Rotary Club के सदस्यों के समक्ष अविस्मरणीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। काव्य प्रस्तुति के उपरांत, श्रोताओं की आध्यात्मिक, व्यावहारिक और सामाजिक जिज्ञासाओं का अपनी क्षमता के अनुरूप उत्तर दिया तब मुझे ज्ञान हुआ कि ऐसे प्रश्नकाल प्रश्नकर्ता के लिए ही ज्ञानवर्द्धक नहीं होते, बल्कि उत्तर देनेवाले के लिए भी तर्कमेधा को जागृत करने का सुअवसर होते हैं।
डेढ़ घण्टे के अनवरत प्रश्नकाल में मैंने रामायण, महाभारत, साहित्य और मनोविज्ञान की जाने कितनी गंगाओं में गोता लगा लिया।
सत्र के बाद, किसी ने तार्किक क्षमता को सराहा, तो किसी ने प्रत्युत्पन्नमति की प्रशंसा की। किसी ने भाषाज्ञान की बलैयाँ ले लीं, तो किसी ने शब्द चयन को मुग्ध दृष्टि से निहारा।
प्रश्नों के जो उत्तर मैं दे पाया, उनसे कुछ आँखों में आँसुओं का अवतरण हुआ और कुछ होंठों पर मुस्कान ठहर गयी।
कुल मिलाकर अभूतपूर्व अनुभव हुआ। आनंद वृष्टि हुई।
अब अपने ���ीतर पुरुषोत्तम की चेतना सहेजे, निकल पड़े हैं नागपुर की ओर। कल जब अकोला के आकाश में 'रवि होगा अस्त' तो हम ज्योति के पत्र पर 'पुरुषोत्तम' लिखेंगे।
जय राम जी की 🙏
रावण के इस रूप को जब स्वयम भगवान श्री राम ने व्यक्त किया, श्री लक्ष्मण भी स्तब्ध रह गए। रावण के जीवन के अंतिम क्षण व श्री राम का उम्दा चरित्र
https://t.co/BvQnkQMbe3
#प्रयागराज#विजयादशमी#दशरथ