क्या आप जानते हैं कि प्राचीन यूरोप का शहरीकरण भारत के नाग समुदाय से जुड़ा हो सकता है?
और क्या आपने कभी सोचा है कि बौद्ध धर्म के त्रिरत्न – बुद्ध, धम्म और संघ – की रक्षा का कार्य भी नागों ने ही किया था?
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@BhanuNand@AdvAghara@ArbindKumarVe17
क्या आप जानते हैं कि प्राचीन यूरोप का शहरीकरण भारत के नाग समुदाय से जुड़ा हो सकता है?
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यह स्तंभ एक बौद्ध अशोक स्तंभ है, जिसे कोणागमन बुद्ध को समर्पित किया गया है। कोणागमन बुद्ध बौद्ध धर्म के अनुसार अतीत के सप्त बुद्धों (सात बुद्धों) में से एक हैं। यह स्तंभ ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लेकिन इसे भी शिवलिंग समझाने की कोशिश हो रही है।
यह स्तंभ एक बौद्ध अशोक स्तंभ है, जिसे कोणागमन बुद्ध को समर्पित किया गया है। कोणागमन बुद्ध बौद्ध धर्म के अनुसार अतीत के सप्त बुद्धों (सात बुद्धों) में से एक हैं। यह स्तंभ ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लेकिन इसे भी शिवलिंग समझाने की कोशिश हो रही है।
प्राचीन भारत में संस्कृत भाषा को डेवलप करने के पीछे क्या कारण और मकसद रहा होगा, इस बात को समझना जरूरी है।
क्यों कि यह भाषा ना ही आम जन मानस की बोली बन सकी और न ही भारत के अधिकांश हिस्सों में फैल पाया।
तो क्या इस भाषा का विकास सिर्फ हिंदू धर्म के ग्रंथों को लिखने के लिए किया था?
प्राचीन भारत में संस्कृत भाषा को डेवलप करने के पीछे क्या कारण और मकसद रहा होगा, इस बात को समझना जरूरी है।
क्यों कि यह भाषा ना ही आम जन मानस की बोली बन सकी और न ही भारत के अधिकांश हिस्सों में फैल पाया।
तो क्या इस भाषा का विकास सिर्फ हिंदू धर्म के ग्रंथों को लिखने के लिए किया था?
प्राचीन भारत में संस्कृत भाषा को डेवलप करने के पीछे क्या कारण और मकसद रहा होगा, इस बात को समझना जरूरी है।
क्यों कि यह भाषा ना ही आम जन मानस की बोली बन सकी और न ही भारत के अधिकांश हिस्सों में फैल पाया।
तो क्या इस भाषा का विकास सिर्फ हिंदू धर्म के ग्रंथों को लिखने के लिए किया था?
भारत में जितने भी संतों, बौद्धों, अजिवको आदि दर्शन बनें है, सभी समण संस्कृति का हिस्सा थे, लेकिन वमणो ( ब्राह्मणो) ने समण शब्द का अर्थ बदलकर उसे कमजोर किया।
इस विडियो से पुरी जानकारी पाएं
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@ScienceJourney2@hpsinghu@DrRajeshPatel20@BhanuNand@C1_Suresh
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद से जब परिवारवाद की शुरुआत हो ही चुकी है
तो फिर मान्यवर कांशीराम साहब के परिवार वालों को पार्टी से दूर क्यों रखा जा रहा?
मान्यवर कांशीराम साहब की बहन उनके भाई उनके भतीजों को भी पार्टी में शामिल करना चाहिए
क्या सिर्फ मायावती जी के परिवार के ही लोग पार्टी चलाएंगे?
मान्यवर कांशीराम साहब के परिवार वालों की काफी यादें जुड़ी हैं इस पार्टी से
आप लोग बताओ मान्यवर कांशीराम साहब के परिवार वालों को बहुजन समाज पार्टी में होना चाहिए कि नहीं?
आदरणीय मायावती जी आज जो भी हैं वह मान्यवर कांशीराम साहब की वजह से हैं
ऐसे में मायावती जी को काशीराम साहब की विचारधारा से नहीं हटना चाहिए, कांशीराम साहब पार्टी में परिवारवाद के खिलाफ थे
यही कारण था कि उन्होंने अपने भाई या भतीजे को पार्टी में जगह नहीं दी
पहली मुलाकात में काशीराम साहब ने आईएएस की तैयारी कर रहीं मायावती जी से कहा, मैं एक दिन तुम्हें इतनी बड़ी लीडर बना दूंगा कि तब एक कलेक्टर नहीं, बल्कि तमाम कलेक्टर तुम्हारे सामने फाइल लेकर खड़े होंगे
मान्यवर काशीराम साहब ने जो वादा मायावती जी से किया था उसे निभाया भी
उन्होंने मायावती जी को उस मुकाम पर पहुंचा जहां तमाम कलेक्टर उनके सामने
फाइल लेकर खड़े रहते थे
मायावती जी अगर फिर से सत्ता में आना चाहती हैं तो उन्हें भाजपा के खिलाफ कड़ा रुख करना पड़ेगा सिर्फ 2–3 बहुजन महापुरुष नहीं सभी बहुजन महापुरुष का सम्मान करना पड़ेगा
अगर इसमें कुछ मैंने गलत लिखा हो तो बताओ?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर ग्वालियर खंडपीठ में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न, उपरम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा की स्थापना को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद अपमानजनक और हिंसक मोड़ पर पहुँच चुका है।
माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बाबा साहेब की प्रतिमा को न केवल न्यायालय परिसर में प्रवेश से रोका जा रहा है बल्कि ये धमकी दी रही है "प्रतिमा ही नहीं बचेगी"। यह सीधा न्यायपालिका की अवमानना है। यह सिर्फ एक मूर्ति का सवाल नहीं है, यह हमारे आत्मसम्मान, इतिहास और संवैधानिक चेतना का प्रश्न है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि जब भीम आर्मी के निहत्थे कार्यकर्ताओं ने इस अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्वक विरोध किया, तब पुलिस की मौजूदगी में उन पर कायराना हमला किया गया।
यह हमला सिर्फ भीम आर्मी पर नहीं, बाबा साहेब के विचारों और बहुजन आत्मसम्मान पर हमला है।
मेरा सवाल है मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, क्या आपकी सरकार उस सोच के सामने नतमस्तक हो चुकी है जो बाबा साहेब की विरोधी है और संविधान की आत्मा को कुचलना चाहती है?
हम इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठ सकते है। बहुत जल्द मैं ग्वालियर आऊंगा।
@MP_MyGov@CMMadhyaPradesh