A city as beautiful as Jaipur deserves better.
When more garbage ends up on the streets than in dustbins, it is a failure of both civic administration and public responsibility.
Saif Ali Khan: "Taimur means iron. We had no idea but people said, there was an ASIAN TURKISH INVADER of India with a similar name that was negative."
Kareena Kapoor Khan: "Saif loves history, he is very articulate. He likes warriors, and he reads about them. He was a fan of Mongol Taimur."
Whom will you believe — Husband or the wife?
>ब्रो का नाम प्रशांत कुमार दत्ता है
>ब्रो ने 1992 में असम स्टेट सर्विस जॉइन की
>ब्रो प्रमोट होकर IPS बन गया
>ब्रो 2019 में DIG पोस्ट से रिटायर हो गया
>अब ब्रो की 53 करोड़ की सम्पत्ति को ज़ब्त कर लिया गया है
>ब्रो ने भविष्य को देखते हुए कई गुवाहाटी और मुंबई में कई होटल्स बनाये
>ब्रो 2020 में असम सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा लीक कराने में मुख्य अभियुक्त भी है,
>ब्रो के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति की जाँच चल रही है
>जरा सोचों ब्रो ने जीवन भर घूंस के पैसों से कितनी ऐश की होगी
>ब्रो दो चार साल और रहता तो 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा क्रॉस कर देता
>मुझे ब्रो पर पूरा भरोसा है कि अभी और भी माल होगा
>हमें ऐसे और ब्रो चाहिए जो हमें जीवन में और कमाने की प्रेरणा और मोटीवेशन देते रहें
ट्रेन में सीट नहीं मिलने पर लैट्रिन, बाथरूम में बैठकर जाते हैं और सीट मिल जाने पर कोच को ही लैट्रिन बना देते हैं।
ट्रेन में प्याज छीलो, मूंगफली खाओ और घर जाकर फ्री राशन चांपकर सो जाओ।
गाजियाबाद में अवैध तीन मंजिला मजार पर चला बुलडोजर।
गाजियाबाद की ट्रॉनिका सिटी में तीन मंजिला मजार पर बुलडोजर चला। जिस जगह पर यह मजार बनी थी, वह यूपीएसआईडीए (UPSIDA) की जमीन है और ग्रीन बेल्ट एरिया में आती है।
कई नोटिस देने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
इस निर्माण की शुरुआत साल 2001 में एक छोटे से ढांचे से हुई थी। समय के साथ कथित तौर पर आसपास की जमीन पर भी कब्जा बढ़ता गया।
करीब ढाई दशक में यह निर्माण तीन मंजिल तक पहुंच गया और लगभग 300 वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में फैल गया।
Some of the actors are different. Very different from rest of the bollywood. He is one of them. Vidyut Jamwal, an actor, martial artist and youth ambassador at the Yoga event, addressed the audience in a very sweet and gracious Sanskrit language 😇👌🏼
टुंडला रेलवे स्टेशन पे पहुँचे बहुत भारी आर्किटेक्ट,
जहाँ मोबाइल कैमरा ऑन करके इन्होंने ग्रेनाइट लगाने की विधि को बखूबी समझाया।
साथ में भ्रष्टाचार, लापरवाही, घूसखोरी जैसे बड़े शब्दों का मसाला भी लगाया।
थैंक्स फॉर लिसनिंग गाइज💀
I checked many weather websites and local stations for Delhi today, the max temperature I found was 38. But India's adversaries influenced world media are showing the same temp as 44. My hunch says this is being done to hurt travel and business to India.
> She gets Rs 3,000 every month
> Her family gets free ration every month
> Her unemployed husband gets all the subsidies
> She knows she is in the majority
> Her vote decides who comes to power
She thinks she owns the country because, in her mind, she does.
‘भरत तिवारी के मोबाइल में घोटाले के सबूत थे’: 1400 करोड़ के फंड में हेरफेर, जगदीशपुर SDM से भरत तिवारी की तनातनी की इनसाइड स्टोरी; देखें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/TdiVqFGKpW
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Monday morning humour :
A journalism degree or press card isn't proof that someone is a journalist.
They're simply documents showing you've completed a course or received accreditation.
What makes someone a journalist is the work they do, not peddling some party's agenda
अगर किसी का नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में जाने का सपना अधूरा रह गया,
वो जंतर-मंतर पर जाकर मेथड ऐक्टिंग सीख सकता है ,इस ऐक्टिंग के लिए सीधे ऑस्कर की माँग है,उसके नीचे बात नहीं बनेगी
Meet the Bast@rds. Know the full modus operandi how these Bast@rds were playing with Astha of crores of Hindus. They deserve nothing less than capital punishment but sadly our laws don't have such provision for 'Murder of Astha'.
"मुझे दया नहीं चाहिए... मुझे सिर्फ न्याय चाहिए।"
जयपुर की एक साधारण बेटी रेशु गुप्ता की यह पुकार आज हजारों नहीं, लाखों लोगों का दिल झकझोर रही है।
रेशु बताती हैं कि उन्होंने बीएससी (मैथ्स) की पढ़ाई की, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन पिता के कोरोना काल में निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मजबूरी में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और आखिरकार अपनी मेहनत से मोमोज का छोटा-सा ठेला शुरू किया, ताकि मां और बहन का सहारा बन सकें।
लेकिन उनका दावा है कि 25वें दिन ही उनकी जिंदगी बदल गई। रेशु के अनुसार, कार्रवाई के दौरान गर्म पानी से भरा स्टीमर गिरने से वे गंभीर रूप से झुलस गईं। उनका कहना है कि वे मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन उन्हें समय पर राहत नहीं मिली। इसके बाद भी न्याय की लड़ाई आसान नहीं रही। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़े।
रेशु कहती हैं कि आज भी वह अपने इलाज का खर्च खुद और उनका परिवार उठा रहा है। वह किसी से बदला नहीं चाहतीं, सिर्फ निष्पक्ष जांच, इलाज में सहायता और न्याय की मांग कर रही हैं। उनका सबसे बड़ा दर्द यह है कि उनके चेहरे और भविष्य को लेकर उनके मन में गहरी चिंता है। वे कहती हैं, "मैं हारना नहीं चाहती... बस थोड़ा टूट गई हूं।"
रेशु ने सरकार से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो। उन्होंने अपने इलाज का पूरा खर्च, आर्थिक सहायता और सुरक्षा की भी मांग की है। साथ ही कहा कि यदि सड़क किनारे रोजगार गलत है, तो ऐसे लोगों को सम्मानजनक रोजगार का विकल्प दिया जाए।
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी भी है। निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने आना जरूरी है, ताकि पीड़ित को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।