हिन्दू की बेटियां इतनी असुरक्षित हो गयी है कि साले जिहादी सुवर घर मे घुस के 14 साल की मासूम को, उठा ले गया और रेप किया,फिर जिस्म को सिगरेट से दागा😡
इलाहाबाद, अहमदनगर के रहने वाले गरीब निसहाय राजकुमार साहू की बेटी को ये ,पड़ोस में रहने वाले जिहादी दरिंदे ने रात में छत के रास्ते उठा ले गए,और उसके साथ दुष्कर्म किया😡
और जब राजकुमार शाहू ने उन कमीनो पर केस करने की कोशिश किये तो उनको धमकी दी जा रही है कि जान से मार देंगे😡
उनकी गुहार को प्रशासन सुने नही तो योगी जी के न्याय पर से इस बेचारे का भरोसा टूट जाएगा😭🙏✍️
@Uppolice@myogiadityanath
@Imdineshpurohit बेचारा जार बार टेम्पल रन खेलता है और हार जाता है। इस बार भी हारेगा। सबको मालूम है कि ये एक गेम है आस्था नही जो या तो मोबाइल पर या चुनाव से पहले विपक्ष खेलता है
योगीजी मुझे बचाइए, मैं एक ब्राह्मण हूँ हमारे घर की
महिलाएँ यहाँ से बाहर भी नहीं निकलती
यहाँ मुसलमान लोग हमको घर से बाहर नहीं निकलने
देते हम कैसे जिये.? ग्राम प्रधान हमको जीने नहीं दे
रहे ग्राम प्रधान के सहयोगी मुसलमान लोग है
सनातनियों ये वीडियो योगीजी तक पहुंचाओ 🙏
@SupriyaShrinate आज अचानक प्रभु राम की कैसे याद आ गयी। कभी तो प्रभु काल्पनिक थे। राम मंदिर हर सनातनियो की बपौती है। विपक्ष को न देश से न भगवान राम से कोई मतलब है हर जगह सिर्फ वोटबैंक की राजनीति करने अआ जाते है।गिद्ध कही के
कुछ दिन पहले बिहार पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने कहा था कि न्हिन्दु पुलिस वाला तिलक नहीं लगा सकता |
और कल उसी बिहार में मजहबी पुलिस इंस्पेक्टर ने मोहर्रम पर जमकर तलवार बाजी करी | 😡
क्या बिहार के उस पुलिस अधिकारी तक वीडियो पहुंचा नहीं या देख कर भी अनदेखा कर दिया |
बांग्लादेश में मजहबी भीड़ द्वारा भगवान राम का अपमान और राममूर्ति के काम को रुकवाने के विरोध में |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की सड़कों पर लाखों हिंदुओं की भीड़ उतर कर भयंकर विरोध कर रही है |
भारत के हिंदुओं अगर हो सके तो इनके संघर्ष को सोशल मीडिया से बैकअप जरूर दे देना | ✊
जिसका हम दूध पीते हे वो हमारी मां हे गौमाता
और उसकी रक्षा करना हमारा धर्म
मुस्लिम जज द्वारा 14 हिंदू गौरक्षकों को उम्र कैद सजा
ऐसा लगा फ़ैसला भारत में नहीं पाकिस्तान में हो रहा
हिंदुओं आज शांत रहे तो इतिहास में कायर कहलाएंगे या अगला नंबर हमारा होगा आवाज रुकनी नहीं चाहिए
A few days ago, my Hindu friend and I were hanging out with some Muslim friends and one of them suggested visiting a mosque honestly, I wasn't planning to go, but I didn't want anyone to feel uncomfortable or think I was disrespecting their beliefs, so I went along.
They explained a few things about the mosque and what happens there, and overall it was a normal experience.
On our way back, we passed a temple. My friend and I decided to go inside. We didn't pressure anyone, but I casually invited our Muslim friends to come with us. They politely said, "No, you guys pray, we'll wait outside."
That surprised me because they had happily welcomed us into the mosque, while they themselves didn't want to enter a temple. I later wondered if this might be due to religious teachings or cultural practices rather than personal dislike.
As a Hindu, I felt proud that I personally had no problem visiting another place of worship. It also made me think about how different religions approach these situations.
So my question is for Muslims here, is avoiding entry into temples something taught in Islam, or does it depend on the individual? I'm asking out of curiosity, not hatred.
>नाम सेजल पवार
>काम MBBS की पढ़ाई करना
>असली काम मरे हुए इंसानों के जननागों के बारे में घटिया जोक मारना
>जब हमने इनके कॉलेज की वेबसाइट पर जाकर इनका रिजल्ट खंगाला तो पाया कि मैडम ने ST कोटे से सीट कब्जा की है
>पवार नाम की कोई भी ST सेंट्रल लिस्ट में नहीं होते
>हाँ pawra या pawara नाम के ट्राइब भील सब केटेगरी में होते हैं,
>ऐसे में @CMOMaharashtra से अनुरोध है कि सेजल के ST सर्टिफिकेट की एक निष्पक्ष जाँच करवाकर सच सबके सामने लाया जाये,
>अगर उन्होंने फर्जी ST केटेगरी का फायदा उठाया है तो कठोरतम कार्यवाही हो
After the #TCSNashik controversy, another IT company from Pune is facing serious allegations.
The former employee of Wipro #Pune alleges that a colleague, Shahina Rafique, pressured her to convert to Eslam and establish an inappropriate relationship with a senior company official. She further claims that when she raised concerns, she was threatened by HR Manager Zeeshan Ahmed and ultimately forced to resign.
A complaint has reportedly been filed with the Hinjawadi Police, and a legal notice has been served on the company.
https://t.co/U6AZpCmOJ7
मुलायम सरकार में हिंदू की बारात में बंदूक ले कर घुसे थे छांगुर गैंग के इशहाक, मंजिल अदीबी, जुबेर, फिरोज.
महिलाओं से छेड़छाड़ पर चुप नहीं बैठा 16 साल का नाबालिग अरविंद गुप्ता तो भून दिया गोलियों से.
उतरौला के बूढ़े पिता की पीड़ा - 20 साल से मिल रही तारीख पे तारीख.. शूटर मौज में
अब @myogiadityanath की सरकार से न्याय की आशा.. @balrampurpolice के बजाय @uppstf से जांच की गुहार..
#Balrampur @myogioffice@Uppolice@dgpup@BJP4UP
इनका नाम अतुल सुभाष था।
34 साल। बेंगलुरु में प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर। एक बेटे के पिता व्योम।
उन्होंने सिस्टम से उम्मीद नहीं की कि कोई उनकी बात सुनेगा।
उन्होंने हर चीज़ खुद रिकॉर्ड की।
उन पर एक साथ 9 केस दर्ज हुए 498A, घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस, कस्टडी।
हर सुनवाई के लिए उन्हें बेंगलुरु से जौनपुर तक 1700 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था।
4 साल में 40 बार वही सफर।
120 कोर्ट हियरिंग्स।
उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये मांगे गए।
अपने ही बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये अलग से।
अपने वीडियो में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक फैमिली कोर्ट जज ने अनुकूल आदेश के लिए 5 लाख रुपये मांगे।
9 दिसंबर 2024 को उन्होंने बेंगलुरु के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।
पीछे छोड़ा — 24 पन्नों का नोट और 81 मिनट का वीडियो।
हर तारीख। हर केस नंबर। हर यात्रा। हर रकम।
सब कुछ रिकॉर्ड किया हुआ।
मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही:
“मेरी अस्थियाँ गंगा में तब तक विसर्जित मत करना, जब तक न्याय न मिले।”
उनकी मां सुप्रीम कोर्ट गईं, अपने पोते से मिलने की अनुमति मांगने।
उन्हें कहा गया — “आप बच्चे के लिए stranger हैं।”
फिर सुनवाई आई।
जज छुट्टी पर थे।
एक साल की तारीख मिल गई।
इसी बीच, ट्विशा शर्मा केस में सिर्फ 11 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
बार काउंसिल ने घंटों में कार्रवाई कर दी।
AIIMS की मेडिकल टीम चार्टर्ड प्लेन से भेजी गई।
11 दिन में पूरा सिस्टम दौड़ पड़ा।
अतुल सुभाष 81 मिनट का रिकॉर्डेड सबूत छोड़ गए थे।
उन्हें मिला एक साल का इंतज़ार।
उनकी अस्थियाँ आज भी गंगा का इंतज़ार कर रही हैं।
उनका बेटा व्योम अब 6 साल का है।
अतुल सुभाष को न्याय मिलना चाहिए।
अगर रिकॉर्डेड सबूत, दस्तावेज़ और एक इंसान की आखिरी पुकार भी सिस्टम को नहीं जगा सकती, तो फिर आम आदमी आखिर जाए कहाँ?