पिछले 12 साल में पेपर लीक एवं परीक्षा रद्द होने की प्रमुख घटनाएं👇
2014: CPMT – पेपर बॉक्स tampering, परीक्षा रद्द
2015: AIPMT (अब NEET) – 10 राज्यों में पेपर लीक, परीक्षा रद्द
2016: UPPSC RO/ARO पेपर लीक, परीक्षा रद्द, NEET फेज-1 में पेपर लीक
2017: SSC CGL – पेपर लीक का आरोप, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में बोर्ड पेपर लीक
2018: CBSE Class 10 Maths & Class 12 Economics का पेपर लीक, री-एग्जाम, गुजरात पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक
2019: RRB CBT, ओडिशा BSE, बिहार 10th Maths का पेपर लीक
2020: कर्नाटक में PU Physics, बेंगलोर यूनिवर्सिटी में https://t.co/DhyaG69Aei, UP बोर्ड में 12th English का पेपर लीक
2021: UPTET – परीक्षा के कुछ देर पहले पेपर लीक, परीक्षा रद्द, राजस्थान में REET, महाराष्ट्र में MAHADA पेपर लीक, NEET में पेपर लीक का आरोप, गुजरात GSSSB का पेपर लीक
2022: बिहार में BPSC का पेपर लीक, परीक्षा रद्द, UP लेखपाल भर्ती परीक्षा पेपर लीक, उत्तराखंड UKSSSC का पेपर लीक, बंगाल में D.El.Ed का पेपर लीक, ओडिशा में OSSC JE और राजस्थान में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा का पेपर लीक
2023: तेलंगाना SSC में हिंदी का पेपर लीक, असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक, असम में High School Leaving Certificate (HSLC) का पेपर लीक। महाराष्ट्र में HSC Maths और राजस्थान में REET का पेपर लीक
2024: NEET-UG का पेपर बिहार और गुजरात में लीक हुआ, UGC-NET परीक्षा रद्द हुई, UP पुलिस भर्ती परीक्षा, RO/ARO भर्ती परीक्षा रद्द हुई, AIIMS Nursing की परीक्षा का भी यही हाल हुआ
2025: रेलवे लोको पायलट परीक्षा, हरियाणा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा, बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा, NEET-UG 2025
2026: NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा रद्द, CUET-UG 2026 में अव्यवस्था के चलते कई जगह परीक्षा रद्द, CBSE में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, SSC GD की परीक्षा रद्द....
बहुत लंबी लिस्ट है। लगता है ग्रंथ लिखना पड़ेगा।
अब लोग समझ गए निष्पक्ष दिखने वाला सौरभ द्विवेदी गोदी मीडिया की श्रेणी में आता है।
ये gen z छात्र वही हैं जिन्होंने मोदी सरकार को घुटनों पर ला दिया और अब झारखंड में डटे हुए हैं।
छात्र प्रमाणपत्र नहीं देंगे तो कौन देगा सौरभ जी?
झारखंड छात्र आंदोलन में इंसानियत सबसे ऊपर रही।
जुनैद भाई ने सेवा का संदेश दिया, नफ़रत का नहीं।
मतभेद हो सकते हैं, लेकिन नफ़रत नहीं।
युवा आवाज़ों को सुनिए, समाज को मत बाँटिए।
7 अगस्त सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, भारत की राजनीति का निर्णायक मोड़ है। इसी दिन मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने की घोषणा हुई और करोड़ों पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी का रास्ता खुला। लेकिन इसके कुछ ही सप्ताह बाद देश की राजनीति में मंडल बनाम कमंडल का नया अध्याय शुरू हुआ।
आज जब इतिहास को नए सिरे से लिखने की कोशिशें हो रही हैं, तब ज़रूरी है कि दस्तावेज़ों, घटनाओं और तारीख़ों के आधार पर सच को समझा जाए। इस वीडियो में देखिए - 7 अगस्त 1990 ने भारत को कैसे बदल दिया, आरक्षण से किसे डर लगा और मंडल बनाम कमंडल की पूरी कहानी।
#MandalCommission
#SocialJustice
बिहार पुलिस ने दावा किया कि सिर्फ़ 4 राउंड फायरिंग हुई थी. BJP ने कहा कि AK-47 का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ. #AltNews ने पाया कि 25 जुलाई को बिहार के सीवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने AK-47 से कम से कम 9 राउंड फायरिंग की गई थी.
जब छात्र सवाल पूछने लगे… तो मंत्री के भाई ने मैदान ही छीन लिया!
राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम की ग्राउंड बुकिंग अचानक रद्द।
ट्रस्ट का बहाना बच्चों की पढ़ाई और मैदान खराब होगा।
पर असल में… यूपी मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के भाई जितेंद्रनाथ सिंह ने अनुमति रद्द की।
कौन बोला है JPSC या JSSC शिक्षा मंत्रालय में आता है ?
साफ साफ लिखा है कि छात्रों से बात करने के लिए सरकार ने चार मंत्रियों की कमेटी बनाई है . उस कमेटी में उच्च शिक्षा मंत्री हैं इसलिए उनसे बात की गई.
अगर इतनी बात समझ में नहीं आई तो लिखते रहो जो मर्जी.
माँ-बाप ने भूखे रहकर पढ़ाया... लेकिन व्यवस्था ने उसे फुटपाथ पर छोड़ दिया।
यह सिर्फ़ एक युवक की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों का दर्द है। जिन माता-पिता ने अपने हिस्से की रोटी, सुख और सपने त्यागकर बच्चों को पढ़ाया, उन्हें बदले में बेरोज़गारी, निराशा और अपमान मिला।
जिस व्यवस्था में डिग्रियाँ फुटपाथ पर और अवसर सत्ता के गलियारों में बँटने लगें, वहाँ सबसे बड़ा संकट अर्थव्यवस्था का नहीं, न्याय का होता है।
राजस्थान के सरकारी स्कूल में टीचर नहीं हैं, तो चपरासी ही बच्चों को पढ़ा रहा है.
इसके विरोध में कल बच्चों ने स्कूल में ताला लगा दिया. Gen Alpha लगातार ऐसे प्रोटेस्ट कर रहे हैं.
मोदी जी पढ़े लिखे व्यक्ति हैं, उम्मीद है वो शिक्षा पर ध्यान देंगे.
जजों की नियुक्ति में दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, समलैंगिकों … वंचित तबके को हिस्सेदारी न देने को स्पीकर विषय से बाहर है कहके माइक बंद कर देते हैं. बाक़ी लोकतंत्र टनाटन है.
यह हाल है मुजफ्फरपुर के SKMCH का जहां गरीबों को ट्रॉली भी नहीं मिलता, जबकि 150 से ज्यादा ट्रॉली मैन की बहाली अभी ही की गई है!
SKMCH हो, DMCH हो, JLNMCH हो, NMCH या PMCH... BJP JDU सरकार में कोई भी सरकारी अस्पताल हो ...
कोई भी सेवा या सुविधा लेना हो तो पैरवी चाहिए या "बख्शीश"!
उसके बिना मरीज़ और परिजन दुत्कार दिए जाते हैं!
@yadavtejashwi #RJD #Bihar
This is the Condition of Govt School in Madhya Pradesh.
Imagine Ground reporters, Influencers, YouTubers visiting Govt schools in every Indian state and start exposing the state govts.
क्या गजब का जवाब दिया है अशोक जी ने
अपने ही खेल में उलझे योगी जी : अशोक कुमार पाण्डेय जी
वैसे राममंदिर इस देश में राष्ट्रीय मुद्दा बना था तो उसकी चंदा चोरी के राष्ट्रीय मुद्दा बनने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए
या योगी जी को बताना चाहिए
चढ़ावा चोरी पर सवाल कौन-कौन उठा सकते हैं?
बिहार के राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह बिहार विधान परिषद में 12 सदस्यों का मनोनयन कर सकता है. मगर इसके साथ क्लाउज है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171(5) के अनुसरा राज्यपाल सिर्फ ऐसे व्यक्तियों को ही मनोनीत कर सकता है, जिनकी साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा में विशेष ज्ञान या अनुभव हो. मकसद यह था कि विधान परिषद में ऐसे विशेषज्ञों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को जगह मिले जो चुनावी राजनीति के इतर(यानी उस दबाव से मुक्त होकर) अपने अनुभव के आधार कानून निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दे सके. संविधान में यह भी जिक्र है कि राजनीति या किसी राजनीतिक दल में योगदान को मनोनयन का आधार नहीं माना जायेगा.
अगर कम शब्दों में समझें तो राजनेताओं से इतर समाज के बुद्धिजीवियों, कलाकारों को भी विधान परिषद में जगह देने की बात थी. शर्त यह भी रखी गई थी कि जिनका मनोनयन हो उसके आगे इनमें से किसी योग्यता का जिक्र हो.
कल मैं दीपक प्रकाश के मनोनयन को लेकर जारी गजट देख रहा था. उसमें कहीं इस बात का जिक्र नहीं था कि वे साहित्यकार हैं, कलाकार हैं, वैज्ञानिक हैं, सहकारिता आंदोलन से जुड़े हैं या समाज सेवी. हालांकि समाज सेवी ऐसा टर्म है, जिसके भीतर कोई भी आ जाता है. आपने गरीबों में कभी कंबल बांट दिया तो हो गये समाज सेवी. मगर दीपक प्रकाश समाज सेवी हैं, यह भी नहीं कहा गया.
सच यह है कि मसला सिर्फ दीपक प्रकाश का नहीं है. बिहार विधान परिषद में इस वक्त उन्हें मिलाकर जो 12 सदस्य हैं, उनमें छह जदयू के हैं और अब तक छह भाजपा के थे, मगर अब दीपक प्रकाश अपनी पिता के पार्टी के सदस्य हैं. इनमें अगर बहुत खींच तान कर निकाला जाये तो दो लोग मिलते हैं, जो संविधान की भावना के अनुरूप हैं. उनमें एक रामवचन राय हैं, जो साहित्यकार हैं और दूसरे डॉ. राज्यवर्धन आजाद हैं, जो एक ख्याति प्राप्त आंखों के डॉक्टर हैं. शेष खांटी राजनेता है. कैसे, यह नामों की सूची पढ़कर देख लें.
1. अशोक चौधरी
2. जनक राम
3. राज्यवर्धन आजाद
4. राम वचन राय
5. संजय कुमार सिंह
6. ललन कुमार सर्राफ
7. राजेंद्र प्रसाद गुप्ता
8. संजय सिंह
9. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी
10. घनश्याम ठाकुर
11. निवेदिता सिंह
12. दीपक प्रकाश
अब इनमें कोई इन दोनों के अलावा साहित्यकार, वैज्ञानिक हो तो मुझे नहीं मालूम. मगर इतना समझ आता है कि मनोनयन के मामले में राजनीतिक दलों ने मिलकर संविधान की भावना का कचरा कर दिया है. 12 सीटों को सत्ताधारी दलों ने अपने हिसाब से बांट लिया है और अपने लोगों को उपकृत करने का जरिया बना लिया है. इनमें भी ज्यादातर पोलिटिकल लोगों को भरा गया है.
हैरत की बात है कि इसी विधान परिषद में बटुकेश्वर दत्त जैसे स्वतंत्रता सेनानी, बाबूलाल मधुकर जैसे मगही कवि और सियाराम तिवारी जैसे तबला वादक का मनोनयन हुआ था. मगर ये गिने चुने नाम हैं. इस कोटे का ज्यादातर इस्तेमाल सत्ताधारी दल ही करते हैं. अगर ऐसा ही है तो क्यों न इस कोटे को खत्मकर दिया जाये और इसे भी चुनाव के जरिये भरा जाये? अगर नेता ही आयें तो चुन कर आयें. उन्हें मनोनयन की सुविधा क्यों मिले?
झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बना दिया है .
सरकार ने छात्रों से बात करने के लिए चार मंत्रियों की एक कमेटी बना दी है .
इस कमेटी में झारखंड के उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार भी हैं . छात्र और सरकार के बीच आज बातचीत होनी थी लेकिन हो नहीं पाई है .
मैंने सुदिव्य कुमार से छात्रों की तरफ से उठाए हुए सवाल पूछे हैं .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर