"हूं हराम कढ़ा दई म्हारे भाईया रा 150 गांव है... थारे बाप रो लेनो ��ी देनो नी रोड म्हारे भाई MLA री।"
लोकतंत्र की जो परिभाषा सबसे अधिक सुनी और पढ़ी जाती है, वह यह है कि यह “जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा” चुनी गई शासन व्यवस्था है। जनता द्वारा चुनी गई सरकार, जनता के धन से जनता की ही सुविधा के लिए विकास कार्य करवाती है।
ज�� गांव के एक बुजुर्ग को सड़क की गुणवत्ता पर शंका हुई, तो उन्होंने “चलो जाने दो” कहकर चुप रहने के बजाय आवाज उठाई और स्वयं निर्माण स्थल पर पहुंच गए। बुजुर्ग द्वारा सड़क की गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोप सत्य हैं या नहीं, यह जांच का विषय हो सकता है। लेकिन केवल शंका के आधार पर भी यदि जनता अपने लिए बन रही उन सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है, जिन पर उन्हें आने वाले कई वर्षों तक निर्भर रहना है, तो इसमें गलत क्या है?
एक तो कई वर्षों के बाद जाकर सड़क गांव तक पहुंचती है। उस पर भी यदि गुणवत्ता से कोई समझौता होता है, तो निश्चित ही मतदाता खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।
"मैं गांव रा लोग की देख नी सका?"
ठेकेदार बड़े रोब के साथ पूछ रहे हैं कि आपको किसने ऑथराइज किया है। जबकि सच्चाई यह है कि भारत के संविधान से बड़ी कोई ऑथराइज संस्था नहीं है। संविधान ने ही आम जनता को यह ताकत दी है कि वह अपने अधिकारों के लिए सवाल उठा सके।
"करोड़ों रुपए हूं लगाऊं"
यह धन किसी के घर से नहीं आया है। यह एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपको ठेका मिलने पर प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त धन से आप सड़क का निर्माण कर रहे हैं।
दोनों की जाति और उपजाति एक है।) मेरे बहुत सारे गाँव हैं (मेरी जाति के अधीन) वो आयेंगे और तुम लोगों को दे�� लेंगे,.....
जैसेलमेर विधानसभा के लोगों को शिव में ठेका दिया जा रहा है, क्यों... भाई है!🤓
कुछ दिनों पहले विधायक ने भरे मंच में हथियारों की मांग की थी तब संदेह पैदा हुआ था कि कहीं विधायक की मंशा भविष्य में राजा भैया टाइप बाहुबली(जो विधायक के अधिकतर सपोर्टर का रोल मॉडल है) बनने की तो नहीं हैं। हथियार आसानी से मिल जाए और...
वाह रे मेरे बाड़मेर... और मेरी शिव विधानसभा
ठेकेदार साहब आपको पता है क्या यह शिव विधानसभा अब सिर्फ बाड़मेर या राजस्थान की नहीं रही इस पर पूरे देश की नजर है और आप जिस रविंद्र का जिक्र कर रहे हैं वह अब देश का नेता है इसलिए आप अपने वीडियो में विधायक या रविंद्र सिंह भाटी का नाम नहीं ले जहां तक मेरी जानकारी है रविंद्र सिंह कभी भी गुंडागर्दी के पक्ष में नहीं है आप जैसे कुछ लोग इस प्रकार का कृत्य करके उसे बढ़ती हुई ताकत में रस्ट का काम कर रहे हैं । राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी बहुत ही सख्त हैं इस प्रकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जिनके पास पीडब्लूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग का जिम्मा है माना कि आप बहुत ही प्रभावशाली और पैसे वाले आदमी हो लेकिन सिस्टम भी एक शब्द है जो हर व्यक्ति को बोलते और विरोध करने का अधिकार देता है।
और अपने सपोर्टर को हथियार और ताकत देकर क़ानून व्यवस्था पर कब्जा कर लिया जाए। अब लगभग ��ाफ़ हो रहा है। .... वीडियो में ठेकेदार की जो भाषा है, वो अब आम भाषा बनती जा रही है। पांच वर्ष अब मैं मालिक हूँ इसका, मेरे बाप की जागीर का गाँव है, विधायक मेरा भाई है(रिश्ता बस यही है कि
बहुत सारे दोस्त कमेंट करते है कि @hanumanbeniwal जी ने रैली की क्या परिणाम आये?
सामूहिक प्रयासों में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है।
गंभीर समस्या को देखते हुए हमारे गाँवों के लोग नेताजी के पास गये उन्हें आमंत्रित किया।
हमारे डोली के नेता @DoliThansingh जी ने बहुत संघर्ष किया और उन्हें ��िरफ़्तार तक किया गया।
एक विशाल रैली डोली में जोजरी नदी के किनारे हुई।
पूरे देश भर के लोगों का ध्यान इस रैली ने भी खींचा
रात के 4 बजे प्रशासन ने समस्या निवारण का आश्वासन दिया था।
हाल ही मैं किसानों के खाते में बंजर जमीन का मुआवजा आया है।
जोधपुर शहर में फ़ैक्टरियों के इलाके में जब हम मरूधरा की शूटिंग करने गये तो वहां के फैक्ट्री वालों का कहना था कि हमारी फैक्ट्री 20 दिन बंद रही।
अधिकारियों ने बंद रखने के लिए बोला था।
पानी उतरा तो कई घरों में राहत मिली थी।
विधायक ओर SDM रैली से पहले कई दिनों तक डोली अराबा गांव में राहत कार्य करते नजर आये थे।
अब कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।
हम आम लोग है साहब पीड़ित है दोनों मुख्य पार्टियों से।हम राजनीतिक विश्लेषक नहीं हैं और ना ही राजनीतिक विश्लेषण करते है।राजनेता तो राजनीति ही ��रेगे हमें नही पता राजनेताओं को कितना लाभ होगा नही होगा हम तो यही चाहते है जो हमारी आवाज बने उनका भला हो।इसलिए जो लोग राजनीतिक रोटिया सेकने का कमेंट करते है तो भरपेट करें।किसी को कोई मनाई नही है सब करे कमेंट करने वाले भी आयें स्वागत है आपका भी ऐसी ही रैली करें लोगों को जागरूक करे एकत्रित करें प्रशासन से न्याय मांगे।ओर नहीं तो आपको कोई हक नही बनता कि आप ऐसा कमेंट करें।कम से कम सत्ता धारी ओर विप��्ष के सपोर्टर तो शांत रहकर अपने दलों के नेताओं से अनुरोध करें कि हनुमान जी को क्यों आना पड़ा?
मित्रों में हमेशा राजनीति से तटस्थ रहा हूँ पर जोजरी के प्रदूषण के विषय पर हमने सबसे आह्वान किया ओर जो हम ग्रामीणों वन्यजीवों के लिए लड़े वो याद किया जायेगा।
हम नेताजी ओर उनकी पूरी टीम का धन्यवाद करते है ओर उम्मीद करते है वो आगे भी हमारे लिये आवाज बुलंद करते रहेंगे।
कैमरापर्सन राशिद अली काजमी [@justrashiddd] ने बताया, "पुलिस ने हमसे आइडी कार्ड मांगा, हमने दिखाया. आईडी कार्ड देखकर कहा कि डाउट है, इसकी जांच होगी. फिर धक्के मारते हुए बस में बैठा लिया. फिर आधे रास्ते में कनाट प्लेस में छोड़ दिया."
अंदर मंदर, अंदर क़ाबा!
यह दृश्य अद्वितीय और अलौकिक है। मानो धरती के भीतर स्वर्ग का द्वार खुल गया हो। चारों ओर पवित्रता का समंदर उमड़ रहा है, हर पत्थर, हर दीवार सदियों की इबादत की गवाही दे रही है। भीतर का सन्नाटा आत्मा की गहराइयों तक उतर जाता है और बाहर से आती धीमी तस्बीह की गूंज हृदय में एक अनुपम शांति भर देत��� है।
यह स्थान केवल एक इमारत नहीं, समय, श्रद्धा और आस्था का संगम है; जहाँ पहुंचकर मन स्वयं को सृष्टिकर्ता के सबसे निकट महसूस करता है और सांसों में दुआएँ और प्रार्थनाएँ घुल जाती हैं।#rakshabandhanspecial #RakshaBandhan2025 #RakshaBandan
एक पेड़ मॉं के नाम लगाने के लिए सैकड़ों केर के पेड़ कटा दिए गए हैं ग्राम पंचायत रोडवा कला बालेसर में।ऐसा हर जगह हो रहा है।गॉंव के सरपंच सरकार को खुश करने के लिए केर कटा रहे है जो कि स्थानीय पेड है जिसे पानी की जरूरत नहीं होती ओर ये हिरणो व अन्य पशुओं के लिए भी उपयोगी है लेकिन करंज लगाकर विलायती बबूल वाला काम किया जा रहा है।ओरण से पेड़ कटाने पर पाबंदी लगाई जाये सरकार।
@BhajanlalBjp@madandilawar@moefcc@ForestRajasthan
रोहिड़ा के लाखों पेड़ सूख गये है ये हजारों हिरण भी मर जायेगें।नेता ढोंग पीटते रहेगे “एक पेड़ माँ के नाम”😡😡
माननीय प्रधानमंत्री श्री ��रेन्द्र दामोदरदास मोदी @narendramodi @PMOIndia जी आपके पर्यावरण बचाओ अभियान ओर ये जोधपुर के नेताओं का फैक्ट्री वालों को NGT के आर्डर के बावजूद संरक्षण देना दोनो एक साथ कैसे चल सकता है।क्यों ये फैक्ट्री बंद नहीं हो सकती जब तक कि ये पानी ट्रीटमेंट ना करें।इन वन्यजीवों का क्या दोष है जो इनको मौत दी जा रही हैं जोजरी नदी में जोधपुर का प्रदूषित केमिकल को बहाकर।ये तस्वीर आपके विकास को विनाश कहलाने के लिए पर्याप्��� है।एक स्वस्थ जैवविविधता को कैसे नष्ट किया जा रहा है।@BhajanlalBjp @byadavbjp @KVSinghMPGonda @Sanjay4India1 अगर आप देख रहे है नेताजी तो आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप पर्यावरण संरक्षण का ढोंग करें।सबसे पहले इन हिरणों की जान बचाओ।रोहिड़ा काटने पर सजा है ये रोहिड़े किसने जलाये है @JodhpurDm साहब।@RSPCB_official @moefcc @ForestRajasthan @CPCB_OFFICIAL कोई कार्यवाही करो��े।
हमारे नेता @JogarampatelMLA @gssjodhpur दोनों मंत्री हैं यहां से बहुत पावरफुल है अपने आप में पर ये ठीक नहीं करवा सकते।
आज प्रदेश में यह वायरल हो रहा है :
एक दलित अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट क�� गाइडलाइंस की आड़ में राजस्थान का DGP बनने से रोका
राज्यों में DGP की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइंस जारी की थी और कहा था कि राज्य अपने नियम बना सकते हैं। शर्त यह थी कि DGP की नियुक्ति के समय उसकी सेवानिवृत्ति में छः माह बाकी हों और नियुक्ति दो वर्ष के लिए हो!
परंतु यह देखा गया है कि अचानक DGP का रिज़ाइन आता है और UPSC को नए DGP के नामों का पैनल भेजा जाता है।
राजस्थान में श्री उमेश मिश्रा को नवंबर 2022 में दो वर्ष के लिए DGP बनाया जाता है परन्तु दिसम्बर 2023 में उनसे अचानक इस्तीफा लिया जाता है और दिसंबर 2023 यूआर साहू को DGP बना दिया जाता है क्योंकि एक जनवरी को साहू DGP बनने की छः महीने की योग्यता नहीं र��ते थे। साहू का कार्यकाल समाप्त होने के छः महीने पहले ही उनका इस्तीफा आता है और उसी दिन उनको आरपीएससी चेयरमैन बना दिया जाता है, जो पिछले दस महीने से खाली था।
यह सब समय का ही कमाल है कि दिसंबर 2024 में यूआर साहू को अगर आरपीएससी चेयरमैन बना दिया जाता तो डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा पुलिस महानिदेशक पद के मजबूत दावेदार होते। इससे स्पष्ट है कि आरपीएससी चेयरमैन की नियुक्ति इस ��्रकार से की गई कि डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा न तो आरपीएससी चेयरमैन बन सकें और न ही नियमित पुलिस महानिदेशक।
ज्ञातव्य है कि आजादी के 77 वर्ष बाद राजस्थान में अनुसूचित जाति का कोई अधिकारी यहां तक पहुंचा था कि उसको नियमानुसार राजस्थान का पुलिस महानिदेशक बनाया जा सकता था। परंतु यूआर साहू के बाद डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा को कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक 30 जून तक यानी उनके सेवानिवृत्ति तक के लिए बनाया गया।
��हां यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा आरपीएससी चेयरमैन बनने की भी पूरी योग्यता रखते थे।
कुल मिलाकर यह बात सही साबित हो रही है कि भाजपा सरकार अनुसूचित जाति के अधिकारियों को उनका हक नहीं देती है।
आने वाले कई सालों में भी अनुसूचित जाति का कोई अधिकारी इस पद पर पहुंचने की स्थिति में नहीं है।
डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा की छवि एक इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की रही है जो जनता ���े लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। उनके आफिस में अगर कोई भी व्यक्ति बिना अपाइंटमेंट के भी आ जाता है तो उससे जरूर मिलकर ही घर जाते हैं भले ही रात के दस बज जाएं।
इसी कारण डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा जो राजस्थान के रहने वाले हैं, उनकी जनता में ल��कप्रियता बहुत अधिक है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति महापंचायत में 2 अप्रैल 2023 को तीन लाख से अधिक लोगों ने जयपुर मे हिस्सा लिया, यह बात दूसरी है कि सरकार ने महापंचायत के बाद उनसे सिविल राइट्स का प्रभार हटा दिया था।
वर्तमान सरकार ने मई 2024 में अनुसूचित जाति के अधिकारी को आज़ादी के बाद पहली बार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजस्थान का महानिदेशक बनाया और उन्��ोंने एक वर्ष में जितनी कार्यवाही की उतनी पहले कभी नहीं हुई और बड़ी मछलियां भी नहीं बच पाई।
यह भी एक खास बात है कि डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा ने सेंट जेवियर्स, सेंट स्टीफेंस और आईआईएम अहमदाबाद से शिक्षा प्राप्त की है, जो कि अनुसूचित जाति के अधिकारियों में कम ही मिलेगी।
डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा की लोकप्रियता इतनी है कि सभी राजनीतिक दलों से बड़ी संख्या में सर्वसमाज के विधायक, सांसद, जनप्रतिनिधियों एवं अध्यक्षों ने डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा को एक जुलाई से सेवा-विस्तार प्रदान करते हुए नियमित पुलिस महानिदेशक बनाने हेतु सरकार को लिखा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के विरुद्ध कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक ही कार्यरत हैं ।
अगर डॉ रवि प्रकाश मेहरड़ा की सेवानिवृत्ति सम्मानजनक नहीं होती है तो सरकार के लिए भारी पड़ सकता है, इसलिए सरकार की मजबूरी रहेगी कि या तो इन्हें सेवा-विस्तार प्रदान किया जाएगा या कोई अन्य आयोग में नियुक्ति दी जाएगी।
राजस्थान में पुलिस अधिकारियों में यह भी चर्चा है कि राजस्थान ही एक ऐसा प्रदेश है जहां राजस्थान के निवासी आईपीएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से वंचित किया जाता है पिछले कई सालों में राजस्थान का कोई मूलनिवासी अधिकारी पुलिस महानिदेशक या मुख्य सचिव नहीं बना है। अनुसूचित जाति के अधिकारियों के लिए तो यह बात और भी चिंताजनक है क्योंकि जिला पुलिस अधीक्षक अथवा समकक्ष डीसीप��� के करीब पचास पदों में केवल तीन पुलिस अधिकारी ही पोस्टेड है उनमें भी राजस्थान का मूल निवासी तो एक ही अधिकारी है जबकि राजस्थान में अनुसूचित जाति की आबादी करीब अठारह प्रतिशत है और जातिगत उत्पीड़न के मामलों में देश में अग्रणी राज्यों में हैं।(सौजन्य: व्हाट्सएप)
माननीय @Sanjay4India1 जी गोडावण संरक्��ण पर पिछले 12 सालों से जी जान से काम किया है इस नन्ही सी जान ने।शहीद “गोडावण मैन ऑफ इंडिया “ के नाम से शहीद का दर्जा मिले यही अनुरोध करते है आप से।सार्वजनिक रूप से जनमानस में वो गोडावण मैन ऑफ इंडिया से ही जाने जायेगें।
#गोडावण_मैन_ऑफ_इंडिया
#राधेश्याम_पे��ानी
डोल का बाढ़ जंगल में जारी निर्माण कार्य और सरकार द्वारा लगातार संवाद से इंकार के विरोध में आज एक दिवसीय सांकेतिक सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस सत्याग्रह में 300 से अधिक नागरिकों ने हिस्सा लिया। निर्माण कार्य के विरोध में 8 साथियों ने भूख हड़ताल की।
@SauDeependra पूरी तरह से अगर भारतीय होना अगर सही है तो पूरी तरह से पाकिस्तानी होना भी गलत नहीं है।
राणा ने कहा था धाट सिंध से अलग नहीं हो सकता। इतना सा ही मूल्य था और उस पर अड़े रहे।
अपने क्षेत्र के लोगों के साथ ख��़ा होना बड़ी बात है, इसमें हिन्दू मुस्लिम नहीं देखा जाता।
URGENT
Today, May 13th – Bulldozers entered the most dense part of Dol Ka Badh.
Countless animals are in danger. Their habitat is being torn apart.
Join us at DKB at 6 PM TODAY
We need strength in numbers to stop this massacre.
Don’t stay silent. Don’t stay home.
#savedolkabadh
पेड़ों की चुप्पी से पहले अपनी आवाज़ बुलंद करें।
इस रविवार, 11 मई को सुबह 10:30 बजे शामिल हों शांति प्रदर्शन और एकजुटता मार्च में —डोल का बाढ़ और जयपुर के ह���ियाली को बचाने के लिए।
आइए, साथ मिलकर हमारे जंगल को बचाएं।
#savedolkabadh
जब एक बेटी जंगल बचाने के लिए उपवास कर सकती है, तो तुम क्या सिर्फ तमाशा देखते रहोगे, जयपुर वालों? उठो, जागो - डोल का बाढ़ सिर्फ जंगल नहीं, हमारी ज़िंदगी है। अब नहीं तो कभी नहीं।
#savedolkabadh
यह तस्वीर पाकिस्तान की नहीं, बल्कि राजस्थान के बाड़मेर की है। जहां एक पिता और बेटी रात के अंधेरे में मीलों पानी की तलाश में भटकते हैं। यह गहराते जल संकट की दर्दनाक तस्वीर है, जो जल जीवन मिशन के दावों की विफलता को उजागर करती है।