्कर लगाते देखकर उन्होंने जज बनने का निर्णय लिया था। इसी कारण वे अपनी अदालत में आने वाले मुकदमों, खासकर जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा बेहद तेजी से करते हैं ताकि आम लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
सलाम जज साहब
क्या मोदी अब चीन का डटकर सामना कर पाएंगे?
जो लोग पाकिस्तान को पानी के लिए तरसाने के लिए सिंधु नदी का पानी रोकने की बात करते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक बहने वाली सभी प्रमुख नदियाँ चीन (तिब्बत) से निकलती हैं। चिनाब, झेलम, सिंध, सतलुज, ब्यास, गंगा-यमुना से लेकर ब्रह्मपुत्र तक सभी चीन से ही आती हैं।
1996 से पहले, कांग्रेस सरकारों ने कभी भी तिब्बत पर चीन के आधिकारिक दावे को मान्यता नहीं दी; इसके बजाय, उन्होंने वहाँ के कब्ज़े को अवैध माना था। हालाँकि, जब अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की भाजपा सरकार सत्ता में आई, तो वह दौड़ते हुए चीन पहुंच गये और उन्होंने चीन के दावे को स्वीकार कर लिया था। बाद में 2003 में उनकी सरकार ने इस रुख को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दिया था।
अब, वही चीन चेतावनी दे रहा है कि अगर पाकिस्तान के हिस्से का एक भी बूंद पानी रोका गया, तो वह भारत को कभी न भूलने वाला सबक सिखाएगा; चीन का कहना है कि भारत का ऐसा कदम मानवता का उल्लंघन होगा—जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री @narendramodi का नाम लेकर चीन यह बात सार्वजनिक तौर पर कह रहा है। तभी डरी हुई @BJP4India@RSSorg अब पाकिस्तान से बात करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
राष्ट्रपति भवन में बैठी इन दो शख्सियतों की बातचीत को इस वीडियो में देखिए सुनिए।
एक तरफ सदियों तक दुनिया पर राज करने वाले साम्राज्य का प्रतीक...
और दूसरी तरफ वह भारत, जिसने गुलामी की राख से उठकर अपने भविष्य को अपने हाथों से गढ़ने का संकल्प लिया था।
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महारानी एलिजाबेथ ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रश्न उठाया
"जब आपके देश में इतनी गरीबी है, तब अंतरिक्ष पर इतना खर्च क्यों?"
सवाल सुनने में तर्कसंगत लगता है,लेकिन हर तर्क तथ्य नहीं होता।
कई बार वर्तमान की धूल भविष्य का आकाश देखने ही नहीं देती।
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इंदिरा गांधी ने जिस शांति और आत्मविश्वास से उत्तर दिया, वह केवल एक प्रधानमंत्री का उत्तर नहीं था...
वह एक ऐसे राष्ट्र का उत्तर था जो सदियों तक दूसरों के फैसलों पर जीता रहा था, लेकिन अब अपनी नियति स्वयं लिखना चाहता था।
उन्होंने समझाया कि अंतरिक्ष तकनीक अमीर देशों का खिलौना नहीं...
वह किसान के खेत तक पहुँचने वाली मौसम की सूचना है।
वह चक्रवात आने से पहले लाखों लोगों की जान बचाने वाली चेतावनी है।
वह दूर-दराज़ गाँवों तक शिक्षा, संचार और विकास पहुँचाने का माध्यम है।
वह आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है।
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यही तो अंतर है...
साम्राज्य संसाधनों को जीतकर शक्तिशाली बनते हैं...और सभ्यताएँ ज्ञान अर्जित करके।
एक ने दुनिया से लिया...दूसरे ने अपने लोगों के भविष्य में निवेश किया।
जिस देश ने कभी भारत को गरीब कहकर देखा, आज वही दुनिया भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों की प्रतिभा का सम्मान करती है।
वक्त तानों का हिसाब बहुत देर से करता है...लेकिन करता ज़रूर है।
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अगर 1960 और 1970 के दशक में भारत ने यह तय कर लिया होता कि पहले गरीबी पूरी तरह खत्म होगी, फिर विज्ञान में निवेश करेंगे...तो क्या आज हमारे पास अपने मौसम उपग्रह होते?
क्या हमारे मछुआरे समुद्र में सुरक्षित लौट पाते?
क्या किसान मानसून का बेहतर अनुमान लगा पाते?
क्या आपदा प्रबंधन इतना प्रभावी होता?
क्या दुनिया अपने उपग्रह भारत से प्रक्षेपित करवाती?
राष्ट्र निर्माता केवल वर्तमान की समस्याएँ नहीं सुलझाते...वे भविष्य की संभावनाएँ भी गढ़ते हैं।
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इसका अर्थ यह नहीं कि गरीबी महत्वहीन थी...या है।
गरीबी मिटाना हर सरकार का पहला दायित्व है।
लेकिन यह भी उतना ही सच है कि विज्ञान और विकास को रोककर गरीबी कभी समाप्त नहीं होती।
रोटी भी चाहिए...और अनुसंधान भी।
क्योंकि भूख केवल पेट की नहीं होती...राष्ट्रों की भी होती है।
और जो राष्ट्र सपने देखना छोड़ देते हैं...वे धीरे धीरे दूसरों के सपनों का बाज़ार बन जाते हैं।
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आज जब हम चंद्रमा की सतह पर अपने कदमों के निशान खोजते हैं...
जब हमारे उपग्रह दुनिया के देशों की सेवा करते हैं...
जब भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में सम्मान पाता है...
तो यह केवल वैज्ञानिकों की सफलता नहीं है।
यह उन नेताओं की दूरदृष्टि का भी परिणाम है, जिन्होंने आलोचना से डरकर भविष्य के दरवाज़े बंद नहीं किए।
नेतृत्व वही नहीं जो अगले चुनाव के बारे में सोचे...
नेतृत्व वह है जो अगली पीढ़ियों के बारे में सोच सके।
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इंदिरा गांधी का निर्णय कितना दूरदर्शी था, यह कांग्रेस या इंदिरा गांधी की नहीं बल्कि एक विचार की विजय है।
एक ऐसा विचार, जो कहता है,गरीब राष्ट्रों को सपने देखने से मत रोकिए।
और आज इन्हीं दूरदर्शी निर्णयों ने दुनिया को बताया है कि जब गरीब राष्ट्र सपने देखना सीख जाते हैं...तो एक दिन वही राष्ट्र इतिहास नहीं पढ़ते...इतिहास लिखते हैं।
#VijayShukla
हमारे सांसद संजय सिंह जी जब ज़मीनों के घोटाले के कागज़ लेकर SIT के सामने गए, तो SIT ने कहा कि हम ज़मीनों के घोटाले की जांच ही नहीं कर रहे।
फिर SIT कर क्या रही है? पहले भी SIT बनी थी, कुछ नहीं हुआ। इस बार भी SIT बनी है, कुछ नहीं होगा।
यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट हो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट
स्क्रिप्ट लिखी जा चुकि है।
राम मंदिर को उड़ाने की धमकी आ गई है...
बस "अब्दुल" की खोज जारी है। उसका रिश्ता पाकिस्तान से जोड़ दिया जाएगा। वो ISI का एजेंट भी होगा।उसका संबंध मदरसों से भी निकाल लिया जाएगा। उसके बैंक खाते से विदेशी फंडिंगके साक्ष्य भी मिलेंगे।
उसके घर औऱ मदरसे पर बुलडोज़र चलेगा।
बाकी काम टीवी स्टूडियो और सोशल मीडिया कर देंगे।
ये सब देख कर हिन्दू बहुत खुश होगा और इसी खुशी और शोर-शराबे के बीच राम मंदिर से जुड़े चोरी के मामले, NEET पेपर लीक और दूसरे सरकार को असहज कर रहे सवाल फिर पीछे छूट जाएंगे।
"All citizens are being made slaves of Indian Government. They cannot stage protests, they cannot agitate-What is all this? Now so many papers have been leaked. If people protest, you will slap cases... What is this? It is the right of the citizens to protest.
The petitioner has just raised slogans like 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad'... Why citizens can't raise such slogans? Why externment orders for such slogans?" - Bombay High Court Judge Justice Madhav Jamdar asks.
"India should not contribute to the failure of the UN system" (by supplying arms to Israel and failing to condemn human rights violations), says Justice Muralidhar in interview to @abaruah64@frontline_india
यह मुंबई के बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम हैं.. यह हंसते हुए जयंत पाटिल को कह रहे हैं कि कल झाड़ था, आज मैनहोल है.. उनकी शक्ल पर आप हंसी देख सकते हैं.. यह किसी की मौत पर हँस रहे हैं.. झाड़ गिरने से एक छोटे बच्चे और मैन होल में गिरने से एक 60 वर्षीय के मौत पर यह हस रहे हैं! कोई मर रहा है और यह हस रहे हैं..उस मां को यह वीडियो दिखाओ जिसने अपने बच्चे को खोया है.. उन्हें बताओ कैसे बीजेपी का मुंबई अध्यक्ष हंसते हुए यह खबर बता रहा है.. असंवेदनशील!!!
पहले दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले हिंदू से लड़वाया...
फिर दाढ़ी वाले मुसलमान को दाढ़ी वाले मुसलमान से भिड़ाया...
जब उससे भी मन नहीं भरा, तो मीडिया वाले, दाढ़ी वाले हिंदू को दाढ़ी वाले हिंदू से ही लड़वा रहे हैं... और खुद तमाशा देख रहे हैं.
वाह! क्या शानदार कारोबार है।